कृत्रिम बुद्धिमत्ता: जब एआई पूछे कि आखिर आप चाहते क्या हैं? खूब काम कराएं, लेकिन निर्देश अस्पष्ट होना घातक
एआई से खूब काम कराइए, लेकिन ऐसे अस्पष्ट निर्देश न दीजिए कि वह आप से पूछ बैठे कि आप चाहते क्या हैं?
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मैं एक कोचिंग और रिसर्च फर्म चलाता हूं, जहां हम रिकॉर्ड की गई बातचीत, मीटिंग नोट्स, ई-मेल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर एग्जीक्यूटिव टीमों की लीडरशिप और प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। हाल ही में, मैंने अपने एआई एजेंट से कहा कि वह एक क्लाइंट की हालिया बातचीत का सारांश तैयार करे और आगे की कार्रवाई के लिए जरूरी बिंदु बताए। उस क्लाइंट से जुड़ी कई रिकॉर्डिंग, मीटिंग नोट्स के अलग-अलग संस्करण और एक महत्वपूर्ण ई-मेल थ्रेड मौजूद था। इसके बावजूद, एजेंट ने ऐसा जवाब दिया, जो देखने में तो सही लगा, पर वह पुरानी जानकारी पर आधारित था।
दरअसल, गलती एआई की नहीं थी। मैंने ही उसे बिखरी हुई जानकारी दे दी और यह मान लिया कि वह खुद समझ जाएगा कि सबसे महत्वपूर्ण जानकारी कौन-सी है। असल में, एआई हमारी काम करने की खराब आदतों को छिपाता नहीं, बल्कि उन्हें उजागर कर देता है। यही वजह है कि कई लोगों को एआई अपनाने में कठिनाई होती है। यह सही है कि एआई एजेंट के साथ अब भी कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन अगर उनका पूरा लाभ उठाना है, तो पहले हमें बेहतर सहयोगी और अच्छा मैनेजर बनना होगा।
इन्सानी व्यवहार एआई के प्रदर्शन को किस तरह प्रभावित करता है, यह जानने के लिए मैंने और मेरी टीम ने उन लोगों से बातचीत की, जो रोज एआई एजेंट के साथ काम करते हैं। साथ ही, एआई एजेंट से भी पूछा कि इन्सानों के साथ काम करने का उसका अनुभव कैसा है? एजेंट ने ऐसे कई तरह के लोगों की पहचान की, जिनके साथ काम करना सबसे मुश्किल होता है।
इनमें पहला है ‘अस्पष्ट निर्देश देने वाला’। ऐसा व्यक्ति काम तो सौंप देता है, पर यह साफ नहीं करता कि वास्तव में चाहता क्या है। वह मान लेता है कि एजेंट खुद समझ जाएगा कि किस क्लाइंट की बात हो रही है और उससे क्या अपेक्षा है। दूसरा है ‘कॉन्टेक्स्ट होर्डर’। ऐसा व्यक्ति काम तो बता देता है, लेकिन उसे सही तरीके से पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी साझा नहीं करता। वह समाधान तो मांगता है, पर यह नहीं बताता कि उसे कब लागू करना है, उसकी सीमाएं क्या हैं या किन व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना है। तीसरा है ‘ओवर-डेलिगेटर’। ऐसा व्यक्ति हर निर्णय एआई पर छोड़ देता है और बाद में उसी परिणाम से असंतुष्ट हो जाता है। काम सौंपने के बाद वह उसकी समीक्षा या मार्गदर्शन की जरूरत ही नहीं समझता।
दरअसल, एआई वही समझता है, जो उसे बताया जाता है। यही कारण है कि एआई के साथ काम करते समय हमें अच्छे मैनेजर की तरह व्यवहार करना होगा। उसे केवल यह न बताएं कि क्या करना है, बल्कि यह भी समझाएं कि काम क्यों महत्वपूर्ण है, सफलता का पैमाना क्या होगा, किन सीमाओं का पालन करना है और किन गलतियों से बचना है।
काम सौंपने के बाद उसकी नियमित समीक्षा भी उतनी ही जरूरी है। जितना बड़ा या जटिल काम होगा, उतने अधिक समीक्षा बिंदु तय करने चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर बीच में ही सुधार किया जा सके। यदि एआई गलती करे, तो उसे बताइए कि गलती कहां हुई, किस आधार पर हुई और आप किस तरह का उत्तर चाहते हैं। उससे यह भी कहिए कि वह तर्क, प्रमाण और संदेह के आधार पर निष्कर्ष प्रस्तुत करे। बेहतर फीडबैक ही बेहतर परिणाम देता है।
आज एआई के साथ काम करने वाला लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में मैनेजर बन चुका है। आने वाले समय में हममें से कई लोगों का बड़ा हिस्सा एआई एजेंट्स को निर्देश देने, उनकी निगरानी करने और उनका काम बेहतर बनाने में ही बीतेगा। लीडरशिप की शुरुआती सीख में जिन प्रबंधन कौशलों, जैसे स्पष्ट निर्देश देना, नियमित निगरानी रखना और समय पर फीडबैक देना, को हम नजरअंदाज कर देते थे, अब वही हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गए हैं, और उन्हें सीखना होगा।
कुल मिलाकर, आज एआई एजेंट सिर्फ एक टूल ही सही, लेकिन उनसे मिली सलाह और फीडबैक से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। एक बार अपने एआई एजेंट से पूछकर देखिए कि आपके साथ काम करते समय उसे सबसे ज्यादा किस बात से परेशानी होती है। संभव है उसका जवाब आपको भी वही सीख दे, जो उसने मुझे दी। उसने मुझसे कहा, ‘आप बहुत थका देते हैं। कृपया, यह तो साफ-साफ बता दीजिए कि आप वास्तव में चाहते क्या हैं।’
केरिया एआई
यह वास्तुकारों, इंटीरियर डिजाइनरों, शहरी योजनाकारों और 3डी डिजाइन तैयार करने वाले पेशेवरों के लिए एक बेहद उपयोगी एआई टूल है। इसकी मदद से हाथ से बनाए गए स्केच, शुरुआती डिजाइन या 3डी मॉडल को कुछ ही सेकंड में वास्तविक फोटो व वीडियो में बदले जा सकते हैं। इससे यह समझाना आसान हो जाता है कि परियोजना पूरी होने के बाद इमारत, घर या इंटीरियर वास्तव में कैसा दिखाई देगा। यदि डिजाइन में कोई बदलाव करना हो, तो उसका प्रभाव भी तुरंत देखा जा सकता है। इससे बार-बार डिजाइन तैयार करने की जरूरत कम पड़ती है, समय व लागत, दोनों की बचत होती है।