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बदलाव की 117 कहानियां: वंचित महिलाओं के लिए वातावरण तैयार करना चुनौती, आईना भी है सामाजिक बदलाव की यह इबारत
Sat, 01 Aug 2026 07:53 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 01 Aug 2026 07:53 AM IST
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महिलाओं का सशक्तिकरण उत्साह बढ़ाने वाला
- फोटो : फ्री-पिक-अमर उजाला
भारत की 117 सर्वाधिक प्रभावशाली महिलाओं का नाम वर्ष 2026 की कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमेन लीडर्स लिस्ट में आना उस सामाजिक बदलाव की इबारत है, जिसमें महिलाएं सिर्फ सफलता की दर्शक नहीं, बल्कि आर्थिक सफलता की कहानियां रच रही हैं। ये महिलाएं 39 लाख करोड़ रुपये के साम्राज्य पर राज करती हैं, जो फिनलैंड की कुल जीडीपी से भी अधिक है।
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इन सफल महिलाओं की सूची का सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इनमें से 98 (यानी 84 फीसदी) ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो विरासत में मिली संपत्ति या पद के जरिये आगे बढ़ने वाली महिलाओं की संख्या से ज्यादा है। 2025 की सूची में 97 महिलाएं शामिल थीं, यानी पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी अधिक महिलाओं ने इस सूची में अपनी जगह बनाई है। इसे महिला सशक्तीकरण जैसी प्रचलित शब्दावली में बांधना इनकी उपलब्धियों को कमतर करके आंकना होगा।
वास्तव में, यह सूची संकेत है कि भारतीय महिलाएं शिक्षा, उद्यमिता, व्यवसाय, खेल, मीडिया, कला, साहित्य और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही हैं, जो लंबे समय तक पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र माने जाते थे। बेशक यह सूची उत्साहित करती है, पर सवाल यह भी उठता है कि करीब 140 करोड़ की आबादी वाले देश में मात्र 117 महिलाओं की सूची के क्या मायने हैं।
सूची का दूसरा पहलू उस असमानता को भी दर्शाता है, जिसमें करोड़ों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पाते। बड़े शहरों और कॉरपोरेट जगत की इन महिलाओं की सफलता इस बात की गारंटी नहीं हो सकती कि देश के छोटे शहरों, कस्बों की महिलाओं को भी शिक्षा, उद्यम और नेतृत्व के मौके मिल रहे हैं। एक महिला की सफलता की कहानी बेशक सैकड़ों महिलाओं को प्रेरित कर सकती है, पर सामाजिक ढांचे और व्यवस्था में सुधार से ही देश की अधिकांश महिलाओं को शिक्षा, व्यवसाय, कला और शासन-प्रशासन में नेतृत्व के अवसर मिल सकते हैं।
केवल कुछ महिलाओं के शीर्ष पर पहुंचने से महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता, इसके लिए वैसी सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां बनानी होंगी, जिनमें सबको आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें। इस दृष्टि से यह सूची समाज के लिए आईना भी है और चुनौती भी।
आईना इसलिए कि देश की करोड़ों महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक अवसर नहीं मिल पाते हैं और चुनौती इसलिए कि हमें इन वंचित महिलाओं के लिए वैसा वातावरण तैयार करना है, जो उन्हें देश के विकास में योगदान करने का अवसर प्रदान कर सके।