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नितिन की नई टीम: भाजपा की रणनीति को कितनी धार? समय ही बताएगा इस सवाल का जवाब
Tue, 18 Aug 2026 01:38 PM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: न्यूज डेस्क
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:38 PM IST
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भाजपा की नई टीम में क्या बदलाव?
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अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को जिस तरह प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे साफ है कि भाजपा ने संगठनात्मक पुनर्संरचना के बहाने आने वाले चुनावों की राजनीतिक बिसात भी बिछानी शुरू कर दी है।
दरअसल, भाजपा की राजनीति में संगठन कभी केवल संगठन नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने का सबसे प्रभावी जरिया रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति में राज्यों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक परिस्थितियों का संतुलन साधना स्वाभाविक रूप से व्यापक राजनीतिक संदेश देता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद नेपथ्य में चली गई पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े राम माधव की पार्टी में अहम संगठनात्मक भूमिकाओं में वापसी हुई।
इसके अलावा, छह महिलाओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, तीन को राष्ट्रीय सचिव और एक को राष्ट्रीय महासचिव बनाना दर्शाता है कि नए बदलाव में महिलाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डालता है। ऐसे में 2027 के चनाव से काफी पहले ही संगठन को चुनावी मोड में ले जाना पार्टी की रणनीतिक जरूरत भी है। नई टीम के गठन से पूर्व नितिन नवीन का प्रदेश के बीस सांसदों से विमर्श और टीम में दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश को मिला सर्वाधिक प्रतिनिधित्व इसी तैयारी का संकेत है।
एक ओर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के रूप में सार्वजनिक पहचान रखने वाले प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बनाए रखना, तो दूसरी ओर अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी कुंवर बासित अली को दिया जाना इस बात का संकेत है कि भाजपा उन सामाजिक समूहों के बीच अपना राजनीतिक आधार बढ़ाना चाहती है, जहां उसका प्रभाव पारंपरिक रूप से सीमित रहा है। इस नई टीम में भाजपा की आईटी टीम के प्रमुख अमित मालवीय का नाम शामिल नहीं है, तो इसकी वजह शायद कई अहम मौकों पर पार्टी का पक्ष ठीक ढंग से न रख पाने के आरोपों को भी माना जा सकता है।
नई सूची में पीयूष गोयल, जो पहले भी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे हैं, की फिर इसी पद पर वापसी के पीछे आने वाले दिनों में उनकी भूमिका में बदलाव के संकेत भी छिपे हो सकते हैं। नई टीम में वैसे तो संगठन के पुराने अनुभवी लोगों और युवा चेहरों का मिश्रण दिखता है, फिर भी नई टीम में महिलाओं और युवाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है। जाहिर है, 2027 के चुनावी रण के लिए भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। अब यह समय ही बताएगा कि नितिन नवीन की नई टीम भाजपा की रणनीति को कितनी धार दे पाती है।