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मुद्दा:अतीत का बोझ और संबंधों की राह... इस मोड़ पर सावधानी कमजोरी नहीं, सोची-समझी रणनीतिक जरूरत का संकेत

K S Tomar केएस तोमर
Updated Wed, 29 Apr 2026 08:42 AM IST
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सार

भारत और बांग्लादेश एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां सावधानी किसी कमजोरी का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक जरूरत का संकेत है।

Burden of Past on India Bangladesh Ties caution not sign of weakness indication of strategic necessity
भारत-बांग्लादेश संबंध (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

भारत और बांग्लादेश के बीच विकसित हो रहे संबंधों में, किसी नाटकीय कूटनीतिक उपलब्धि के बजाय, एक सावधानीपूर्ण और लगभग शांत पुनर्समायोजन दिखाई देता है। तनाव के दौर के बाद, ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों ने ‘शांत कूटनीति’ की रणनीति अपना ली है, जिसमें वे केवल बयानबाजी करने के बजाय, धीरे-धीरे आपसी विश्वास बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

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तारिक रहमान के करीबी सहयोगियों की हालिया यात्रा, जिसे जान-बूझकर ‘आधिकारिक बातचीत’ के बजाय ‘सद्भावना मिशन’ का नाम दिया गया, दर्शाती है कि संदेह के अतीत के बोझ से दबे रिश्तों को सुधारने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है, न कि दिखावे की। यह सोची-समझी रणनीति संकेत हैै कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक महत्व को भली-भांति पहचानते हैं, भले ही उन्हें आंतरिक और भू-राजनीतिक दबावों से निपटना पड़ रहा हो। दोनों देश केवल पड़ोसी नहीं, बल्कि बदलते एशियाई परिदृश्य में एक-दूसरे पर निर्भर अहम साझेदार हैं। नई दिल्ली के लिए ढाका उसकी ‘पूर्वी पड़ोस नीति’, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजनाओं और पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है। वहीं, बांग्लादेश के लिए भारत सबसे बड़ा पड़ोसी होने के साथ एक महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार व भौगोलिक रूप से दुनिया तक पहुंच का प्रमुख द्वार भी है। हालांकि, अब दोनों के रिश्ते को नई पीढ़ी, बदलते राजनीतिक नेतृत्व और नई भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालना जरूरी हो गया है। ढाका द्वारा ‘समानता, निष्पक्षता और आपसी सम्मान’ पर दिया जा रहा जोर संकेत है कि वह पुराने असंतुलन वाली धारणा से आगे बढ़ना चाहता है। भारत के सामने गंभीर चुनौतियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर है। कट्टरपंथी संगठनों के फिर से सक्रिय होने की आशंका चिंता बढ़ा रही है। सीमा पार आतंक, विद्रोह और हथियारों की तस्करी के प्रति संवेदनशील भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र किसी नई अस्थिरता का जोखिम नहीं उठा सकता। एक और बड़ी चुनौती भारत की घरेलू राजनीति है। अवैध प्रवासन को लेकर बार-बार उठने वाले मुद्दे और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की धारणा को राजनीतिक रूप से उछालना, ढाका में असंतोष पैदा करता है। सीमावर्ती राज्यों में चुनावी माहौल के दौरान यह बयानबाजी तेज हो जाती है, जिससे अविश्वास बढ़ता है और कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।
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बांग्लादेश की राह भी आसान नहीं है। शेख हसीना के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने भारत के साथ मजबूत तालमेल बनाया था, पर अब वही विरासत ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति के तहत एक अधिक मुखर और आत्मकेंद्रित विदेश नीति में बदलती दिख रही है। पाकिस्तान के साथ ढाका का संपर्क और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश जैसे समूहों की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरण को और जटिल बना दिया है। बांग्लादेश को कुछ बेहद संवेदनशील मुद्दों को भी सावधानी से संभालना होगा, जिनमें भारत में शेख हसीना की मौजूदगी  सबसे अहम है। भारत के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखते हुए इस स्थिति में संतुलन बनाना बांग्लादेश के नेतृत्व की परिपक्वता की असली कसौटी होगी। ढाका ने स्पष्ट किया है कि वह किसी एक देश के साथ विशेष सुरक्षा गठबंधन में नहीं बंधेगा, फिर भी बीजिंग के साथ उसका आर्थिक रिश्ता मजबूत बना हुआ है। ऐसे में, भारत के साथ स्थिर संबंध बांग्लादेश को रणनीतिक लचीलापन देते हैं, जिससे वह किसी एक बाहरी ताकत पर पूरी तरह निर्भर होने से बच सकता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी-जैसे व्यापारिक गलियारे और ऊर्जा नेटवर्क-को नई गति मिल सकती है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के आर्थिक प्रवाह को नया आकार देगी। भारत के नजरिये से देखें तो, एक मित्रवत और सहयोगी बांग्लादेश उसकी पूर्वी सीमाओं को सुरक्षित बनाता है, पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कनेक्टिविटी को आसान करता है और क्षेत्रीय स्तर पर उसके प्रभाव को मजबूत करता है। दोनों देशों को एक ऐसी नई सोच अपनाने से फायदा होगा, जो संदेह और समय-समय पर उभरने वाले तनावों के बजाय आपसी सम्मान और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित हो।

दोनों देशों के संबंध इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां सावधानी किसी कमजोरी का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक जरूरत का संकेत है। अगर दोनों देश दूरदृष्टि और संयम के साथ अपनी-अपनी चुनौतियों का सामना करते हैं, तो यही सतर्क और धीमी प्रगति एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी में बदल सकती है।

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