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बांदा और इशारा: रिकॉर्ड टूटना महज एक चौंकाने वाली मौसमी घटना नहीं, क्या हम इस इशारे को समझने के लिए तैयार हैं?

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Wed, 29 Apr 2026 09:00 AM IST
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सार
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तपिश के अब तक के सभी रिकॉर्ड टूटना महज एक चौंकाने वाली मौसमी घटना नहीं, बल्कि इशारा है कि जलवायु परिवर्तन अब दूर की समस्या नहीं रह गया। सवाल यह है कि क्या अब हम इस इशारे को समझने के लिए तैयार हैं?
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Temperature of Banda In UP Record-breaking heat not merely startling seasonal phenomenon are we prepared
बांदा में गर्मी से टूटा रिकॉर्ड - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में गर्मी के अब तक के सभी रिकॉर्ड टूटना और इसका दुनिया के सर्वाधिक गर्म शहरों में शुमार होना महज एक चौंकाने वाली मौसमी घटना नहीं, बल्कि भयावह होते जलवायु संकट का एक संकेत भी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 12 दिनों में बांदा अगर छह बार देश का सबसे गर्म शहर रहा है, तो इसकी वजह समझी जा सकती है।



दरअसल, चट्टानी और शुष्क बुंदेलखंड क्षेत्र में, जहां बांदा स्थित है, जब सूर्य की किरणें सीधे सूखी जमीन पर पड़ती हैं, तब वे तेजी से हवा को गर्म करती हैं। इसके अतिरिक्त, गर्म पछुआ हवाएं तो यहां के तापमान को बढ़ा ही रही हैं। हालांकि, यह कहानी सिर्फ बांदा की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत की भी है, जो फिलवक्त लू और भीषण गर्मी की चपेट में है। वैश्विक तापमान में वृद्धि के साथ भारत में गर्मी की लहरें अगर समय से पहले और अधिक तीव्रता से आ रही हैं, तो इसके पीछे अल नीनो जैसे प्राकृतिक कारण बेशक होंगे, लेकिन क्या इसके लिए सिर्फ प्रकृति ही दोषी है?


तेज शहरीकरण ने अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव पैदा किया है, जिसमें कंक्रीट के जंगल सूर्य की गर्मी सोख लेते हैं और रात में छोड़ते हैं, जिससे न्यूनतम तापमान भी नहीं गिर पाता। वनों की कटाई, जलाशयों का सूखना और कृषि भूमि पर अतिक्रमण ने प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया को कमजोर कर दिया है। इसके नतीजे विनाशकारी होने ही थे। केंद्र सरकार ने राज्यों को सभी स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष लू प्रबंधन इकाइयों की स्थापना और एंबुलेंस सेवा को पुख्ता बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि साल-दर-साल जिस तरह से पर्यावरणीय बदलाव के संकेत बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए क्या ये सरकारी उपाय पर्याप्त होंगे।

हैरानी की बात है कि हर वर्ष इन्हीं महीनों में कमोबेश ऐसी ही स्थितियां खड़ी होने पर भी व्यवस्थाएं हर बार बदहवास-सी ही नजर आती हैं। सोमवार की रात मौसम में आए बदलाव ने लोगों को थोड़ी राहत भले दे दी हो और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आने वाले कुछ दिनों में भी तापमान में भी कुछ गिरावट आए, लेकिन मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इसका असर खत्म होते ही मई के पहले हफ्ते में गर्मी फिर अपने तेवर दिखा सकती है। लिहाजा, गर्मी फिलहाल हमारा पीछा छोड़ती नहीं दिखती। बांदा का तापमान एक स्वस्थ मनुष्य के ताप से करीब 10 डिग्री सेल्सियस अधिक होना संयोग नहीं, बल्कि एक इशारा है। असल सवाल यह है कि क्या अब हम इस इशारे को समझने के लिए तैयार हैं?

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