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रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू, क्या इंडोनेशिया बचा पाएगा यह नाजुक प्रजाति?
Fri, 14 Aug 2026 07:52 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
मुुकिता सुहार्तोनो, द न्यूयॉर्क टाइम्स
मुुकिता सुहार्तोनो, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 14 Aug 2026 07:52 AM IST
सार
इंडोनेशिया के बाली में एक संरक्षण केंद्र जुगनुओं को विलुप्त होने से बचाने की कोशिश कर रहा है और इसका असर अब दिखाई देने लगा है। कभी हजारों जुगनुओं से जगमगाने वाला तारो गांव फिर उनकी रोशनी से चमकने लगा है। लेकिन विकास, प्रदूषण और रसायनों ने इनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। तो क्या वैज्ञानिकों की यह मुहिम आने वाली पीढ़ियों के लिए जुगनुओं की चमक बचा पाएगी? आइए, विस्तार से समझते हैं...
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जुगनुओं को बचाने के लिए संरक्षण केंद्र में क्या किया जा रहा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बाली के तारो गांव में रात का अंधेरा अब फिर जुगनुओं की छोटी-छोटी रोशनियों से चमकने लगा है। कभी यह नजारा गांव की पहचान हुआ करता था, लेकिन विकास की तेज दौड़, प्लास्टिक कचरे और खेतों में बढ़ते रसायनों ने जुगनुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। आने वाली पीढ़ियां इस प्राकृतिक नजारे से वंचित न रहें, इसके लिए इंडोनेशिया के पहले और एकमात्र जुगनू संरक्षण केंद्र में इनकी संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
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जुगनुओं को बचाने के लिए संरक्षण केंद्र में क्या किया जा रहा है?
तारो गांव में बनाए गए फायरफ्लाई कंजर्वेशन हाउस में जीव विज्ञानी जुगनुओं की आबादी बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए विशेष उपकरण तैयार किए गए हैं, जिन्हें ‘हनीमून सूट’ कहा जाता है। लैब में पली-बढ़ी मादा जुगनुओं का जंगल से लाए गए नर जुगनुओं के साथ मिलन कराया जाता है। इसके बाद मादा जुगनुओं के अंडे इकट्ठा करके उन्हें इनक्यूबेटर में सुरक्षित रखा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद जुगनुओं की नई पीढ़ी तैयार करना है।
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बचपन की याद ने संरक्षण की मुहिम शुरू करने की प्रेरणा कैसे दी?
इस मुहिम के पीछे वायन वर्दिका की बचपन की यादें हैं। करीब एक दशक पहले जब वह क्रूज जहाजों की नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव तारो लौटे, तो वहां का बदला हुआ माहौल देखकर परेशान हो गए। नदियां प्लास्टिक कचरे से भरी थीं और धान के खेतों में बड़ी मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल हो रहा था। उन्हें अपना बचपन याद आया, जब गांव हजारों जुगनुओं की चमक से रोशन रहता था। उन्होंने जुगनुओं को बचाने का फैसला किया और अपने घर के एक हिस्से को ही संरक्षण केंद्र बना दिया।
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