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भारत की नकल और अमेरिका : उत्सव को मनाने और बधाई देने का सच, क्या सब वोट की खातिर?

Sat, 29 Oct 2022 07:29 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Sat, 29 Oct 2022 07:29 AM IST
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सार
अमेरिका में रहने वाले कई परिजन अभी तक बहुत गर्व से कहते रहे हैं कि वहां के कानून ऐसे हैं कि कोई किसी की जमीन-जायदाद पर कब्जा नहीं कर सकता। मगर लगता है कि अब इस तरह के गर्व करने के दिन लद चुके हैं।
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Indias imitation and America: truth of celebrating n whishing on festival, is it all for sake of votes
joe biden and his wife lit a lamp on diwali - फोटो : ani

विस्तार

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकावासी भारतीय लोगों के साथ दीपावली मनाई। दो भारतीय बच्चों को मंच पर बुलाकर प्यार भी किया। कहा कि आप हमारी उम्मीद की किरण हैं। भारत में यह जानकर लोग लहालोट हो गए। इसे भारतीयता की ताकत और हिंदुओं की जीत बताने लगे। अरसे से बहुत-से अमेरिकी राष्ट्रपति दीपावली की बधाई देते रहे हैं। 


इसे हम लोग खुश होकर किसी की भी जीत बताते रहें, लेकिन वहां भारतीयों की बढ़ी संख्या और उनके वोट, नेताओं की नजर तो बस उसी पर है। यह सब देखकर-सुनकर भारतीय नेताओं की याद आती है। वे भी हर पर्व-त्योहार पर वोट की खातिर बढ़-चढ़कर बधाई देते रहे हैं। इससे लगता है कि अमेरिकी हमारी नकल कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि अगर किसी उत्सव को मनाने और बधाई देने भर से झोली भर वोट मिल जाएं, तो क्या बुरा। 


यह बात अलग है कि वहां भारतवंशियों के प्रति नफरत और अपराध बढ़ते जा रहे हैं। उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं कि अपने देश वापस जाओ। यह हमारा देश है, यहां क्यों आ गए। और तो और, सुदूर पोलैंड में भी एक अमेरिकी ने एक भारतीय पर यही कहकर हमला किया कि तुम यहां भी आ गए। अपने देश में क्यों नहीं रहते? खैर, हमारी नकल सिर्फ वोटों के गुणा-भाग में ही नहीं हो रही। तरह-तरह के अपराध करने वाले भी इसमें पीछे नहीं हैं। 

हाल ही में खबर आई कि मैरीलैंड में एक दंपति ने करोड़ों खर्च करके अपने लिए पांच कमरों का मकान खरीदा। वे जल्दी ही वहां रहने आने वाले थे। एक दिन, जब वे अपने मकान के पास से गुजरे, तो उन्होंने वहां कुछ लोगों को देखा। जब पूछा, तो उन लोगों ने कहा कि यहां रहने का अधिकार उनका है। इसके कागजात भी उनके पास हैं। मकान मालिक ने अपने प्रॉपर्टी एजेंट को फोन किया, तो उसकी समझ में भी कुछ नहीं आया। 

जिस बैंक से लोन लिया था, वह भी कुछ मदद नहीं कर सका। परेशान होकर पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने आकर उन लोगों के कागजातों की जांच की, तो उन्हें ठीक नहीं पाया। लेकिन साथ में यह भी कहा कि इस मामले में वे क्या कर सकते हैं, क्योंकि यह मामला तो दीवानी का है। अब मकान मालिक की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे। इस घटना को पढ़कर आपको बहुत कुछ याद आ रहा होगा। 

अपने यहां तो दूसरे की जमीन–घर पर कब्जा करके लोग मौज करते हैं और मकान मालिक पुलिस और अदालतों के चक्कर लगाता रहता है। बैंक या अन्य संस्थाओं से लिए ऋण की किस्त भरता है। कई बार ऐसे मुकदमे कई-कई पीढ़ी तक चलते हैं, मगर कोई फैसला नहीं हो पाता। कितने लोग ऐसे हैं, जो पाई-पाई जोड़कर मकान बनाते हैं। गलती से किराये पर दे देते हैं और किरायेदार खाली करने से मना कर देते हैं। 

कई घटनाओं में तो किसी जरूरतमंद को मकान दे दिया, किराया भी नहीं लिया, लेकिन जब मकान मालिक ने उसमें रहना चाहा, तो मकान खाली करने से मना कर दिया गया। एक बार एक परिचित ने खुश होकर कहा था कि उसके मकान मालिक ने केस कर दिया है। न केस का फैसला जल्दी होगा, न कोई मकान खाली करा सकेगा। वैसे भी अदालतें अरसे से किरायेदार को बेचारा मान, किरायेदार के पक्ष में फैसला देती रही हैं। 

वह मकान मालिक, जिसने हो सकता है, अपनी पूरी जमा पूंजी मकान बनाने में लगा दी हो, उसकी मुसीबत पर कोई ध्यान नहीं देता। हर मकान मालिक, चाहे उसका घर पचीस गज और एक कमरे का हो, उसे पूंजीपति और अमीर मान लिया जाता है। इसीलिए आपने देखा होगा कि बहुत-से लोग अपने मकान किराये पर देते ही नहीं हैं। अमेरिकी तो और आगे निकल गए। वहां मकान मालिक ने किसी को अपना मकान किराये पर नहीं दिया था, फिर भी कब्जा हो गया। 

अपने देश में भी कब्जा सच्चा माना जाता है, बाकी सब झूठ होता है। अमेरिका में रहने वाले कई परिजन अभी तक बहुत गर्व से कहते रहे हैं कि वहां के कानून ऐसे हैं कि कोई किसी की जमीन-जायदाद पर कब्जा नहीं कर सकता। मगर लगता है कि अब इस तरह के गर्व करने के दिन लद चुके हैं। भारत से अच्छी बात सीखते-सीखते, लोग बुरी बातें भी सीखने लगें, तो इसमें उनका भला क्या कुसूर।
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