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ईरान का कोई दोस्त नहीं है: रूस और चीन सिर्फ शिष्टाचार की बात करेंगे, वेनेजुएला को भी भुला दिया गया है

दीपक वोहर, पूर्व राजनयिक, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 12 Jan 2026 06:12 AM IST
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सार
ईरान सरकार का कोई दोस्त नहीं है। रूस और चीन शिष्टाचार की बातें करेंगे और फिर अपने एजेंडे पर काम करेंगे। जैसे-जैसे ईरान में अराजकता फैलेगी, दुनिया उबासी लेगी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ट्रंप के अगले कारनामे पर ध्यान केंद्रित करेगा।
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Iran has no friends Russia and China only pay courtesy calls Venezuela has also been forgotten
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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कर्म का फल जरूर मिलता है। 1950 के दशक के प्रारंभ में ईरान के लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए प्रधानमंत्री को ब्रिटिश एवं अमेरिकियों ने सत्ता से बेदखल कर दिया था, क्योंकि उसने मुल्क के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। उसके बदले एक युवा, घमंडी, लेकिन कट्टर वफादार को लाया गया। ईरान ने इस्राइल को मान्यता दी और बदले में सैन्य सहयोग हासिल किया। तेहरान और तेल अवीव के बीच सीधी उड़ानों से अमीर ईरानी इस्राइल के नाइटक्लब और बार का मजा लेने लगे।


नतीजतन फिर से कर्म का फल मिला और शाह का बदनाम भ्रष्ट शासन, जिसे गैर-इस्लामिक माना जाता था, को इस्लामी क्रांति द्वारा उखाड़ फेंका गया, जिसने ईरान में फैले भ्रष्टाचार और असमानता का फायदा उठाया।

लोगों की शाह विरोधी ऊर्जा को इस्लामियों द्वारा चालाकी से अमेरिका और इस्राइल विरोधी गुस्से में बदल दिया गया। अमेरिका ने इराक के दस साल लंबे युद्ध को प्रायोजित किया, ताकि उन इस्लामवादियों को सत्ता से हटाया जा सके, जिन्होंने इस्राइल को खत्म करने की कसम खाई थी।

इराक, लीबिया और सीरिया में जो हुआ, उसे देखकर तेहरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि तेहरान को रोकने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन कुछ भी काम न आया। इसलिए पश्चिम एवं संयुक्त राष्ट्र ने बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाया, जिससे ईरान को नुकसान तो हुआ, लेकिन वह अपने मकसद से पीछे नहीं हटा। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सितंबर, 2025 में समझौता किया था, जो आईएईए को ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच की अनुमति देता था। लेकिन यूरोपीय शक्तियों द्वारा प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद ईरान ने उस समझौते को अगले ही महीने रद्द कर दिया।

ईरान के शासकों ने बार-बार होने वाले अशांति के दौर देखे हैं, जिनमें 1999 में छात्रों का विरोध प्रदर्शन, 2009 में विवादित चुनाव, 2019 में आर्थिक परेशानियां, और 2022 में ड्रेस कोड उल्लंघन के आरोप में हिरासत में एक महिला की मौत शामिल है। ईरान ने रूस और चीन के अलावा, गैर-पश्चिमी ताकतों से भी मदद मांगी है, और कट्टर शिया विरोधी पाकिस्तान की चापलूसी की है तथा अपने कट्टर दुश्मन सऊदी अरब और तुर्किये से भी दोस्ती की है।

युवा ईरानी और दुकानदार वहां की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के चलते सड़कों पर उतर रहे हैं। ध्वस्त होती अर्थव्यवस्था ने 1980-90 के दशक के धार्मिक-क्रांतिकारी जोश को खत्म कर दिया है। पिछले तीन वर्षों में महंगाई 50 फीसदी से ज्यादा हो गई और खाने की कीमतें 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ गईं। मार्च 2025 में, ईरान की संसद ने बढ़ती महंगाई और गिरती मुद्रा को लेकर देश के वित्तमंत्री को महाभियोग चलाकर पद से हटा दिया। दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने इस्तीफा दे दिया। इससे सरकार घबरा गई। ईरान के पूर्व शाह के बेटे, जो न्यूयॉर्क में आत्म निर्वासन में रह रहे हैं, ने प्रदर्शनकारियों से खामनेई शासन को हटाने की अपील की है। हाल के दिनों में, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो खूब वायरल हुए हैं, जिनमें युवा महिलाएं न सिर्फ अयातुल्लाह की तस्वीर जला रही हैं, बल्कि उन लपटों से अपनी सिगरेट भी जला रही हैं। वहां इंटरनेट एवं फोन को अवरुद्ध कर दिया गया है।

सरकारी टीवी पर एक रिकॉर्डेड संदेश में, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई ने एकता की अपील की, और लाखों प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी भाड़े का एजेंट बताया और डोनाल्ड ट्रंप पर ईरानियों के खून से हाथ रंगने का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के साथ मिलकर जून, 2025 में ईरान पर बमबारी की थी, जिसमें उसके परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। ट्रंप ने फिर से तेहरान को गोलीबारी नहीं करने की चेतावनी दी है। वह अपनी धमकी को 2005 के संयुक्त राष्ट के 'रक्षा करने की जिम्मेदारी' वाले प्रस्ताव पर आधारित मानते हैं, जो किसी भी देश को दूसरे देश के उन नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार देता है, जिन पर उनकी अपनी सरकार अत्याचार कर रही है।

सरकार विरोधी प्रदर्शन पूरे मुल्क में फैल गया है। सरकार में साफ तौर पर भ्रम की स्थिति है। ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि सरकार ने स्थिति पर से नियंत्रण खो दिया है। दुकानें खाली हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि यह सरकार शीघ्र सत्ता छोड़े। सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देकर आग में घी डालने का काम किया। खामनेई ने पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड को ईरान की सेना और अंदरूनी राजनीति में सबसे ताकतवर बना दिया है।

इसकी अंतरराष्ट्रीय शाखा, कुद्स फोर्स ने प्रतिरोध की धुरी को एक साथ जोड़ा, जो यमन से लेबनान तक फैले ईरान समर्थक प्रॉक्सी का एक समूह है, जिसने वर्षों तक ईरान को पूरे क्षेत्र में काफी ताकत दी। खामनेई ने गार्ड को व्यवसाय का नेटवर्क बनाने की भी खुली छूट दी, ताकि वे ईरान की अर्थव्यवस्था पर हावी हो सकें, और वे उनके वफादार अंगरक्षक बन गए। अब तक विरोध प्रदर्शनों में दर्जनों लोग मारे गए हैं। वहां के केंद्रीय बैंक ने डॉलर सब्सिडी में कटौती की है, जिसका मकसद जरूरी आयात को सस्ता बनाना और महंगाई को नियंत्रण में रखना था। सरकार ने ईरानियों की मुश्किलों को कम करने के लिए प्रति व्यक्ति कुछ डॉलर देने की पेशकश की है। हालांकि, कीमतें बढ़ेंगी और परिवारों को गुजारा करने में मुश्किल होगी।

ईरान के सेना प्रमुख ने सरकार विरोधी बातों पर पहले से ही सैन्य कार्रवाई की धमकी दी, खासकर ट्रंप की इस चेतावनी के बाद कि अगर तेहरान 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारता है, तो (अमेरिका) उनकी मदद के लिए आएगा।' यही नहीं, ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने भी दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की धमकी दी, जिन्हें ईरान के दुश्मन, इस्राइल और अमेरिका बढ़ावा दे रहे हैं, और कहा कि उन पर कोई रहम नहीं किया जाएगा। ईरान सरकार का कोई दोस्त नहीं है। रूस और चीन शिष्टाचार की बातें करेंगे और फिर अपने एजेंडे पर काम करेंगे। जैसे-जैसे ईरान में अराजकता फैलेगी, दुनिया उबासी लेगी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ट्रंप के अगले सनक भरे कारनामे पर ध्यान केंद्रित करेगा। वेनेजुएला को तो पहले ही भुला दिया गया है। लगता है, 2026 ताकतवर एवं खतरनाक लोगों का साल है।       
 
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