सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Issue: Big question on the condition of children, where should they go?

मुद्दा: बच्चों के हालात पर बड़ा सवाल, 'वे' जाएं तो जाएं कहां

क्षमा शर्मा Published by: Pavan Updated Thu, 30 Apr 2026 06:55 AM IST
विज्ञापन
सार
मध्य प्रदेश में श्योपुर के हाईवे पर छोड़ी गई दो साल की बच्ची की घटना इस बात का प्रमाण है कि समाज में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान, दोनों गंभीर खतरे में हैं। आपको याद ही होगा कि महाभारत की कथा में कर्ण ने कुंती को इस बात के लिए कभी माफ नहीं किया था।
loader
Issue: Big question on the condition of children, where should they go?
बच्चे जाएं, तो जाएं कहां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल ही में, एक व्यापारी युगल ने दो साल की एक बच्ची को श्योपुर, मध्य प्रदेश के हाईवे पर छोड़ दिया। यह परिवार गुना में रहता है। बच्ची को अकेली देख, किसी भले इन्सान ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से उस कार को खोज निकाला, जिसने बच्ची को छोड़ा था। बच्ची को एक स्वयंसेवी संस्था के हवाले करके पुलिस ने इसकी जांच शुरू की, तो पता चला कि बच्ची को गोद लिया गया था। उसके असली माता-पिता मानते थे कि वह उनके लिए अशुभ है। जांच आगे बढ़ी, तो चौंकाने वाली बात पता चली कि दरअसल बच्ची को एक ब्यूटी पार्लर से एक लाख रुपये में खरीदा गया था, यानी बच्चों की खरीद-फरोख्त का कारोबार चल रहा था। इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हुईं।


जब से यह समाचार पढ़ा, तब से न जाने कितनी डरावनी बातें मन में उथल-पुथल मचाने लगीं। बच्ची के माता-पिता कौन थे, वह कहां से आई, क्या उसे चुराया गया, जैसा कि अक्सर होता है। अपने देश में बच्चों की चोरी आम बात है। अस्पतालों तक से नवजात गायब हो जाते हैं। बच्ची हाईवे पर अकेली थी और यदि वह सड़क के बीच चली गई होती, तो गंभीर दुर्घटना का शिकार हो जाती, अथवा हाईवे से नीचे गिर सकती थी, किसी जंगली जानवर का शिकार बन जाती या उसका अपहरण हो जाता। कोई उसके साथ दुष्कर्म कर सकता था। उसे खरीदने वाले माता-पिता से कोई पूछे कि अगर ऐसा ही करना था, तो उसे अपनाया ही क्यों?


वैसे भी वे बच्चे, जिन्होंने अभी-अभी दुनिया में आंखें खोली हैं, उन्हें नहीं पता कि भविष्य क्या है। कोई उन्हें कूड़े के ढेर में फेंक देता है। कोई खेत में छोड़ जाता है। किसी को अस्पताल में ही छोड़कर भाग लिया जाता है। अपने जन्म के लिए ये मासूम बच्चे जिम्मेदार नहीं होते, लेकिन हर तरह की आफत इन्हीं के सिर आती है। ऐसे बच्चों में अधिसंख्य बच्चे वे होते हैं, जो अविवाहित मां की कोख से जन्म लेते हैं। समाज की इज्जत किसी की जान से भी ज्यादा है। विवाह के मंत्र नहीं पढ़े गए, इसलिए बच्चों को इस तरह जन्मते ही फेंकना कहां का न्याय है?

आपको याद ही होगा कि महाभारत की कथा में कर्ण ने कुंती को इस बात के लिए कभी माफ नहीं किया था। हालांकि, अकेली मां ही तो इसके लिए जिम्मेदार नहीं होती। एक तरफ हम बड़े अहंकार से क्षमा, दया, ममता, करुणा की बातें करते हैं, लेकिन इन बच्चों के मामले में ये सारे मूल्य कहां लोप हो जाते हैं?

ये बच्चे बड़े भी हो जाएं, तो भी इनमें से अनेक अपने जैविक माता-पिता की तलाश करते हैं। कई बच्चे, जो विदेशियों द्वारा गोद लिए गए, वे भारत में आकर ऐसा कर चुके हैं। वैसे भी अनाथालयों की हालत किसी से छिपी नहीं है। इसके अलावा, दुनिया के सारे रिश्ते ताऊ-ताई, चाचा-चाची, बुआ, दादा-दादी, नाना-नानी, मामा-मामी, उनके बाल-बच्चों से संबंध माता-पिता के कारण ही निर्धारित होते हैं। जरा सोचें, जिन बच्चों को जन्मते ही त्याग दिया गया, उनका कौन है?

एक बार किसी नवयुवक ने एक दिल दहलाने वाला अनुभव साझा किया था। उसने बताया कि वह एक अनाथालय में गया। वहां उसने एक बेहद कमजोर और बीमार बच्चे को देखा। जब अनाथालय के संचालक से इस बारे में पूछा, तो उसने हंसते हुए कहा कि उसके बारे में क्या पूछते हो! वह तो बस दो-चार दिन में मर जाएगा। उसकी बात सुनकर वह युवक विचलित हो उठा। वह हर रोज उस बच्चे को देखने जाने लगा। उसने बच्चे के इलाज की पेशकश भी की, मगर संचालक इसके लिए राजी नहीं हुआ। जब संचालक ने युवक को रोज आते देखा, तो उसने बच्चे को कहीं छिपा दिया, लेकिन युवक फिर भी नहीं माना। उसने पुलिस में शिकायत की। बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं उसने अर्जी दी कि वह बच्चे को गोद लेना चाहता है। तमाम भागदौड़ के बाद बच्चा उसे मिल सका। उचित देखभाल और लाड़-दुलार के कारण बच्चा ठीक होने लगा। वह ठीक से खाने-पीने भी लगा। उस युवक का कहना था कि उसके जीवन का मूल उद्देश्य बच्चे को अच्छी जिंदगी देना है। इसलिए वह उसकी जिम्मेदारी खुद उठाएगा। कभी विवाह नहीं करेगा। लेकिन समाज में ऐसे कितने लोग होंगे?

जिस युगल ने बच्ची को इस तरह हाईवे पर अकेला छोड़ा, क्या उन्हें जरा-सी भी दया नहीं आई? वे बच्चे, जिन्हें चुराया जाता है, उनमें से ऐसे कितने होंगे, जो अपने माता-पिता के पास वापस पहुंच सकते होंगे? एक तरफ बच्चों को फेंका जाता है, तो दूसरी तरफ उन्हें चुराया जाता है। आखिर वे जाएं, तो जाएं कहां। - edit@amarujala.com
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed