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क्षमता पर भरोसा: सुंदर पिचाई की सकारात्मक टिप्पणी भावनाओं का सबूत, निवेश की खातिर उत्साहित भी
Fri, 20 Feb 2026 04:07 PM IST
लव गौर
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Fri, 20 Feb 2026 04:07 PM IST
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गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई (फाइल फोटो)
- फोटो :
एएनआई
विस्तार
दिग्गज डिजिटल कंपनी गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन में अगर एआई के क्षेत्र में भारत की मौजूदा स्थिति को अद्वितीय बताया, तो उसकी मुख्य वजह है-उपयोगकर्ताओं की बड़ी आबादी, नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभाओं का विशाल पुल और नियम आधारित वैश्विक एआई शासन में भारत का दमदार हस्तक्षेप। बृहस्पतिवार को इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से डरता नहीं है, बल्कि उसने इसमें अपना भविष्य देखा है।एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार और सहयोगात्मक उपयोग के लिए वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस सम्मेलन में पिचाई ने विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर की लागत से एआई हब बनाने की गूगल की प्रतिबद्धता को दोहराया, जो देश में गीगावाट क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा और अंतरराष्ट्रीय सब-सी केबल गेटवे के विकास में महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका कनेक्ट के तहत घोषित सब-सी केबल गेटवे के विकास से दो महाद्वीपों के बीच संचार संपर्क को बढ़ाने में मदद मिलेगी और इंटरनेट ट्रैफिक सुचारु होगा।
इसके अलावा, गूगल द्वारा छात्रों एवं युवा पेशेवरों के लिए एआई से संबंधित पेशेवर सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू करने से कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। पिचाई का यह कहना समझा जा सकता है कि भारत में एआई सदियों पुरानी कमियों को दूर करने और नए अवसर पैदा करने का मौका देता है, क्योंकि यहां उद्यमिता का परिवेश तेजी से विकसित हो रहा है और कई स्वदेशी कंपनियां तेजी से विकास कर रही हैं।
भारतीय उद्यमिता परिवेश के बारे में सुंदर पिचाई की सकारात्मक टिप्पणी दिग्गज तकनीकी कंपनियों की भावनाओं को दर्शाती है, जो भारत की क्षमता पर भरोसा करती हैं और यहां निवेश की खातिर उत्साहित भी हैं। वास्तव में, कंपनियों के इस उत्साह के पीछे सरकार की नीतिगत पहल का भी हाथ है, जिसके चलते न केवल भारत में व्यापार सुगमता बढ़ी है, बल्कि नियामक स्थिरता ने भी निवेशकों को आश्वस्त किया है। पर जैसा कि कई तकनीकी दिग्गजों ने रेखांकित किया, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में प्रमुख दावेदारी करने के लिए भारत को अपने मौजूदा 1.2 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ाना होगा। अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाने से आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करने के अवसर तो मिलेंगे ही, रोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा होंगी।