एक रात पहले पुणे में धमाकेदार डेब्यू करने वाले क्रुणाल पांड्या का आज जन्मदिन है। 24 मार्च 1991 को जन्में क्रुणाल पांड्या आज अपना 30वां जन्मदिन मना रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू वन-डे में इतिहास रचने वाले क्रुणाल मैच से पहले और बाद में दोनों वक्त भावुक नजर आए। वह अपने पिता को याद कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने हाल ही में खोया है। जीत के बाद उन्होंने अपनी इस पारी को पिता को समर्पित किया। ट्वीट में लिखा भी कि, 'मैच के दौरान आप मेरे साथ ही थे।'
पढ़ाई में बेहद कमजोर थे क्रुणाल पांड्या: बच्चों को क्रिकेटर बनाने के लिए पिता ने छोड़ दिया था शहर
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भारतीय क्रिकेट में नौ साल बाद ऐसा मौका आया जब दो भाइयों की जोड़ी ने एक साथ टीम में धमाल मचाया हो। दोनों भाई आज भारतीय क्रिकेट में जाना-पहचान नाम हैं और इसके पीछे उनके पिता का अहम योगदान रहा। यही कारण रहा कि दोनों अपनी कामयाबी के पीछे पिता के संघर्षों को हमेशा श्रेय देते रहे और उनकी अहमियत को जानते रहे। पिता के त्याग को देखते हुए दोनों बेटों ने भी खूब मेहनत और संघर्ष किया।
इस साल 16 जनवरी को क्रुणाल और हार्दिक ने अपने पिता को खो दिया था। सुबह-सुबह दिल का दौरा पड़ने से हिमांशु पांड्या की मौत हुई थी। पिता के निधन की खबर सुनकर दोनों क्रिकेटरों के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पिता के संघर्षों का इनाम भी मिला जब दोनों ही भाइयों का आईपीएल में चयन हो गया। पांड्या भले ही आज अपने स्टाइल स्टेटमेंट, बिंदास और आलीशान जीवनशैली के लिए मशहूर हैं, लेकिन कभी इस खिलाड़ी ने जीवन में बेहद कठिन दौर भी देखे हैं।
गुजरात के इस ऑलराउंडर को आईपीएल से पहचान मिली और जैसे ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपक लिया। क्रुणाल टी-20 टीम में पहले ही डेब्यू कर चुके हैं अब उन्हें वन-डे में मौका मिला, जिसे उन्होंने जमकर भुनाया। स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ विस्पफोटक पारी खेलने में सक्षम क्रुणाल से पहले ही छोटे भाई हार्दिक टीम में स्थायी जगह बना चुके हैं और विश्व के सक्रिय सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स की लिस्ट में शामिल हैं।
क्रुणाल-हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या गुजरात के सूरत में फाइनेंस का व्यापार करते थे। उन्हें 1998 में इसे बंद करना पड़ा और पूरा परिवार फिर बड़ौदा चला गया। हिमांशु पांड्या क्रिकेट के बहुत बड़े दीवाने थे और वह अपने दोनों बेटों (को मैच दिखाने के लिए ले जाते थे। यहीं से हार्दिक और क्रुणाल को क्रिकेटर बनने की प्रेरणा मिली। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद भी हिमांशु ने अपने बेटों को बड़ौदा में किरण मोरे क्रिकेट अकादमी में भेजा, जहां से दोनों के क्रिकेटर बनने की यात्रा शुरू हुई।