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Abhishek Sharma: भारत के लिए अभिषेक शर्मा का फॉर्म बनी चिंता का विषय, क्या टीम प्रबंधन फाइनल में देगा आराम?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sovit Chaturvedi
Updated Fri, 06 Mar 2026 04:08 PM IST
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सार
भारत के विस्फोटक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का फॉर्म टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अभिषेक अब तक वैसा प्रदर्शन नहीं कर सके जैसा उनसे उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में अब यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या फाइनल में उन्हें बाहर बैठाना चाहिए?
अभिषेक शर्मा
- फोटो : PTI
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विस्तार
टी20 विश्व कप से पहले क्या कोई ऐसा सोच सकता था कि टी20 के नंबर एक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को प्लेइंग-11 से बाहर करने के बारे में चर्चा चल सकती है? जवाब है नहीं, क्योंकि अभिषेक इतनी शानदार फॉर्म थे कि प्रत्येक टीम उनका तोड़ खोजने में जुटी हुई थी। लेकिन टूर्नामेंट में अभिषेक का बल्ला खामोश रहा और जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच को छोड़ दिया जाए तो वह किसी मैच में बड़ी पारी नहीं खेल सके।
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ऑफ स्पिनर के खिलाफ कर रहे हैं संघर्ष
अभिषेक टूर्नामेंट में शुरुआत से ही संघर्ष करते नजर आए और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उनका बल्ला खामोश ही रहा। दिलचस्प बात यह है कि अभिषेक पांच पारियों में तीसरी बार ऑफ स्पिनर की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे हैं। यह साफ है कि वह विश्व कप में स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे हैं। मौजूदा टूर्नामेंट की पांच पारियों में अभिषेक ने ऑफ स्पिनरों के खिलाफ 27 गेंदों पर 29 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 107.40 का रहा और उन्होंने 9.66 के औसत से बल्लेबाजी की। वहीं, ऑफ स्पिनर के खिलाफ अभिषेक तीन बार अपना विकेट गंवा चुके हैं।
अभिषेक टूर्नामेंट में शुरुआत से ही संघर्ष करते नजर आए और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उनका बल्ला खामोश ही रहा। दिलचस्प बात यह है कि अभिषेक पांच पारियों में तीसरी बार ऑफ स्पिनर की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे हैं। यह साफ है कि वह विश्व कप में स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे हैं। मौजूदा टूर्नामेंट की पांच पारियों में अभिषेक ने ऑफ स्पिनरों के खिलाफ 27 गेंदों पर 29 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 107.40 का रहा और उन्होंने 9.66 के औसत से बल्लेबाजी की। वहीं, ऑफ स्पिनर के खिलाफ अभिषेक तीन बार अपना विकेट गंवा चुके हैं।
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मौजूदा टूर्नामेंट में जड़ा सिर्फ एक अर्धशतक
मौजूदा टी20 विश्व कप में अभिषेक के प्रदर्शन की बात करें तो अभिषेक पहले तीन मैच में खाता भी नहीं खोल सके थे। तबीयत खराब होने के कारण वह नामीबिया के खिलाफ मैच नहीं खेल सके थे, जबकि अमेरिका, पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ वह शून्य पर आउट हुए थे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभिषेक ने 15 रन बनाए थे। वहीं, जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर आठ मुकाबले में 55 रन की पारी खेली थी। ऐसा लग रहा था कि अब अभिषेक अपनी खोई लय वापस हासिल कर लेंगे, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 10 रन बनाए और अब नौ रन पर ही पवेलियन लौट गए।
मौजूदा टी20 विश्व कप में अभिषेक के प्रदर्शन की बात करें तो अभिषेक पहले तीन मैच में खाता भी नहीं खोल सके थे। तबीयत खराब होने के कारण वह नामीबिया के खिलाफ मैच नहीं खेल सके थे, जबकि अमेरिका, पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ वह शून्य पर आउट हुए थे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभिषेक ने 15 रन बनाए थे। वहीं, जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर आठ मुकाबले में 55 रन की पारी खेली थी। ऐसा लग रहा था कि अब अभिषेक अपनी खोई लय वापस हासिल कर लेंगे, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 10 रन बनाए और अब नौ रन पर ही पवेलियन लौट गए।
दो ओपनरों की अलग कहानी
इस टूर्नामेंट में भारत के दो सलामी बल्लेबाजों की किस्मत एकदम से विपरीत रही। जब प्रतियोगिता शुरू हुई तो अभिषेक को शीर्ष क्रम में मजबूत आधार माना जा रहा था जबकि संजू सैमसन के स्थान को लेकर सवाल बने हुए थे और कहा जा रहा था कि यह प्रतियोगिता उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ के करो या मरो वाले मुकाबले ने परिस्थितियों में काफी बदलाव कर दिया है। सैमसन ने पिछले दो मैच में शानदार प्रदर्शन किया जिससे अब सभी का ध्यान अभिषेक की फॉर्म पर केंद्रित हो गया है।
इस टूर्नामेंट में भारत के दो सलामी बल्लेबाजों की किस्मत एकदम से विपरीत रही। जब प्रतियोगिता शुरू हुई तो अभिषेक को शीर्ष क्रम में मजबूत आधार माना जा रहा था जबकि संजू सैमसन के स्थान को लेकर सवाल बने हुए थे और कहा जा रहा था कि यह प्रतियोगिता उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ के करो या मरो वाले मुकाबले ने परिस्थितियों में काफी बदलाव कर दिया है। सैमसन ने पिछले दो मैच में शानदार प्रदर्शन किया जिससे अब सभी का ध्यान अभिषेक की फॉर्म पर केंद्रित हो गया है।
क्या बरकरार रहेगा अभिषेक पर भरोसा?
लगातार असफल रहने के बावजूद अब सवाल यह उठता है कि क्या टीम प्रबंधन का भरोसा अभिषेक पर अब भी बरकरार रहेगा? पूरी संभावना है कि अभिषेक टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को होने वाले फाइनल में प्लेइंग-11 में बने रहेंगे क्योंकि भारत जीत हासिल करने वाली अपनी टीम में बदलाव नहीं करना चाहता है। लेकिन चिंता की बात यह है कि विरोधी टीमों ने इस सलामी बल्लेबाज को रोकने का तरीका ढूंढ लिया है।
कप्तानों ने बार-बार उनके खिलाफ शुरुआती ओवरों में धीमी गति के गेंदबाजों का इस्तेमाल किया है, विशेषकर ऑफ स्पिनरों और बाएं हाथ के स्पिनरों का। इससे उन्हें पारी की शुरुआत में वह गति नहीं मिल पाती जिसके साथ वे खेलना पसंद करते हैं। इस कारण वह जल्द ही पवेलियन लौटते रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ पावरप्ले में उन्होंने ऑफ स्पिनर पर आक्रामक शॉट खेलने के प्रयास में गेंद को हवा में लहरा दिया। नीदरलैंड के खिलाफ ऑफ स्पिनर ने उन्हें कोण लेती गेंद पर आउट किया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी धीमी गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश में वह फिर से जल्दबाजी कर बैठे और मनचाहा शॉट नहीं लगा पाए। एक और तकनीकी पहलू उनके बल्ले के डाउनस्विंग की गति है। जब गेंद तेजी ये आती है तो तेज डाउनस्विंग के कारण उन्हें धीमी गेंदों से तालमेल बिठाने में मुश्किल हो सकती है।
लगातार असफल रहने के बावजूद अब सवाल यह उठता है कि क्या टीम प्रबंधन का भरोसा अभिषेक पर अब भी बरकरार रहेगा? पूरी संभावना है कि अभिषेक टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को होने वाले फाइनल में प्लेइंग-11 में बने रहेंगे क्योंकि भारत जीत हासिल करने वाली अपनी टीम में बदलाव नहीं करना चाहता है। लेकिन चिंता की बात यह है कि विरोधी टीमों ने इस सलामी बल्लेबाज को रोकने का तरीका ढूंढ लिया है।
कप्तानों ने बार-बार उनके खिलाफ शुरुआती ओवरों में धीमी गति के गेंदबाजों का इस्तेमाल किया है, विशेषकर ऑफ स्पिनरों और बाएं हाथ के स्पिनरों का। इससे उन्हें पारी की शुरुआत में वह गति नहीं मिल पाती जिसके साथ वे खेलना पसंद करते हैं। इस कारण वह जल्द ही पवेलियन लौटते रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ पावरप्ले में उन्होंने ऑफ स्पिनर पर आक्रामक शॉट खेलने के प्रयास में गेंद को हवा में लहरा दिया। नीदरलैंड के खिलाफ ऑफ स्पिनर ने उन्हें कोण लेती गेंद पर आउट किया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी धीमी गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश में वह फिर से जल्दबाजी कर बैठे और मनचाहा शॉट नहीं लगा पाए। एक और तकनीकी पहलू उनके बल्ले के डाउनस्विंग की गति है। जब गेंद तेजी ये आती है तो तेज डाउनस्विंग के कारण उन्हें धीमी गेंदों से तालमेल बिठाने में मुश्किल हो सकती है।
क्यों नहीं मिल रहा रिंकू को मौका
भारत के पास रिंकू सिंह को टीम में शामिल करने का विकल्प है, लेकिन इससे बल्लेबाजी संयोजन पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में रिंकू को सातवें या आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है और तब वह अच्छा प्रभाव छोड़ पाएंगे इसकी संभावना कम है। फिलहाल भारतीय टीम प्रबंधन उस भी संयोजन को बरकरार रखने के लिए तैयार दिख रहा है जिसने उसे फाइनल में पहुंचाया।
भारत के पास रिंकू सिंह को टीम में शामिल करने का विकल्प है, लेकिन इससे बल्लेबाजी संयोजन पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में रिंकू को सातवें या आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है और तब वह अच्छा प्रभाव छोड़ पाएंगे इसकी संभावना कम है। फिलहाल भारतीय टीम प्रबंधन उस भी संयोजन को बरकरार रखने के लिए तैयार दिख रहा है जिसने उसे फाइनल में पहुंचाया।