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Sourav Ganguly: पश्चिम बंगाल में SSC घोटाले के खिलाफ शिक्षकों के प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए गांगुली, बताई वजह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sat, 19 Apr 2025 05:05 PM IST
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सार
स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) भर्ती में कथित भ्रष्टाचार को लेकर पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसको लेकर अब एक नया अपडेट सामने आया है।
सौरव गांगुली
- फोटो : PTI
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विस्तार
डब्ल्यूबीएसएससी भर्ती घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अपनी नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों का एक समूह गुरुवार को सौरव गांगुली के घर गया और उन्हें पश्चिम बंगाल राज्य सचिवालय तक मार्च के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, एबीपी आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने उनका निमंत्रण ठुकरा दिया है। शिक्षक गांगुली के आवास पर उन्हें आमंत्रित करने गए थे, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, गांगुली ने उनसे कहा, 'कृपया मुझे राजनीति में शामिल न करें।'
सीएम ममता की बर्खास्त शिक्षकों से अपील
एसएससी भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा, 'हमें दिसंबर तक का समय मिला है। यह मामला एक साल के भीतर सुलझ जाएगा।' वहीं उन्होंने आगे शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि उनका शिक्षकों से अनुरोध है कि वे चिंता न करें, समस्या का समाधान हो जाएगा। बेदाग बर्खास्त शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीएम ममता बनर्जी ने खुशी भी जताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्त स्कूल शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई
बता दें कि, पश्चिम बंगाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन बर्खास्त स्कूल शिक्षकों की सेवाएं बढ़ा दी हैं, जिनकी नियुक्ति सीबीआई की तरफ से जांच की गई भर्ती प्रक्रिया में बेदाग पाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील पर गौर किया कि कई स्कूलों में शैक्षणिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है और नई भर्ती में समय लगेगा।
राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी राहत राज्य की तरफ से संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्त समूह 'सी' और समूह 'डी' कर्मचारियों तक नहीं फैली है। पीठ ने राज्य सरकार को 31 मई या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और इस साल 31 दिसंबर तक इसे पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और उसके पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग को 31 मई या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बारे में सूचित करने के लिए अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
इससे पहले 3 अप्रैल को, शीर्ष अदालत ने राज्य की तरफ से संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया और पूरी चयन प्रक्रिया को दूषित बताया था। कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि दागी उम्मीदवारों को उनके वेतन/प्राप्त भुगतान वापस करने चाहिए।
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सीएम ममता की बर्खास्त शिक्षकों से अपील
एसएससी भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा, 'हमें दिसंबर तक का समय मिला है। यह मामला एक साल के भीतर सुलझ जाएगा।' वहीं उन्होंने आगे शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि उनका शिक्षकों से अनुरोध है कि वे चिंता न करें, समस्या का समाधान हो जाएगा। बेदाग बर्खास्त शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीएम ममता बनर्जी ने खुशी भी जताई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्त स्कूल शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई
बता दें कि, पश्चिम बंगाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन बर्खास्त स्कूल शिक्षकों की सेवाएं बढ़ा दी हैं, जिनकी नियुक्ति सीबीआई की तरफ से जांच की गई भर्ती प्रक्रिया में बेदाग पाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील पर गौर किया कि कई स्कूलों में शैक्षणिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है और नई भर्ती में समय लगेगा।
राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी राहत राज्य की तरफ से संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्त समूह 'सी' और समूह 'डी' कर्मचारियों तक नहीं फैली है। पीठ ने राज्य सरकार को 31 मई या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और इस साल 31 दिसंबर तक इसे पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और उसके पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग को 31 मई या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बारे में सूचित करने के लिए अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
इससे पहले 3 अप्रैल को, शीर्ष अदालत ने राज्य की तरफ से संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया और पूरी चयन प्रक्रिया को दूषित बताया था। कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि दागी उम्मीदवारों को उनके वेतन/प्राप्त भुगतान वापस करने चाहिए।