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T20 WC: टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद जोनाथन ट्रॉट ने ली भावुक विदाई, जानें अफगानिस्तान के लिए क्या कहा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 20 Feb 2026 04:25 PM IST
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सार
टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद अफगानिस्तान के मुख्य कोच जोनाथन ट्रॉट ने चार साल के कार्यकाल को भावुक अंदाज में अलविदा कहा। ट्रॉट ने माना कि उन्हें यह जिम्मेदारी सौभाग्य से मिली थी, क्योंकि यह भूमिका पहले ग्राहम थोर्प को प्रस्तावित की गई थी। उनके नेतृत्व में अफगानिस्तान ने 2023 वनडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया और 2024 टी20 विश्व कप के नॉकआउट चरण तक पहुंचा। ट्रॉट ने खिलाड़ियों के व्यक्तिगत विकास को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वह टीम की प्रगति से संतुष्ट हैं।
जोनाथन ट्रॉट
- फोटो : ACC
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विस्तार
टी20 विश्व कप में सुपर आठ की दौड़ से बाहर होने के बाद अफगानिस्तान ने कनाडा को 82 रन से हराकर अपना अभियान सकारात्मक अंदाज में खत्म किया। लेकिन इस जीत के साथ ही टीम के मुख्य कोच जोनाथन ट्रॉट का चार साल लंबा कार्यकाल भी समाप्त हो गया। इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज ट्रॉट ने मैच के बाद भावुक होते हुए टीम को अलविदा कहा। उनकी आवाज में संतोष भी था और भावनाएं भी।
'शायद समय सही है, शायद नहीं'
ट्रॉट ने अपने भविष्य पर बात करते हुए कहा, 'शायद समय सही है, शायद नहीं। मुझे नहीं पता, लेकिन मैं भविष्य के लिए सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं इस मौके के लिए बहुत आभारी हूं।' उन्होंने खुलासा किया कि यह पद पहले उनके इंग्लैंड साथी ग्राहम थोर्प को प्रस्तावित किया गया था। उन्होंने कहा, 'ग्राहम थोर्प को कोच बनना था और दुर्भाग्य से वह यह भूमिका स्वीकार नहीं कर सके। फिर मुझे यह पद पेश किया गया और मैंने इसे पूरे जोश के साथ स्वीकार किया। मैं यहां वास्तव में सौभाग्य से आया।'
ट्रॉट के दौर में अफगानिस्तान का उभार
दक्षिण अफ्रीका में जन्मे 44 वर्षीय ट्रॉट के कार्यकाल में अफगानिस्तान ने सफेद गेंद के क्रिकेट में उल्लेखनीय प्रगति की। टीम 2023 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल के बेहद करीब पहुंची और 2024 टी20 विश्व कप के नॉकआउट चरण में जगह बनाई। ट्रॉट ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी खिलाड़ियों के व्यक्तिगत विकास को देखकर मिली। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि मैं खिलाड़ियों के मैदान के बाहर के विकास को भी देख सका। उनके जीवन में बदलाव आता है, सिर्फ खेल में नहीं, बल्कि वे अपने परिवार की किस्मत और दिशा भी बदल सकते हैं।'
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ‘किस्मत’ का खेल
ट्रॉट ने टूर्नामेंट के दौरान कुछ मौकों पर टीम के दुर्भाग्य का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, 'हम कभी-कभी दुर्भाग्यशाली रहे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हम जीत सकते थे।' उन्होंने दो सुपर ओवर तक चले उस मुकाबले का उल्लेख करते हुए कहा, 'अगर हम वह मैच सामान्य समय में जीत गए होते तो शायद दक्षिण अफ्रीका अगला मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ अलग तरीके से खेलती।'
संतोष और उम्मीद
ट्रॉट ने कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और समर्पण से निभाई। उन्होंने कहा, 'मैंने पूरी कोशिश की। मैं उम्मीद करता हूं कि खिलाड़ी देख सकें कि मुझे इस खेल से कितना प्यार है।' चार साल के इस कार्यकाल में ट्रॉट ने अफगानिस्तान को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी टीम में ढालने में अहम भूमिका निभाई। अब उनके जाने के बाद टीम एक नए अध्याय की ओर बढ़ेगी, लेकिन ट्रॉट के कार्यकाल की छाप लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
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'शायद समय सही है, शायद नहीं'
ट्रॉट ने अपने भविष्य पर बात करते हुए कहा, 'शायद समय सही है, शायद नहीं। मुझे नहीं पता, लेकिन मैं भविष्य के लिए सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं इस मौके के लिए बहुत आभारी हूं।' उन्होंने खुलासा किया कि यह पद पहले उनके इंग्लैंड साथी ग्राहम थोर्प को प्रस्तावित किया गया था। उन्होंने कहा, 'ग्राहम थोर्प को कोच बनना था और दुर्भाग्य से वह यह भूमिका स्वीकार नहीं कर सके। फिर मुझे यह पद पेश किया गया और मैंने इसे पूरे जोश के साथ स्वीकार किया। मैं यहां वास्तव में सौभाग्य से आया।'
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ट्रॉट के दौर में अफगानिस्तान का उभार
दक्षिण अफ्रीका में जन्मे 44 वर्षीय ट्रॉट के कार्यकाल में अफगानिस्तान ने सफेद गेंद के क्रिकेट में उल्लेखनीय प्रगति की। टीम 2023 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल के बेहद करीब पहुंची और 2024 टी20 विश्व कप के नॉकआउट चरण में जगह बनाई। ट्रॉट ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी खिलाड़ियों के व्यक्तिगत विकास को देखकर मिली। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि मैं खिलाड़ियों के मैदान के बाहर के विकास को भी देख सका। उनके जीवन में बदलाव आता है, सिर्फ खेल में नहीं, बल्कि वे अपने परिवार की किस्मत और दिशा भी बदल सकते हैं।'
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ‘किस्मत’ का खेल
ट्रॉट ने टूर्नामेंट के दौरान कुछ मौकों पर टीम के दुर्भाग्य का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, 'हम कभी-कभी दुर्भाग्यशाली रहे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हम जीत सकते थे।' उन्होंने दो सुपर ओवर तक चले उस मुकाबले का उल्लेख करते हुए कहा, 'अगर हम वह मैच सामान्य समय में जीत गए होते तो शायद दक्षिण अफ्रीका अगला मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ अलग तरीके से खेलती।'
संतोष और उम्मीद
ट्रॉट ने कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और समर्पण से निभाई। उन्होंने कहा, 'मैंने पूरी कोशिश की। मैं उम्मीद करता हूं कि खिलाड़ी देख सकें कि मुझे इस खेल से कितना प्यार है।' चार साल के इस कार्यकाल में ट्रॉट ने अफगानिस्तान को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी टीम में ढालने में अहम भूमिका निभाई। अब उनके जाने के बाद टीम एक नए अध्याय की ओर बढ़ेगी, लेकिन ट्रॉट के कार्यकाल की छाप लंबे समय तक याद रखी जाएगी।