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Ranji Trophy: 67 साल में पहली बार फाइनल में जम्मू-कश्मीर, पर आसान नहीं रहा है सफर; इन चुनौतियों का किया सामना

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 18 Feb 2026 03:36 PM IST
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सार

जम्मू कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था और तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था। मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए नबी ने कहा, 'पिछली बार हम क्वार्टर फाइनल में हार गए थे, लेकिन हमने कड़ी मेहनत की और हम फाइनल में पहुंचने के हकदार थे।'

Ranji Trophy: Jammu and Kashmir reach final for first time in 67 years, but journey was not easy; read history
जम्मू कश्मीर की टीम - फोटो : PTI
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विस्तार

जम्मू कश्मीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के कल्याणी में खेले गए रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल के चौथे दिन दो बार के पूर्व चैंपियन बंगाल को छह विकेट से करारी शिकस्त दी। साथ ही टीम ने 67 साल के अपने रणजी ट्रॉफी इतिहास में पहली बार फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। बंगाल ने जम्मू कश्मीर के सामने 126 रन का लक्ष्य रखा था। जम्मू कश्मीर में 34.4 ओवर में चार विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर दिया। उसकी तरफ से वंशज शर्मा ने नाबाद 43 और अब्दुल समद ने नाबाद 30 रन बनाए। इससे पहले तेज गेंदबाज आकिब नबी ने मैच में नौ विकेट (पहली पारी में पांच और दूसरी पारी में चार विकेट) लेकर बंगाल की जीत की संभावनाओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया था।
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मिथुन मनहास - फोटो : Instagam
बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मनहास की प्रतिक्रिया
बीसीसीआई के अध्यक्ष मिथुन मनहास जब 2021 में जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) के प्रबंधन से जुड़े तो उन्हें एक ऐसी संस्था में चीजों को ठीक करना पड़ा जो कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहा थी।मनहास ने कहा, 'जब मैंने प्रशासक का पद संभाला था, तब यह इतना आसान नहीं था। बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव जय शाह ने मुझे पूरी छूट दी थी और कहा था कि जम्मू कश्मीर की क्रिकेट को पटरी पर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह करो।' मनहास ने कहा, 'मैं टीवी पर मैच देख रहा था। मोहम्मद शमी और आकाश दीप जैसे खिलाड़ियों वाली बंगाल की टीम को हराना बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेरे अंदर का क्रिकेटर भावुक है क्योंकि मैंने अपना प्रथम श्रेणी का करियर वहीं समाप्त किया और राज्य इकाई के साथ भी काम किया।'
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उमर अब्दुल्ला - फोटो : ANI
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस केंद्र शासित प्रदेश की क्रिकेट टीम के पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचने को उल्लेखनीय उपलब्धि करार देते हुए बुधवार को खिलाड़ियों को बधाई दी। उमर ने जम्मू कश्मीर की जनता की तरफ से भी टीम को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र के क्रिकेटर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'मैं अपनी तरफ से और जम्मू कश्मीर के लोगों की तरफ से हमारी क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब हम जम्मू कश्मीर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखेंगे।' उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में टीम की प्रगति निरंतर कड़ी मेहनत, अनुशासन, कोचिंग और सहायक स्टाफ के मार्गदर्शन को दर्शाती है।

एलजी मनोज सिन्हा और इरफान पठान ने दी बधाई
  • जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को इस उपलब्धि पर एलजी मनोज सिन्हा और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने बधाई दी है। मनोज सिन्हा के कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने उनके हवाले से लिखा, 'रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में शानदार जीत के लिए जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को बधाई। आपने जम्मू-कश्मीर के खेल इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय लिखा है। पूरे यूटी को आपके शानदार प्रदर्शन पर गर्व है। आप जीत की यह लय जारी रखें और जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन करें।'
  • उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के कार्यालय की आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा गया, 'पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने के लिए जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को बहुत-बहुत बधाई। आपके धैर्य, संकल्प और लड़ने की भावना ने पूरे क्षेत्र को गर्व महसूस कराया है। फाइनल के लिए शुभकामनाएं।'
  • पूर्व क्रिकेटर और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के कोच रह चुके इरफान पठान ने एक्स पर लिखा, 'इतिहास रच दिया। जम्मू-कश्मीर अपने पहले रणजी ट्रॉफी फाइनल में पहुंचा। इन लड़कों को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाते देखकर बहुत गर्व है। आप शानदार हैं, अब्दुल समद, क्या पारी है।'एक अन्य पोस्ट में इरफान ने जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज और क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच रहे आकिब नबी की भी तारीफ की है। 

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आकिब नबी डार - फोटो : file photo
आकिब नबी की बेहतरीन गेंदबाजी
आकिब नबी के शानदार प्रदर्शन और आईपीएल स्टार अब्दुल समद की बेखौफ बल्लेबाजी ने यह सुनिश्चित किया कि जिस टीम को कभी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाली टीम के रूप में जाना जाता था वह अब खिताब से सिर्फ एक कदम दूर है। समद ने 22 वर्षीय वंशज को विजयी रन बनाने का मौका दिया और इस युवा बल्लेबाज ने मुकेश कुमार की गेंद पर लॉन्ग ऑन के ऊपर से छक्का मारकर जम्मू कश्मीर की टीम में जबरदस्त जश्न का माहौल बना दिया। जम्मू कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था और तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था।

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जीत के बाद जम्मू कश्मीर की टीम - फोटो : IANS
जम्मू-कश्मीर के लिए कभी आसान नहीं रहा सफर
जम्मू कश्मीर ने इस सत्र से पहले 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से उसने केवल 45 जीते थे। उसे अपनी पहली जीत दर्ज करने में 44 साल लग गए, जो उसने 1982-83 में सेना के खिलाफ हासिल की थी। उसके लिए नॉकआउट में पहुंचना कभी आसान नहीं रहा लेकिन 2013-14 में उसे एक बड़ी सफलता मिली जब उसने नेट रन रेट के आधार पर गोवा को पीछे छोड़कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। उसने 2015-16 में परवेज रसूल की कप्तानी में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई को हराकर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन दशकों तक जम्मू कश्मीर के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी रही, लेकिन इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में उसने अपने विश्वास को परिणामों में तब्दील कर दिया।

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आकिब डार और मोहम्मद शमी - फोटो : PTI
नॉकआउट में जम्मू-कश्मीर ने मजबूत टीमों को हराया
मुंबई के खिलाफ शुरुआती हार के बाद जम्मू कश्मीर ने राजस्थान के खिलाफ पारी की जीत, दिल्ली और हैदराबाद के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत हासिल करके नॉकआउट में प्रवेश किया। उसने क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश को 56 रन से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस मैच में नबी ने 110 रन देकर 12 विकेट लिए थे। जम्मू कश्मीर की टीम में जहां कोई स्टार खिलाड़ी नहीं था वहीं बंगाल की टीम में मोहम्मद शमी, आकाश दीप, मुकेश कुमार और शाहबाज अहमद जैसे चार भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और भारत ए के स्टार बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन शामिल थे। इसके अलावा बंगाल को घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा भी मिलना था लेकिन जम्मू कश्मीर ने उसे इससे वंचित कर दिया।

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मोहम्मद शमी - फोटो : PTI
स्टार खिलाड़ियों से सजी बंगाल की टीम को हराया
जम्मू कश्मीर में मंगलवार को तीसरे के दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 43 रन बनाए थे। उसने चौथे दिन की शुरुआत में ही कल के अविजित बल्लेबाज शुभम पुंडीर (27) और कप्तान पारस डोगरा (09) के विकेट गंवा दिए, लेकिन वंशज और समद ने बंगाल के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और 55 रन की अटूट साझेदारी करके अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। बंगाल ने अपनी पहली पारी में 328 रन बनाए थे जिसके जवाब में जम्मू कश्मीर ने 302 रन बनाए। बंगाल हालांकि पहली पारी की मामूली बढ़त का फायदा नहीं उठा पाया और उसकी टीम दूसरी पारी में केवल 99 रन पर आउट हो गई। मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए नबी ने कहा, 'पिछली बार हम क्वार्टर फाइनल में हार गए थे, लेकिन हमने कड़ी मेहनत की और हम इसके हकदार थे।'
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