Explainer: तीन विश्वविजयी पारियों पर 12 गेंदें भारी, क्या संजू सैमसन के साथ अन्याय कर रहा बीसीसीआई?
टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के हीरो रहे संजू सैमसन को जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम से बाहर कर दिया गया। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ 12 गेंद खेलने और उसके बाद वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने के बाद चयनकर्ताओं का यह फैसला सवालों के घेरे में है। क्या तीन मैचों की नाकामी उनके विश्व कप प्रदर्शन पर भारी पड़ गई या फिर यह टीम के बाकी खिलाड़ियों के लिए भी गलत संदेश है?
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विस्तार
टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले संजू सैमसन एक बार फिर अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर में पहुंच गए हैं। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर उन्हें सिर्फ तीन पारियां खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने कुल 12 गेंदें खेलीं और कुल छह रन बनाए। इसके बाद चौथे मैच में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर लिया गया। अब जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित टीम से भी सैमसन का नाम गायब है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ 12 गेंदों के आधार पर एक विश्व कप विजेता खिलाड़ी को बाहर करना उचित है?
विश्व कप में बने थे भारत की सबसे बड़ी ताकत
टी20 विश्व कप के शुरुआती मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा रही थी। ऐसे समय में टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन पर भरोसा जताया और उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह दी। सैमसन ने इस भरोसे का शानदार जवाब दिया। उन्होंने लगातार तीन मैचों में नाबाद 97, 89 और 89 रन की मैच जिताऊ पारियां खेलीं। सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में भी उन्होंने व्यक्तिगत शतक के बजाय टीम की जरूरत को प्राथमिकता दी और तेजी से रन बनाने की कोशिश में अपना विकेट गंवाया। यही निडर बल्लेबाजी भारत की विश्व कप जीत की बड़ी वजह बनी।
12 गेंदें और खत्म हो गया भरोसा?
विश्व कप के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर सैमसन का बल्ला नहीं चला। तीन पारियों में उन्होंने 5 (4 गेंद), 0 (1 गेंद) और 1 (7 गेंद) रन बनाए। इन तीन पारियों में उन्होंने कुल 12 गेंदों का सामना किया। इसके बाद मैनचेस्टर टी20 में टीम मैनेजमेंट ने वैभव सूर्यवंशी को मौका देने का फैसला किया। मैच से पहले सैमसन और मुख्य कोच गौतम गंभीर के बीच बातचीत की तस्वीरें भी सामने आईं। हालांकि, तब किसी ने नहीं सोचा था कि अगला झटका और बड़ा होगा। जिम्बाब्वे दौरे के लिए जब टीम घोषित हुई तो सैमसन को पूरी तरह बाहर कर दिया गया।
बाकी खिलाड़ियों को मौका, संजू पर सख्ती क्यों?
सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इस दौरे में सिर्फ संजू ही नहीं, दूसरे बल्लेबाज भी लगातार बड़ी पारियां नहीं खेल पाए। बावजूद इसके कई खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखा गया, जबकि सैमसन को सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अगर चयन का पैमाना सिर्फ हालिया प्रदर्शन है तो फिर क्या यही कसौटी हर खिलाड़ी पर समान रूप से लागू की गई? यही वह सवाल है, जिसने चयनकर्ताओं के फैसले पर बहस छेड़ दी है।
क्या चयनकर्ताओं ने गलत संदेश दिया?
- मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति पिछले कुछ समय से बड़े और सख्त फैसलों के लिए जानी जाती रही है।
- मोहम्मद शमी, रोहित शर्मा, विराट कोहली और हाल ही में सूर्यकुमार यादव जैसे बड़े नाम भी उनके फैसलों से अछूते नहीं रहे, लेकिन संजू सैमसन का मामला थोड़ा अलग नजर आता है।
- टीम मैनेजमेंट लगातार बल्लेबाजों से निडर और आक्रामक क्रिकेट खेलने की बात करता रहा है। गौतम गंभीर के कार्यकाल में खिलाड़ियों को खुलकर खेलने और विकेट की चिंता न करने का संदेश दिया गया। ऐसा माहौल तभी बनता है, जब खिलाड़ियों को अपने स्थान की सुरक्षा का भरोसा हो।
- अगर सिर्फ तीन खराब पारियों के बाद खिलाड़ी टीम से बाहर होने लगें, तो बल्लेबाज स्वाभाविक रूप से जोखिम लेने से बचेंगे और व्यक्तिगत रन बचाने की मानसिकता में आ सकते हैं। जबकि गंभीर हमेशा टीम को प्राथमिकता देने की बात करते हैं। तो क्या ये फैसला सही है? सवाल यह भी उठता है।
क्या धोनी को अपना आदर्श बताना भी पड़ा भारी?
संजू सैमसन ने हाल ही में स्टार स्पोर्ट्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, 'बचपन में मेरे सबसे बड़े हीरो और प्रेरणा एमएस धोनी रहे हैं।' इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ फैंस ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या धोनी को अपना आदर्श बताना भी कहीं उनके खिलाफ गया? दरअसल, पूर्व कप्तान एमएस धोनी और मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर के रिश्तों को लेकर लंबे समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि, ऐसा कोई प्रमाण या आधिकारिक संकेत नहीं है कि सैमसन को टीम से बाहर किए जाने का इस बयान से कोई संबंध है। चयन का आधार प्रदर्शन और टीम संयोजन को ही माना जाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह सवाल जरूर चर्चा का विषय बना हुआ है।
दाएं हाथ के बल्लेबाज की कमी भी बढ़ेगी
भारतीय टी20 टीम में इस समय बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में संजू सैमसन जैसे अनुभवी दाएं हाथ के बल्लेबाज का बाहर होना टीम संतुलन पर भी असर डाल सकता है। सैमसन सिर्फ विकेटकीपर बल्लेबाज नहीं, बल्कि मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने वाले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने बड़े मंच पर खुद को साबित किया है। ऐसे खिलाड़ी को तीन पारियों के आधार पर बाहर करना टीम की भविष्य की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है।
सिर्फ चयन नहीं, सोच पर भी उठ रहे सवाल
- संजू सैमसन के करियर में उतार-चढ़ाव पहले भी आए हैं, लेकिन हर बार उन्होंने वापसी की है। इस बार भी चुनौती वही है, लेकिन फर्क इतना है कि इस बार उनके खिलाफ फैसला ऐसे समय आया है, जब वह विश्व कप जीताने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे।
- यही वजह है कि क्रिकेट विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मान रहा है कि यह फैसला सिर्फ एक खिलाड़ी को बाहर करने का नहीं, बल्कि पूरी टीम को यह संदेश देने का है कि प्रदर्शन में थोड़ी भी गिरावट आई तो जगह सुरक्षित नहीं रहेगी।
- विश्व कप में लगातार तीन मैच जिताऊ पारियां खेलने वाले बल्लेबाज के लिए क्या तीन खराब पारियां और महज 12 गेंदें इतनी भारी पड़नी चाहिए थीं? यही सवाल फिलहाल भारतीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।