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Abhishek Sharma: अभिषेक शर्मा की तस्वीर से छेड़छाड़? मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त; क्या है पूरा विवाद? जानें
Tue, 07 Jul 2026 02:02 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:02 PM IST
सार
भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स और मानहानि के बीच की बेहद पतली रेखा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल युग में दोनों अधिकारों के बीच कुछ मामलों में ओवरलैप देखने को मिलता है। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
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अभिषेक शर्मा
- फोटो : BCCI
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विस्तार
भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की तस्वीर और पहचान के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणियां की हैं। अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि डिजिटल दौर में पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) और मानहानि के मामलों के बीच एक बेहद पतली रेखा होती है और कई बार दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।
अभिषेक शर्मा ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनकी तस्वीर, नाम और पहचान का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। याचिका में यह भी दावा किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी तस्वीर में बदलाव कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई।
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अभिषेक शर्मा ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनकी तस्वीर, नाम और पहचान का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। याचिका में यह भी दावा किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी तस्वीर में बदलाव कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई।
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AI से तस्वीर बदलने का आरोप
सुनवाई के दौरान अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मूल तस्वीर में क्रिकेटर अपने मैनेजर के साथ थे, लेकिन AI तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी शक्ल और संदर्भ बदल दिया गया। उनका कहना था कि यह सिर्फ सामान्य फोटो प्रकाशित करने का मामला नहीं, बल्कि एआई के जरिए छेड़छाड़ कर क्रिकेटर की छवि का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, बदली गई तस्वीर लोगों के बीच गलत संदेश देती है और उनके व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक एवं डिजिटल इस्तेमाल करती है।
सुनवाई के दौरान अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मूल तस्वीर में क्रिकेटर अपने मैनेजर के साथ थे, लेकिन AI तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी शक्ल और संदर्भ बदल दिया गया। उनका कहना था कि यह सिर्फ सामान्य फोटो प्रकाशित करने का मामला नहीं, बल्कि एआई के जरिए छेड़छाड़ कर क्रिकेटर की छवि का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, बदली गई तस्वीर लोगों के बीच गलत संदेश देती है और उनके व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक एवं डिजिटल इस्तेमाल करती है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा, 'हम रोज ऐसे मामले देखते हैं, जहां मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच बेहद पतली रेखा होती है। यह क्षेत्र अभी विकसित हो रहा है। दोनों के बीच कुछ हद तक ओवरलैप भी है। कई बार मानहानि से जुड़ी सामग्री में पर्सनैलिटी राइट्स का पहलू भी शामिल हो सकता है।'
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा, 'हम रोज ऐसे मामले देखते हैं, जहां मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच बेहद पतली रेखा होती है। यह क्षेत्र अभी विकसित हो रहा है। दोनों के बीच कुछ हद तक ओवरलैप भी है। कई बार मानहानि से जुड़ी सामग्री में पर्सनैलिटी राइट्स का पहलू भी शामिल हो सकता है।'
मेटा ने क्या दलील दी?
- मेटा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि जिन आठ वेब लिंक पर फिलहाल सुनवाई हो रही है, उनमें से दो अब उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक अन्य लिंक महज "पापाराजी शैली की पोस्ट" प्रतीत होती है और पहली नजर में इसे पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
- मेटा की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यदि हर नकारात्मक ऑनलाइन सामग्री को पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन माना जाएगा, तो मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) कंपनियों के लिए इंटरनेट से ऐसे सभी कंटेंट हटाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन हो जाएगा।
AI और डीपफेक के बढ़ते मामलों पर चिंता
- अभिषेक शर्मा का मामला उन कई मामलों में शामिल है, जिनमें अभिनेता, खिलाड़ी और अन्य सार्वजनिक हस्तियां अपनी तस्वीर, नाम और पहचान के AI आधारित दुरुपयोग के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा रही हैं।
- AI और डीपफेक तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसी चुनौतियां पैदा की हैं, जिनमें किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को बदलकर उसे झूठे घटनाक्रम, उत्पाद या कथाओं से जोड़ दिया जाता है।
- ऐसे मामलों में अदालत लगातार यह तय करने की कोशिश कर रही है कि पर्सनैलिटी राइट्स, निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई के लिए निर्धारित की है।