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Explainer: पटरी से कैसे उतरी विश्व विजेता टीम इंडिया? आयरलैंड के बाद इंग्लैंड से भी सीरीज हार की 8 बड़ी वजहें
Fri, 10 Jul 2026 11:33 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ब्रिस्टल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ब्रिस्टल
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:33 AM IST
सार
टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम लगातार दूसरी टी20 सीरीज हार गई। पहले आयरलैंड ने और फिर इंग्लैंड ने भारत को मात दी। बल्लेबाजी, टीम चयन, रणनीति, परिस्थितियों के अनुसार नहीं ढल पाना और बार-बार प्लेइंग इलेवन में बदलाव इस खराब प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजहें रहीं।
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गंभीर और टीम इंडिया
- फोटो : IANS
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विस्तार
टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम से जिस दबदबे की उम्मीद की जा रही थी, वह नए चक्र की शुरुआत में ही बिखरती नजर आ रही है। पहले आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने वाली टीम इंडिया अब इंग्लैंड के हाथों भी सीरीज हार गई है। ब्रिस्टल में मिली हार के साथ भारत ने छह मैचों में पांचवीं हार झेली और पहली बार 2018-19 के बाद लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवा दी।
सबसे बड़ी बात यह रही कि इंग्लैंड ने भारत को लगभग हर विभाग में पीछे छोड़ दिया। ट्रेंट ब्रिज में भारत सिर्फ 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय में उसका दूसरा सबसे छोटा स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में 159 रन बनाने के बावजूद इंग्लैंड ने लक्ष्य सिर्फ 13.5 ओवर में हासिल कर लिया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विश्व चैंपियन बनने के कुछ महीनों बाद ही टीम इंडिया की हालत ऐसी क्यों हो गई? आइए जानते हैं...
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सबसे बड़ी बात यह रही कि इंग्लैंड ने भारत को लगभग हर विभाग में पीछे छोड़ दिया। ट्रेंट ब्रिज में भारत सिर्फ 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय में उसका दूसरा सबसे छोटा स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में 159 रन बनाने के बावजूद इंग्लैंड ने लक्ष्य सिर्फ 13.5 ओवर में हासिल कर लिया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विश्व चैंपियन बनने के कुछ महीनों बाद ही टीम इंडिया की हालत ऐसी क्यों हो गई? आइए जानते हैं...
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गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर
- फोटो : IANS
1. परिस्थितियों के अनुसार खुद को नहीं ढाल सकी टीम
- भारत की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही कि बल्लेबाज आयरलैंड और इंग्लैंड की तेज और सीम मूवमेंट वाली पिचों के अनुसार अपनी रणनीति नहीं बदल सके।
- आयरलैंड में दोनों मैच में आक्रामक बल्लेबाजी की कोशिश हुई, लेकिन गेंद हवा और पिच से मदद ले रही थी। ऐसे में विकेट बचाकर पारी बनाने की बजाय भारतीय बल्लेबाज लगातार बड़े शॉट खेलने के प्रयास में आउट होते रहे।
- खुद कप्तान श्रेयस अय्यर ने आयरलैंड दौरे पर माना था कि टीम ने वहां की परिस्थितियों का सही आकलन नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि मैदान के आकार और हालात को लेकर टीम पूरी तरह तैयार नहीं थी।
- वहीं, अब इंग्लैंड में भारतीय टीम ने ठीक इसका उल्टा किया। भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के आक्रामक गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ बेहद सतर्क शुरुआत की। हालांकि, यह बल्लेबाजी क्रम कभी भी इस तरह डिफेंसिव खेल खेलने के लिए तैयार नहीं किया गया था और न ही यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
2. टीम चयन और बल्लेबाजी क्रम ने बढ़ाई परेशानी
- सीरीज के दौरान लगातार टीम संयोजन बदलता रहा। तिलक वर्मा जैसे बल्लेबाज, जिन्होंने नंबर-तीन पर दो टी20 शतक लगाए हैं, उन्हें निचले क्रम में भेजा गया।
- शिवम दुबे की भूमिका भी पूरे दौरे में स्पष्ट नहीं दिखी। कभी उन्हें फिनिशर बनाया गया तो कभी शुरुआती दबाव झेलने की जिम्मेदारी दी गई।
- श्रेयस अय्यर को छोड़कर लगभग हर भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड की रणनीति में फंस गया और रन बनाने का रास्ता तलाशते हुए अपना विकेट गंवा बैठा।
- नंबर-6 पर बल्लेबाजी करने उतरे तिलक वर्मा उस चरण में बिल्कुल प्रभाव नहीं छोड़ सके, जहां उन्हें पहली ही गेंद से तेजी से रन बनाने थे। लेकिन यह उनकी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली नहीं है।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
3. गेंदबाजी संयोजन में नहीं दिखी स्थिरता
4. सपाट पिचों पर खेलने की आदत
- भारत ने लगभग हर मुकाबले में गेंदबाजी आक्रमण में बदलाव किया। इससे गेंदबाजों को अपनी भूमिका तय करने का मौका ही नहीं मिला।
- विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तान को एक स्थिर गेंदबाजी इकाई मिलनी चाहिए थी, ताकि उसी के आधार पर रणनीति बनाई जा सके।
- बार-बार बदलाव का असर गेंदबाजों की लय पर भी साफ दिखाई दिया और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया।
4. सपाट पिचों पर खेलने की आदत
- भारत जब सपाट पिचों पर खेलने लगेगा तो बल्लेबाज फिर रन बनाएंगे और आज उठ रहे कई सवाल धीरे-धीरे खत्म भी हो जाएंगे।
- ऐसा ही होता रहा है। भारत 2024 टी20 विश्वकप के बाद से लगातार अपने घर में ही टी20 खेल रहा था। आईपीएल में भी सपाट पिचें तैयार की गईं।
- ऐसे में जब उन्हें अचानक आयरलैंड और इंग्लैंड का दौरा करना पड़ा तो टीम की कमजोरियां सामने आ गईं।
- 2028 में भारत को दक्षिण अफ्रीका में टी20 विश्वकप खेलना है। ऐसे में सपाट पिचों पर तैयारी कितनी लाभदायक है, यह तो बीसीसीआई ही बता पाएगा।
- पिछले एक साल में इंग्लैंड ने दो बार गौतम गंभीर की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर किया है। पहली बार मोहम्मद सिराज के शानदार स्पेल ने उन कमियों को ढक दिया था, लेकिन इस बार ऐसा कोई चमत्कार नहीं हुआ।
- जब तक उन रणनीतिक कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक मुश्किल विदेशी परिस्थितियों में अलग नतीजे की उम्मीद करना आसान नहीं होगा।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
5. विश्व कप वाली लय पूरी तरह गायब
- 2022 टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली हार के बाद भारत ने अपनी टी20 टीम में बड़े बदलाव किए थे और उसी का नतीजा था कि टीम लगातार दो टी20 विश्व खिताब जीतने में सफल रही।
- हालांकि, तब रोहित को ही कप्तान रखते हुए बेस तैयार किया गया था। अन्य खिलाड़ियों को स्थापित किया गया था, ताकि उन्हें मैच प्रैक्टिस मिल सके। इसी का नतीजा हुआ कि सूर्यकुमार भी स्थापित हो सके।
- हालांकि, इस बार वही आत्मविश्वास और स्पष्ट रणनीति मैदान पर नजर नहीं आई। 2026 में जीत के बाद भारत ने सीधा कप्तान ही बदल दिया। अगला कप्तान कौन होगा इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
- आईपीएल के बाद अचानक तीन साल से टी20 अंतरराष्ट्रीय नहीं खेलने वाले खिलाड़ी को कप्तान बना दिया गया। जबकि लगातार दो बार से आईपीएल खिताब जिताने वाले कप्तान रजत पाटीदार को स्क्वॉड में भी जगह नहीं मिल रही है।
श्रेयस-तिलक
- फोटो : IANS
6. बाएं हाथ के बल्लेबाजों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा
- पूरे दौरे में टीम प्रबंधन की रणनीति पर सवाल उठा कि आखिर लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों को इतनी प्राथमिकता क्यों दी जा रही है।
- पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि टीम चयन में लेफ्ट राइट कॉम्बिनेशन को तवज्जो दिए जाने के बजाय बाएं हाथ के बल्लेबाजों पर ज्यादा ध्यान दिया गया।
- मौजूदा बल्लेबाजी लाइन अप में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार है। श्रेयस को छोड़ दिया जाए तो वैभव, अभिषेक, ईशान, दुबे, तिलक, सुंदर और अक्षर, सब के सब बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं।
- इससे बल्लेबाजी क्रम भी प्रभावित हुआ और कई खिलाड़ियों को उनकी स्वाभाविक पोजिशन पर खेलने का मौका नहीं मिला।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
7. वॉशिंगटन सुंदर को खिलाने के फैसले पर सवाल
- टीम चयन में वॉशिंगटन सुंदर को लगातार मौका देने पर भी सवाल उठे। विशेषज्ञों का मानना है कि इंग्लैंड की परिस्थितियों में दूसरे ऑलराउंडर की जगह एक अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज या तेज गेंदबाज टीम के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता था।
- ऐसे हालात में टीम संतुलन बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन टीम प्रबंधन ने अलग रास्ता चुना, जिसका फायदा भारत को नहीं मिला।
- सुंदर के टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर को देखें तो उन्होंने अब तक 62 मैचों में 15.5 की औसत और 126.82 के स्ट्राइक रेट से 279 रन बनाए हैं। इनमें एक अर्धशतक शामिल है। वहीं, उनके नाम 51 विकेट हैं।
- हालांकि, अगर बात सुंदर के इस साल के टी20 अंतरराष्ट्रीय फॉर्म की करें तो एक जनवरी 2026 से उन्होंने चार मैच में एक भी विकेट नहीं लिए हैं। ऐसे में उनके इस टीम में मौका मिलने पर सवाल उठना जायज है।
गंभीर
- फोटो : PTI
8. क्या भारत की हार के लिए गौतम गंभीर जिम्मेदार हैं?
- दोनों सीरीज में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी परिस्थितियों के अनुसार खुद को नहीं ढाल पाना रही। बल्लेबाज हर तरह की पिच पर एक ही अंदाज में बल्लेबाजी करते रहे।
- टीम में एक जैसी बल्लेबाजी शैली वाले खिलाड़ियों की भरमार थी और जब भी गेंद हवा में स्विंग हुई या सीम से मूवमेंट मिली, भारत के पास उसका कोई प्रभावी जवाब नहीं था।
- मुश्किल गेंदबाजी स्पेल को धैर्य के साथ खेलने और स्ट्राइक रोटेट करने के बजाय भारतीय बल्लेबाज लगातार बड़े शॉट खेलने की कोशिश करते रहे।
- यही रणनीति पहले आयरलैंड और फिर इंग्लैंड में पूरी तरह उलटी पड़ गई। यह सबसे बड़ी तैयारी की कमी थी।
- ब्रिस्टल में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने छोटी सीधी बाउंड्री का लगातार फायदा उठाया। उन्होंने उन गेंदों पर भी लैप शॉट खेले, जो उसके लिए उपयुक्त नहीं थीं। खासकर हैरी ब्रूक ने अच्छी गेंदों को भी इसी रणनीति से चौके में बदल दिया।
- भारतीय बल्लेबाज यह नहीं तय कर पा रहे कि किस दिशा में शॉट खेलना बेहतर रहेगा। इससे ज्यादा गंभीर स्थिति शायद ही हो सकती थी।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
इसके बाद सवाल उठता है कि मैच शुरू होने से पहले इन परिस्थितियों के अनुसार टीम को तैयार करना आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? वर्षों तक इंग्लैंड का दौरा कर चुके मुख्य कोच के तौर पर क्या खिलाड़ियों को इन हालात के लिए तैयार करना गंभीर जिम्मेदारी नहीं थी?
- 2014 में जब इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ज्योफ्री बॉयकॉट ने लाइव प्रसारण के दौरान गौतम गंभीर को 'बेकार' कहा था और टिप्पणी की थी कि वह इंग्लैंड की परिस्थितियों में बल्लेबाजी नहीं कर सकते। अब 12 साल बाद, जब इन्हीं मैदानों पर भारतीय टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा, तो यह सवाल सिर्फ गंभीर की बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी रणनीति और टीम प्रबंधन पर भी उठने लगा।
भारत बनाम इंग्लैंड
- फोटो : IANS
कुंबले और वरुण भी उठा चुके सवाल
पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले और वरुण एरॉन ने भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। नई शुरुआत के बाद लगातार दो सीरीज बीत जाने के बावजूद एक स्थापित टीम मैनेजमेंट से ऐसे सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए। ये सवाल इस बात पर भी खड़े होते हैं कि क्या टीम प्रबंधन के पास शुरुआत से ही कोई स्पष्ट और तय रणनीति थी? शायद नहीं...
श्रेयस अय्यर ने ब्रिस्टल में हार के बाद कहा, 'यह बदलाव के दौर से गुजर रही टीम है। हमें धैर्य रखने की जरूरत है। हमें भरोसा है कि आने वाले समय में सब कुछ सही दिशा में जाएगा।' हालांकि मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन के सामने कई कठिन सवाल खड़े हैं। लगातार दो टी20 सीरीज हारने के बाद अब भारत को सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि अपनी रणनीति, टीम चयन और परिस्थितियों के अनुसार खेलने के तरीके पर भी गंभीरता से काम करना होगा। यदि इन कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया तो विदेशी परिस्थितियों में टीम के लिए आगे की राह और मुश्किल हो सकती है।
पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले और वरुण एरॉन ने भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। नई शुरुआत के बाद लगातार दो सीरीज बीत जाने के बावजूद एक स्थापित टीम मैनेजमेंट से ऐसे सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए। ये सवाल इस बात पर भी खड़े होते हैं कि क्या टीम प्रबंधन के पास शुरुआत से ही कोई स्पष्ट और तय रणनीति थी? शायद नहीं...
श्रेयस अय्यर ने ब्रिस्टल में हार के बाद कहा, 'यह बदलाव के दौर से गुजर रही टीम है। हमें धैर्य रखने की जरूरत है। हमें भरोसा है कि आने वाले समय में सब कुछ सही दिशा में जाएगा।' हालांकि मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन के सामने कई कठिन सवाल खड़े हैं। लगातार दो टी20 सीरीज हारने के बाद अब भारत को सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि अपनी रणनीति, टीम चयन और परिस्थितियों के अनुसार खेलने के तरीके पर भी गंभीरता से काम करना होगा। यदि इन कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया तो विदेशी परिस्थितियों में टीम के लिए आगे की राह और मुश्किल हो सकती है।
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