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प्लेइंग-11 में अक्षर के बदले सुंदर क्यों: क्या कोच डेशकाटे अपने ही जवाब से फंसे? तरजीह देने की बताई यह वजह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:22 PM IST
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सार
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की हार के बाद अक्षर पटेल को प्लेइंग-11 से बाहर रखने का फैसला चर्चा में है। सहायक कोच रेयान टेन डेशकाटे ने बताया कि टीम ने पावरप्ले में बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ऑफ स्पिन विकल्प के कारण वॉशिंगटन सुंदर को तरजीह दी। हालांकि सुंदर का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा और भारत की सेमीफाइनल की राह कठिन हो गई है।
डेशकाटे ने बयान दिया है
- फोटो : ANI
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विस्तार
टी20 विश्वकप 2026 में रविवार को भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका ने सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को 76 रनों से हराया। इस हार से सेमीफाइनल में पहुंचने की राह कठिन हो चुकी है। हार के बाद टीम की प्लेइंग-11 को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा ऑलराउंडर अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने को लेकर है। अब भारत के सहायक कोच रेयान टेन डेशकाटे ने अक्षर पर सफाई दी है और जो उन्होंने कहा है, उससे वह खुद ही निशाने पर आ गए हैं।
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डेशकाटे ने क्या सफाई दी?
डेशकाटे ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने के पीछे टीम इंडिया की रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा, 'टीम कॉम्बिनेशन और साउथ अफ्रीका के टॉप ऑर्डर में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने की वजह से यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया। बाएं हाथ के बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक, रेयान रिकल्टन और डेविड मिलर टीम इंडिया के लिए बड़े खतरे थे। ऐसे में टीम ने ऑफ स्पिन विकल्प को प्राथमिकता दी, जो पावरप्ले में उपयोगी साबित हो सके। हमें लगा कि पावरप्ले में वॉशिंगटन अक्षर की तुलना में ज्यादा प्रभावी गेंदबाज हो सकते हैं। इस वजह से उन्हें मौका दिया गया।'
डेशकाटे ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने के पीछे टीम इंडिया की रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा, 'टीम कॉम्बिनेशन और साउथ अफ्रीका के टॉप ऑर्डर में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने की वजह से यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया। बाएं हाथ के बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक, रेयान रिकल्टन और डेविड मिलर टीम इंडिया के लिए बड़े खतरे थे। ऐसे में टीम ने ऑफ स्पिन विकल्प को प्राथमिकता दी, जो पावरप्ले में उपयोगी साबित हो सके। हमें लगा कि पावरप्ले में वॉशिंगटन अक्षर की तुलना में ज्यादा प्रभावी गेंदबाज हो सकते हैं। इस वजह से उन्हें मौका दिया गया।'
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बयान से क्यों सवालों में डेशकाटे?
- डेशकाटे के बयान इसलिए सवालों के घेरे में है क्योंकि अगर बाएं हाथ के बल्लेबाज के खिलाफ सुंदर कारगर हैं तो उन्हें पावरप्ले में एक भी ओवर गेंदबाजी क्यों नहीं मिली।
- वह सातवें ओवर में जाकर बॉलिंग अटैक पर लगाए गए। डिकॉक और रिकेल्टन को अर्शदीप और बुमराह ने पवेलियन भेज दिया था।
- फैंस पूछ रहे हैं कि क्या भारतीय टीम को अपने तेज गेंदबाजों पर भरोसा नहीं था? साथ ही दक्षिण अफ्रीका की तरह सुंदर पहले ही ओवर में गेंदबाजी के लिए क्यों नहीं आए, जिस तरह एडेन मार्करम ने भारत के दो सलामी बल्लेबाजों के खिलाफ पहले ही ओवर में गेंदबाजी की और ईशान किशन को आउट किया।
- मिलर पांचवें ओवर में ही मैदान पर आ चुके थे। इसके बावजूद सुंदर से पहले वरुण चक्रवर्ती को तरजीह दी गई, जो पांचवें ओवर में गेंदबाजी के लिए आए। पावरप्ले खत्म होने के बाद सुंदर को अटैक पर लगाया गया।
- ऐसे में डेशकाटे का बयान विरोधाभास पैदा करता है। सुंदर ने केवल दो ओवर गेंदबाजी की और बिना विकेट लिए 17 रन दिए। मिलर 16वें ओवर में आउट हुए, लेकिन सुंदर से केवल सातवें और 14वें ओवर में गेंदबाजी करवाई गई।
मध्य के ओवरों में अक्षर बेहतर
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पावरप्ले में बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ सुंदर का रिकॉर्ड अक्षर से बेहतर है। 57 पारियों में सुंदर ने 23 विकेट लिए हैं, जबकि अक्षर ने 62 पारियों में 14 विकेट लिए हैं, लेकिन रणनीति बनाते वक्त सिर्फ एक पहलू देखना भी भारत के लिए घातक साबित हुआ। मध्य के ओवरों में अक्षर ज्यादा प्रभावशाली है। अक्षर ने 79 पारियों में 63 विकेट झटके हैं, जबकि सुंदर के नाम 48 पारियों में 23 विकेट हैं। अगर अक्षर प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होते, तो वे दक्षिण अफ्रीका की रनों की रफ्तार थाम सकते थे। साथ ही बल्लेबाजी में भी अच्छा कर सकते थे।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पावरप्ले में बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ सुंदर का रिकॉर्ड अक्षर से बेहतर है। 57 पारियों में सुंदर ने 23 विकेट लिए हैं, जबकि अक्षर ने 62 पारियों में 14 विकेट लिए हैं, लेकिन रणनीति बनाते वक्त सिर्फ एक पहलू देखना भी भारत के लिए घातक साबित हुआ। मध्य के ओवरों में अक्षर ज्यादा प्रभावशाली है। अक्षर ने 79 पारियों में 63 विकेट झटके हैं, जबकि सुंदर के नाम 48 पारियों में 23 विकेट हैं। अगर अक्षर प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होते, तो वे दक्षिण अफ्रीका की रनों की रफ्तार थाम सकते थे। साथ ही बल्लेबाजी में भी अच्छा कर सकते थे।
रणनीतिक चूक टीम इंडिया को भारी पड़ी
ये रणनीतिक चूक टीम इंडिया को भारी पड़ी। सुंदर को खिलाने का टीम इंडिया मैनेजमेंट का फैसला असफल साबित हुआ। सुंदर ने दो ओवर की गेंदबाजी में बिना कोई विकेट लिए 17 रन दिए। वहीं बल्लेबाजी में 11 रन बना पाए। मैच की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 187 रन बनाए थे। भारतीय टीम 18.5 ओवर में 111 रन पर सिमट गई और 76 रन से मैच हार गई।
ये रणनीतिक चूक टीम इंडिया को भारी पड़ी। सुंदर को खिलाने का टीम इंडिया मैनेजमेंट का फैसला असफल साबित हुआ। सुंदर ने दो ओवर की गेंदबाजी में बिना कोई विकेट लिए 17 रन दिए। वहीं बल्लेबाजी में 11 रन बना पाए। मैच की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 187 रन बनाए थे। भारतीय टीम 18.5 ओवर में 111 रन पर सिमट गई और 76 रन से मैच हार गई।