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उत्तराखंड: केदारनाथ में कबाड़ हुई एम्स हेली एंबुलेंस, कभी बचाती थी लोगों की जान, आज खुद अपनी बदहाली पर रो रही

राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Sat, 11 Apr 2026 04:57 PM IST
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सार

एम्स हेली एंबुलेंस जो कभी लोगों की जान बचाती थी वह आज खुद अपनी बदहाली पर रो रही है।  एम्स हेली एंबुलेंस केदारनाथ में कबाड़ हो गई। 17 मई 2025 को लैंडिंग के दौरान हेली एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

AIIMS Air Ambulance Wrecked in Kedarnath Uttarakhand news in hindi
हेली एंबुलेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एम्स की हेलि एंबुलेंस खुद बदहाल व्यवस्था की प्रतीक बनकर रह गई है। कभी जिंदगी बचाने के लिए आसमान चीरने वाली यह सेवा पिछले एक साल से केदारनाथ में जंक खा रही है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां आंख मूंदे बैठी हैं।

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मई 2025 की दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हेलि एंबुलेंस अब भी हेलीपैड के पास पड़ी है और उसे हटाने तक की जहमत नहीं उठाई गई। यह हालात न सिर्फ सिस्टम की सुस्ती, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं व आपदा प्रबंधन के दावों की भी पोल खोलती है।

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बीते 17 मई को एम्स की हेलि एंबुलेंस केदारनाथ में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। एंबुलेंस यहां एक महिला मरीज को लेने गई थी। दुर्घटना हार्ड लैंडिंग के दौरान हुई थी। उसके बाद से एम्स की महत्वपूर्ण एयरो मेडिकल सेवा ठप हो गई।

अनुबंध के अनुसार हेलि एंबुलेंस के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर संबंधित कंपनी को तीन दिन के भीतर नई एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी लेकिन स्थिति यह है कि नई हेलि एंबुलेंस उपलब्ध कराना तो दूर संबंधित एजेंसी ने एक साल से क्षतिग्रस्त एंबुलेंस को दुर्घटना स्थल से हटाया तक नहीं है। यह एंबुलेंस आज भी क्षतिग्रस्त अवस्था में केदारनाथ में पड़ी हैं।

घोषणा के दो साल बाद हुई थी शुरू, सात माह भी नहीं चली

एम्स की हेलि एंबुलेंस सेवा घोषणा के दो साल बाद शुरू हो पाई थी। 20 सितंबर 2022 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हेलि एंबुलेंस सेवा शुरू किए जाने की घोषणा की थी। 29 अक्तूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सेवा का वर्चुअल उद्घाटन किया था। सात माह बाद हेलि एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जो फिर दोबारा शुुरू नहीं हो पाई।

पहाड़ी क्षेत्रों के लिए साबित हो रही थी काफी फायदेमंद

एम्स की हेलि एंबुलेंस सेवा सरकारी चिकित्सा संस्थान में पहली हेलि एंबुलेंस सेवा थी। उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित हो रही थी। इस सेवा का सर्वाधिक फायदा उत्तरकाशी और चमोली जिले के लोगों को मिला था। उत्तरकाशी की कई गर्भवतियों की जान बचाने में यह सेवा सफल रही थी।

चारधाम यात्रा में महत्वपूर्ण होने का किया गया था दावा

हेलि एंबुलेंस शुरू किए जाने के दौरान दावा किया गया था कि यह सेवा चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को तत्काल व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी लेकिन वास्तविकता इसके उलट रही। हेलि एंबुलेंस सेवा एक भी यात्रा सीजन ढंग से नहीं चल पाई।

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- गंभीर रोगियों व घायलों को हेलि के माध्यम से एम्स लाने के लिए राज्य सरकार से सहयोग मिल रहा है। हेलि एंबुलेंस सेवा फिर शुरू किए जाने के लिए पत्राचार व प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. श्रीलॉय मोहंती, पीआरओ एम्स

 

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