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Tehri: पलायन की पीड़ा के बीच धार्मिक आयोजनों से गुलजार हुआ मान्दरा गांव, लौट आई पुरानी रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी, घनसाली (टिहरी)
Published by: Alka Tyagi
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:09 PM IST
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सार
विवाहित बेटियों (ध्याणिंयों) के सहयोग से दांणिया धाम स्थित घंटाकर्ण, हुणेश्वर और भैरव देवता मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण का शुभारंभ हुआ।
टिहरी के मान्दरा गांव में लौटी रौनक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पलायन की मार झेल रहे भिलंगना ब्लॉक के अनेक गांव इन दिनों प्रवासियों और ग्रामीणों की वापसी से फिर से आबाद नजर आ रहे हैं। जून माह में आयोजित होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम गांवों में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। वर्षों पहले रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में गांव छोड़ चुके लोग अपने पैतृक गांवों की ओर लौट रहे हैं, जिससे लंबे समय बाद बिछड़े परिजनों और ग्रामीणों का मिलन हो रहा है।
भिलंगना क्षेत्र के मान्दरा गांव में भी इन दिनों विशेष उत्साह का माहौल है। लगभग 85 प्रतिशत पलायन झेल चुके इस गांव के कई मकान खंडहर बनने की कगार पर हैं और खेत-खलिहान बंजर पड़े हैं। लेकिन धार्मिक आयोजनों के चलते गांव में फिर से रौनक लौट आई है।
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सोमवार से गांव की विवाहित बेटियों (ध्याणिंयों) के सहयोग से दांणिया धाम स्थित घंटाकर्ण, हुणेश्वर और भैरव देवता मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण का शुभारंभ हुआ। कथा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, प्रवासी परिवार और श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा पुराण का प्रवचन द्वारिका प्रसाद पैन्यूली व आचार्य कमलेश्वर प्रसाद गैरोला किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि 10 जून से गांव में तीन दिवसीय ग्रामोत्सव सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे गांव के लोग भी शामिल होंगे।
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ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पलायन से टूटते सामाजिक रिश्तों को जोड़ने का भी माध्यम बन रहे हैं। वर्षों से सूने पड़े आंगनों, बंद घरों और वीरान खलियानों में एक बार फिर चहल-पहल दिखाई दे रही है। धार्मिक अनुष्ठानों और ग्रामोत्सव के बहाने गांव अपने पुराने स्वरूप और सामाजिक एकता को फिर से जीवंत होते हुए देख रहा है।
ग्रामीण राजेंद्र नौटियाल ने बताया मांदरा गांव पलायन की मार झेल रहा है, लेकिन मई जून में काफी प्रवासी गांव लोटते हैं, हाल ही में गंगा दशहरा पर भी भव्य आयोजन किया था जबकि अब विवाहित बेटियों द्वारा श्रीमद्भागवत कथा पुराण का आयोजन किया जा रहा है, जबकि 10 जून से त्रिदेवों का धार्मिक अनुष्ठान व ग्रामोत्सव किया जाएगा, वहीं उन्होंने बताया कि हमारा पूरा पहाड़ पलायन की मार झेल रहा है, यदि इस प्रकार के आयोजन होते रहेंगे तो लोग पहाड़ों अपने घरों की और रुख करेंगे, 2020 में जब कोरोना महामारी आई थी तो तो लोगों ने पहाड़ों की रुख किया सबने अपनी मात्रभूमि को पुंकरा था ।
शिवानी ने बताया कि हमारे गांव की सभी विवाहित बहनों ने मिलकर मायके में अपने इष्टदेव को स्थान पर धार्मिक आयोजन कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि हम एक दूसरे को जानते भी नहीं थे गांव में सब पलायन कर चुके हैं इस आयोजन से एक दूसरे को मिलने का मौका मिल रहा है।
वीना रतूड़ी ने बताया कि हमें बहुत खुशी हो रही की हम सभी बहिनें (ध्याणिंयां) यहां इक्कट्ठा हुई है सभी को एक दूसरे से मिलने का मौका भी मिल रहा है और काफी खुशी हो रही है।
रेखा रतूड़ी ने बताया कि हम अपने मायके में आ रखें हैं अपनी हमारी यहां पर सभी बहिने , बुआ आ रखी है यहां पर हर वर्ष ग्रामोत्सव का आयोजन होता है जबकि इस बार हम बहिनों ने यहां पर धार्मिक अनुष्ठान करने का मन बनाया जिसमें सभी लोग बढ़ चढ़कर हमारा सहयोग कर रहे हैं