सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भाजपा ने शाह से जो मंत्र लिया वह काम कर गया। मोदी के इस मॉडल पर चलकर ही बीजेपी ने उत्तराखंड में शानदान जीत हासिल की।
शाह के इस मंत्र से उत्तराखंड में जीती भाजपा, जानिए किस फॉर्मूले पर चले भाजपाई
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सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भाजपा को मोदी के सुशासन मॉडल के प्रचार फॉर्मूले ने दो तिहाई बहुमत दिला दिया। प्रचार रणनीति में मतदाताओं को केंद्र सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को बताने की बात काम कर गई। सीएम हरीश रावत को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा ने घेरकर स्थानीय मुद्दे गायब कर वन रैंक वन पेंशन, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, उज्जवला, जनधन जैसी योजनाओं को इस तरह परोसा कि 45 प्रतिशत से अधिक का मतदान अपने पक्ष में कर लिया।
प्रचार की रणनीति को टीम शाह ने अपने हाथ में रखकर प्रदेश संगठन को केवल भीड़ जुटने के लिए इस्तेमाल किया। पुराने चेहरों खंडूड़ी, निशंक, कोश्यारी की सीमित भूमिका कर केंद्रीय नेताओं को प्रचार अभियान में झोंकने की रणनीति पर उठने वाले सवालों पर जीत ने विराम लगा दिया है।
उत्तराखंड में इस बार कांग्रेस और भाजपा का चुनाव प्रचार अभियान का फार्मूला पिछले चुनावों से अलग है। भाजपा ने राज्य सरकार को केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा, जबकि उपलब्धियों में केंद्र सरकार का जमकर गुणगान हो रहा है। भाजपा ने प्रचार में ऐसा ताना बना बुना कि सीएम हरीश रावत अपनी एकला चलो की नीति के कारण उसमें फंसते चले गए। कांग्रेस का रावत बनाम मोदी चुनाव करने का फार्मूला भाजपा की रणनीति का हिस्सा था, जिसे उसने केंद्रीय नेताओं की मदद से कारगर कर दिखाया।
प्रचार के फ्रंट पर रावत रावत सरकार जिन केंद्र पोषित योजनाओं की फंडिंग का मसला उठा रहे हैं, उसके जवाब में भाजपा केंद्र से मिलने वाले आंकड़ों की बाजीगरी से मात देने में कामयाब रही। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत और अमृता रावत आदि कांग्रेस नेताओं के भाजपा में आने से पार्टी केवल बीते ढाई वर्ष के रावत कार्यकाल पर टारगेट कर रही है।