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Uttarakhand: सीडीएस चौहान पहुंचे श्रीनगर, छात्रों से किया संवाद, कहा-राष्ट्रीय सुरक्षा में जनभागीदारी जरूरी

संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 21 Feb 2026 12:21 PM IST
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सार

देश के सीडीएस जनलर अनिल चौहान का आज श्रीनगर गढ़वाल के दौरे पर पहुंचे। यहां  उन्होंने गढ़वाल विवि में छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ सैन्यभूमि भी है। सामरिक सोच को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।

CDS General Anil Chauhan visits Srinagar garhwal villagers from his ancestral village Gavana also come to meet
देश के सीडीएस जनलर अनिल चौहान कार्यक्रम में पहुंचे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

देश के सीडीएस जनलर अनिल चौहान श्रीनगर गढ़वाल के दौरे पर पहुंचे हैं। सीडीएस ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के चौरास परिसर में एनसीसी कैडेड द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर ग्रहण किया। वह अपनी पत्नी अनुपमा चौहान के साथ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। 

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हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रक्षा स्टाफ प्रमुख (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामरिक सोच को जन-जन तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता विकसित हो सके।
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अपने उद्बोधन में सीडीएस ने कहा कि वे सदैव स्वयं को एक विद्यार्थी मानते हैं और जीवन में सरलता को अपनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, सादगी ही जीवन में सबसे बड़ी तरक्की है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पचास वर्षों से अधिक की यात्रा में संस्थान ने सही दिशा, गति और कठोर परिश्रम के बल पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।

 

रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए
मुंबई में आयोजित सम्मेलन में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त स्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया।उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति एवं समस्त फैकल्टी को बधाई देते हुए कहा कि छात्रों के सपनों को साकार करने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत में स्ट्रैटेजिक कल्चर यानी रणनीतिक संस्कृति को लेकर जो भ्रांतियाँ हैं, उन्हें दूर करने की आवश्यकता है। रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि और सैन्यभूमि दोनों बताते हुए कहा कि राज्य इन दोनों पहचान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि हाल के समय में 74 शिक्षकों को पदोन्नति दी गई है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत सरकार के समक्ष लगभग 450 करोड़ रुपये के पाँच प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए गए हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें राज्य एवं केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है। डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रम प्रारंभ करने की दिशा में भी कार्य प्रगति पर है।

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विश्वविद्यालय द्वारा गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के साथ जूनियर लेवल डिफेंस मैनेजमेंट डिप्लोमा के लिए समझौता किए जाने की जानकारी भी दी गई। साथ ही अन्य सैन्य संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया, जिसमें विभिन्न विभागों के शोधार्थियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक विषयों पर अपने प्रश्न रखे।

 

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