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Uttarakhand: राज्य में होगी हाथी, गुलदार और बंदरों की गणना, भारतीय वन्यजीव संस्थान का लिया जाएगा सहयोग

विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 02 May 2026 10:52 AM IST
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सार

उत्तराखंड में हाथी, गुलदार और बंदरों की गणना होगी। इसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान का सहयोग लिया जाएगा। 

Census of Elephants Leopards and Monkeys to be Conducted in the State Uttarakhand News
अफ्रीकी हाथी शंकर - फोटो : X/Kirti Vardhan Singh
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विस्तार

राज्य में वन विभाग हाथी, गुलदार और बंदरों का आकलन करेगा। इसके लिए विभाग भारतीय वन्यजीव संस्थान का सहयोग लेगा। वन महकमे की संस्थान के साथ बातचीत भी हो चुकी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने अखिल भारतीय समन्वित हाथी आकलन-2023 की रिपोर्ट जारी की थी। यह डीएनए आधारित थी।

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यह तरीका पहली बार इस्तेमाल किया गया था। इसमें राज्य में 1792 हाथियों के होने का अनुमान लगाया गया था। राज्य में 2020 में हाथियों की संख्या 2026 थी। अब वन विभाग हाथियों की संख्या का आकलन देखकर (डायरेक्ट काउंट) करेगा।
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यह आकलन का पुराना और पूर्व में भी इस्तेमाल किया गया तरीका है। वनाधिकारियों के अनुसार, आकलन का काम दो महीने में शुरू होगा। गर्मी का समय इस कार्य के लिए सबसे बेहतर होता है क्योंकि वन्यजीव पानी के स्रोतों के पास पहुंचते हैं।

 

सभी जगहों में गुलदार की संख्या का पता लगाएंगे

वन विभाग ने गुलदार की संख्या के आकलन का भी निर्णय लिया है। राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण ने स्टेटस ऑफ लेपर्ड इन इंडिया-2022 रिपोर्ट जारी की थी। इसमें गुलदार की संख्या 652 आंकी गई है, जबकि वर्ष-2018 में संख्या 839 थी। विभाग का मानना है कि यह रिपोर्ट केवल बाघ आकलन वाले कैमरा ट्रैप इलाकों की थी। अब एनटीसीए द्वारा अध्ययन किए गए क्षेत्रों को छोड़कर प्रदेश के अन्य हिस्सों में गुलदार का आकलन होगा।
 

क्षेत्रवार होगा बंदरों का आकलन

प्रदेश में बंदर फसलों को अत्यधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब वन विभाग क्षेत्रवार बंदरों की संख्या का पता लगाने के लिए आकलन कराएगा। इसमें एनजीओ, स्वयंसेवकों और वन्यजीव संरक्षण में रुचि रखने वाले व्यक्तियों का सहयोग लिया जाएगा। यह कार्य एक साथ निर्धारित तीन दिन तक होगा।

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तेंदुआ, हाथी और बंदरों के आकलन से जो जानकारी आएगी, उससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह जानकारी संरक्षण के काम में उपयोगी होगी। -रंजन मिश्रा, प्रमुख वन संरक्षक

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