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चमोली आपदा : कई साल जमने-पिघलने की प्रक्रिया से गुजरने के बाद दरकीं नीती घाटी में चट्टानें, तस्वीरें

Mon, 15 Feb 2021 11:12 AM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 15 Feb 2021 11:12 AM IST
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Chamoli Disaster: Rocks receded after several years of freezing and melting
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

चमोली जिले की नीती घाटी में पिछले दिनों आई प्राकृतिक आपदा को लेकर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक लगातार शोध में जुटे हुए हैं। वैज्ञानिकों के शोध में यह बात सामने आई है कि नीती घाटी में जो भारी-भरकम चट्टानें टूटीं वे पिछले कई सालों से पिघलने और जमने की प्रक्रिया से गुजर रही थीं।



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Chamoli Disaster: Rocks receded after several years of freezing and melting
मलबा हटाने का कार्य जारी - फोटो : अमर उजाला

बार-बार पिघलने और जमने के कारण ये चट्टानें बेहद कमजोर हो गई थीं और तेज धमाके के साथ टूटकर नीचे गिर गईं। इससे चट्टानों के ऊपर लटका ग्लेशियर भी तेज धमाके के साथ नीचे आ गिरा और भयावह तबाही हुई। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. कालाचांद साईं का कहना है कि आपदा स्थल से लौटे संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार शोध किए जा रहे हैं।
 

Chamoli Disaster: Rocks receded after several years of freezing and melting
मलबा हटाने का कार्य जारी - फोटो : अमर उजाला

आपदा स्थल से लाए गए अवसादों, चट्टानों और पानी के नमूनों के जरिये इस बात का पता लगाया जा रहा है कि आखिरकार आपदा की असली वजह क्या हो जा सकती है। निदेशक डॉ. साईं का मानना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आपदा से ठीक दो दिन पहले हुई बर्फबारी की वजह से ऊपरी हिस्से में ताजा बर्फ का वजन ज्यादा बढ़ गया।

 

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Chamoli Disaster: Rocks receded after several years of freezing and melting
मलबा हटाने का कार्य जारी - फोटो : अमर उजाला
परिणामस्वरूप चट्टानें भरभरा कर नीचे जा गिरीं और तबाही का कारण बनीं। बता दें कि पिछले दिनों नीती घाटी में हैंगिंग ग्लेशियर के टूटकर नीचे गिरने की वजह से भारी तबाही हुई थी। इसमें ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदी पर बने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गए थे।

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Chamoli Disaster: Rocks receded after several years of freezing and melting
मलबा हटाने का कार्य जारी - फोटो : अमर उजाला

जबकि, 200 से अधिक लोग आपदा के बाद से लापता हो गए, जिसमें से 50 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। आपदा के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी समेत केंद्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियां लगातार आपदा राहत कार्य में जुटी हुई हैं।

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