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चारधाम यात्रा: महज 17 दिन शेष, हाईवे पर खतरा, अस्पताल बेबस और सुविधाएं लापता, पढ़ें अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट

राजीव खत्री/राजेश भट्ट, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Thu, 02 Apr 2026 12:53 PM IST
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सार

चारधाम यात्रा में महज 17 दिन शेष है। हाईवे पर खतरा है। अस्पताल बेबस और सुविधाएं लापता है। यात्रा से पहले अमर उजाला ने ग्राउंड पर जाकर हालात देखें।

CharDham Yatra 17 Days Remain Debris Piles Up Along Roadsides in Several Locations Hazards on Highway
चारधाम यात्रा मार्ग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

ऋषिकेश से देवप्रयाग की दूरी करीब 75 किमी है। चारधाम यात्रा शुरू होने में अब महज 17 दिन शेष हैं लेकिन तैयारियों के दावे जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। ऋषिकेश से देवप्रयाग तक बदरीनाथ हाईवे पर 31 भूस्खलन जोन सक्रिय हैं, जिनका ट्रीटमेंट कार्य अब भी अधूरा है। कई स्थानों पर मलबा सड़कों के किनारे जमा है और विभाग खुद मान रहा है कि काम दिसंबर तक चलेगा। वहीं हाईवे पर स्वास्थ्य, पेयजल और सार्वजनिक शौचालयों की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। 

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ऋषिकेश से कौड़ियाला

ऋषिकेश से कौड़ियाला की दूरी करीब 35 किमी, इस दायरे में तीन स्थानों पर भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कार्य जारी है। सभी स्थानों पर 100 से 200 मीटर तक सड़क के दोनों ओर मलबा बिखरा हुआ है। विभाग 10 दिनों के भीतर मलबा साफ करने का दावा कर रहा है लेकिन धरातल पर जो स्थिति है उससे स्पष्ट है कि मलबा साफ करना विभाग के लिए कड़ी चुनौती है।

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तपोवन, नीरगड़्डू, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी और कौड़ियाला प्रमुख पड़ाव हैं। इन सभी प्रमुख पड़ावों में पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय और पेयजल की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। देवप्रयाग से पहले कोई स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं है। कौड़ियाला से 20 किमी अंदर लिंक मार्ग से जुड़े पावकी देवी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध है लेकिन यहां चिकित्सक सहित अन्य सभी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।

पेट्रोल पंप और ईवी चार्जिंग की सुविधा

ऋषिकेश से कौड़ियाला तक करीब 35 किमी के दायरे में राहत की बात यह है कि यहां ईंधन की पर्याप्त सुविधा है। यहां कई स्थानों पर पेट्रोल पंप हैं। ऋषिकेश के अलावा कौड़ियाला में जीएमवीएन गेस्ट हाउस परिसर में ईवी चार्जिंग की सुविधा भी है। जिससे कि इलेक्ट्रिक वाहनों को भी ईंधन की दिक्कत नहीं होगी।

कौड़ियाला से देवप्रयाग
कौड़ियाला से देवप्रयाग की दूरी करीब 35 किमी है। इस दायरे में हाईवे स्थिति सबसे दयनीय है। तोता घाटी से मुल्यागांव तक स्थिति चिंताजनक है। तोता घाटी, मुल्यागांव और एनएचपीसी बेंड जैसे इलाके भूस्खलन के लिहाज से अत्यधिक जोखिम भरे बने हुए हैं। वहीं बछेलिखाल, धौलीधार और शिवमूर्ति पंतगांव के पास लगातार मलबा गिर रहा है। चट्टानी मलबे से सड़क कई स्थानों पर बॉटल नैक (संकरी) हो गई है। हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर यातायात ‘वन-वे’ में चल रहा है और यात्रियों को बार-बार रुकना पड़ रहा है। कई स्थानों पर 200 से 250 मीटर तक हाईवे किनारे मलबे के ढेर लगे हैं।

पर्याप्त पेट्रोल पंप

कौड़ियाला से देवप्रयाग के बीच तीन पेट्रोल पंप हैं लेकिन कौडियाला के बाद ईवी चार्जिंग सेंटर नहीं हैं। इलेक्ट्रिक वाहन वाले यात्रियों को कौड़ियाला में ही यह सुविधा मिलेगी।

स्वास्थ्य सुविधा दयनीय

ऋषिकेश के बाद देवप्रयाग में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन इसकी स्थिति दयनीय है। केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन तो है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। इस अस्पताल से बीते पांच वर्षों में 10 हजार मरीजों को रेफर कर दिया गया। वर्ष 2020 से 2025 तक देवप्रयाग में करीब 14 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। इसके बावजूद यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। सड़क हादसे के दौरान गोल्डन ऑवर में स्वास्थ्य संबंधी कोई सुविधा नहीं है।

सार्वजनिक शौचालय और पेयजल सामान्य

देवप्रयाग नगर में 11 सुलभ शौचालय हैं जिसमे 5 सुलभ इंटरनेशनल व छह नगर पालिका के हैं। सुलभ इंटरनेशनल शौचालय की स्थिति ठीक है लेकिन नगर पालिका में सुधार की आवश्यकता है। वहीं कौड़ियाला में भी सार्वजनिक शौचालय सुविधा है।

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ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर भूस्खलन वाले स्थानों पर ट्रीटमेंट कार्य तेजी से हो रहा है। बछेलीखाल धौलीधार पर दो मशीनें मलबा हटाने और चौड़ीकरण के लिए लगाई गई हैं। अन्य स्थानों पर भी सड़क को सही किया जा रहा है। जिससे जाम की स्थिति न बने। भूस्खलन एरिया में ट्रीटमेंट और पुश्ता निर्माण कार्य दिसंबर तक होता रहेगा। - राजबीर सिंह चौहान, एनएच अधिशासी अभियंता श्रीनगर

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