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Chardham Yatra: यात्रा से नेपाल के मजदूरों की भी चलती है आजीविका, डंडी-कंडी संचालन से करते हैं लाखों की कमाई

प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 01 Jun 2026 10:55 PM IST
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सार

केदारनाथ के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर डंडी संचालन में चार-चार मजदूरों की टीम लगी रहती है। श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई पार कराने में यह मजदूर अहम भूमिका निभाते हैं।

Chardham Yatra 2026 pilgrimage also sustain livelihood of labourers from Nepal earn from Dandi Kandi
डंडी कंडी से आजीविका चलाते नेपाली मजदूर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

चारधाम यात्रा केवल उत्तराखंड की आर्थिकी का ही आधार नहीं है, बल्कि इससे नेपाल मूल के सैकड़ों मजदूरों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में डंडी-कंडी संचालन का जिम्मा बड़ी संख्या में नेपाली मजदूर संभाल रहे हैं। यात्रा सीजन में ये मजदूर लाखों रुपये की कमाई कर लेते हैं।



केदारनाथ के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर डंडी संचालन में चार-चार मजदूरों की टीम लगी रहती है। श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई पार कराने में यह मजदूर अहम भूमिका निभाते हैं। बदरीनाथ धाम में बस अड्डे से मंदिर और माणा गांव के दर्शनीय स्थलों तक श्रद्धालुओं को कंडी में बैठाकर पहुंचाने का कार्य भी नेपाली मजदूर ही कर रहे हैं।
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माणा गांव में करीब एक किलोमीटर के दायरे में कंडी के माध्यम से श्रद्धालुओं को सतोपंथ ट्रैक, भीम पुल, व्यास गुफा और गणेश गुफा की सैर कराई जाती है। इसके लिए मजदूर प्रति चक्कर 1600 से 2000 रुपये तक शुल्क लेते हैं। बदरीनाथ धाम में 250 और माणा गांव में 200 नेपाली मूल के पंजीकृत कंडी संचालक सक्रिय हैं।
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ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी और पैदल रास्तों की कठिनाई के कारण बुजुर्ग, बच्चे और अस्वस्थ श्रद्धालु कंडी का सहारा लेते हैं। नेपाली मजदूर दिनभर में पांच से छह चक्कर लगाकर करीब 10 हजार रुपये तक की कमाई कर लेते हैं।

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माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि चारधाम यात्रा नेपाली मूल के मजदूरों के लिए भी बड़ा रोजगार का माध्यम बन चुकी है और यात्रा सीजन में वे इससे लाखों रुपये की आय अर्जित करते हैं।

रिंगाल से बनाई जाती है कंडी
चारधाम यात्रा के दौरान रिंगाल से बनी कंडी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं। जिले के कई गांवों के हस्तशिल्पी पारंपरिक तरीके से कुर्सी के आकार की कंडी तैयार करते हैं, जिसका उपयोग कठिन चढ़ाई वाले मार्गों पर यात्रियों को ले जाने में किया जाता है। कंडी को आरामदायक बनाने के लिए इसमें बैठने हेतु डबल गद्दी लगाई जाती है। वहीं, यात्रा के दौरान श्रद्धालु सुरक्षित रहें और चढ़ाई में नीचे न गिरें, इसके लिए आगे की ओर मजबूत रस्सी भी बांधी जाती है।

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