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Dehradun: सीएम संवाद में छात्रा की बात पर विवाद, स्कूल ने कराई पूरी जांच, प्रिंसिपल का बयान आया सामने

Thu, 13 Aug 2026 03:07 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला न्यूज डेस्क, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Thu, 13 Aug 2026 03:07 PM IST
सार

कुछ दिन पूर्व सीएम आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री ने युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सीएम धामी ने छात्रों से संवाद किया। एक छात्रा ने संवाद के दौरान सीएम धामी के सामने अपनी बात रखी, जिस पर विवाद खड़ा हो गया।

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CM Dhami dialogue program student Shaira and school principal clarified controversy over selection competition
शायरा और स्कूल की ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सीएमआई गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा शायरा की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान कही गई बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद छात्रा शायरा और स्कूल की ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल रबेका सिंह ने मामले को लेकर अपनी-अपनी बात स्पष्ट की।

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इंटरनेशनल क्वान की डो प्रतियोगिता में चयन को लेकर शायरा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से जो कहना चाहती थी, उसे ठीक से नहीं कह पाई। वह थोड़ी घबरा गई थी और अपनी बात स्पष्ट तरीके से नहीं रख सकी।
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वहीं, ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल रबेका सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी लेने पर सामने आया कि शायरा प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। हालांकि, इस प्रतियोगिता में उसने स्कूल की ओर से प्रतिभाग नहीं किया था और न ही स्कूल स्तर पर इस तरह की कोई प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। शायरा बहुत होनहार छात्रा है। 
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उन्होंने बताया कि छात्रा एक निजी एसोसिएशन के माध्यम से प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही थी, जहां उसे कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा। रबेका सिंह ने कहा कि छात्रा की प्रतिभा को देखते हुए स्कूल स्तर से उसे हर संभव मदद दी जाएगी।

छात्र-छात्राओं के सुझाव सरकारी नीतियों में होंगे शामिल : सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, छात्र-छात्राओं से संवाद में मिले सुझावों को सरकारी नीतियों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सफलता का मंत्र देते हुए कहा, जीवन में संकल्प लेकर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित ही कामयाबी मिलेगी।

सीएम आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री ने युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम ने छात्र-छात्राओं से नशा मुक्त उत्तराखंड, स्वच्छता, परिवहन व्यवस्था सहित राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया। उन्होंने विद्यालयी छात्र-छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखंड: एक विकसित राज्य के लिए मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लैट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार करेगी। कार्यक्रम में प्रदेशभर के 2828 सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों के 11 व 12वीं के तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए।

मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। सीएम ने कहा कि हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

एआई का तभी उपयोग करें जब आवश्यकता हो

सीएम ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। तकनीक को सहयोगी बनाएं, लेकिन हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं होना चाहिए।

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