Haridwar: बिना गाइडलाइन फिर कर दिया क्रिकेटर को चयन से बाहर, सीनियर क्रिकेट लीग सीजन-02 में भी हुई थी मनमानी
बिना गाइडलाइन एक बार एक क्रिकेटर को चयन से बाहर कर दिया। सीनियर क्रिकेट लीग सीजन-02 में भी खिलाड़ी के साथ मनमानी हुई थी। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड एक साल से गाइडलाइन नहीं दे रहा है।
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जिला क्रिकेट प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद बिना गाइडलाइन फिर एक क्रिकेटर को चयन प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है। इससे पूर्व डिस्ट्रिक्ट हरिद्वार सीनियर क्रिकेट लीग सीजन-02 में भी उसके साथ मनमानी हुई थी। हद यह है कि एक साल से अभिभावक चयन प्रतियोगिता से बाहर करने की गाइडलाइन मांग रहे हैं लेकिन वो भी नहीं दी जा रही है।
कृष्ण नगर हरिद्वार के रहने वाले रोशनलाल टांगड़ी ने बताया कि उनके बेटे राजेश तांगड़ी ने डिस्ट्रिक्ट हरिद्वार सीनियर क्रिकेट लीग (2025-26) में पूरे जिले में 88 रन के सर्वाधिक औसत से 6 मैचों में 1 शतक और 4 अर्धशतक की मदद से 353 रन बनाए थे। इसी आधार पर उनका चयन जिले की टीम में कर लिया गया था लेकिन टीम की घोषणा के बाद क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ हरिद्वार ने राजेश को बीसीसीआई लेवल-1 कोचिंग में भाग लेने के कारण सीएयू की गाइडलाइन का हवाला देते हुए जिले की टीम से बाहर कर दिया था।
ट्रायल से बाहर कर दिया गया
इस बार भी डिस्ट्रिक्ट हरिद्वार सीनियर क्रिकेट लीग (2026-27) सीजन-02 में राजेश तांगड़ी ने किशोरी लाल क्रिकेट एकेडमी की ओर से प्रतिभाग किया। इसमें उन्होंने चार मैच में 230 रन बनाए। उनका रन बनाने का औसत 76 प्रतिशत रहा लेकिन उन्हें प्रदेश के लिए बनाई जाने वाली जिला स्तरीय टीम में शामिल करने के लिए बीसीसीआई लेवल- 1 कोच बनने का हवाला देते हुए ट्रायल से बाहर कर दिया गया।
पिता रोशनलाल एक साल से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड से बीसीआई लेवल-1 कोच बनने पर जिला क्रिकेट टीम में चयन नहीं करने की गाइडलाइन मांग रहे हैं। जिसे एसोसिएशन नहीं दे रहा है। उन्होंने एसोसिएशन पर बेटे को जानबूझकर टीम से निकालने का आरोप लगाया है, ताकि वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ सके।
बेटा नहीं किसी कोच पैनल में शामिल
पिता रोशनलाल तांगड़ी का कहना है कि जिस गाइडलाइन की बात क्रिकेट एसोसिएशन कर रही है, उसमें कोच बनने पर पैनल में शामिल होने वालों को किसी प्रतियोगिता में चयन नहीं करने का प्रावधान किया गया है, जबकि उनका बेटा अभी केवल कोच बना है, वह किसी भी कोच पैनल में नहीं हैं। इसलिए उनके बेटे के साथ जिला टीम में चयन न कर अन्याय किया जा रहा है।
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कोच बनने वालों काे किसी भी प्रतियोगिता में नहीं खिलाया जा सकता है। इस संबंध में संबंधित खिलाड़ी और उनके पिता को बताया भी जा चुका है। गाइडलाइन भी एसोसिएशन की वेबसाइट पर पड़ी हुई है, जिसे देख सकते हैं। -मोहित डोभाल, सीईओ, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ हरिद्वार