Dehradun: श्रम विभाग का औद्योगिक संगठनों को सुझाव, कारखानों में बोर्ड पर लिखें श्रमिकों के वेतन की जानकारी
श्रम विभाग के उच्च अधिकारियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच महत्त्वपूर्ण बैठक हुई। श्रम आयुक्त पीसी दुम्का की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अपर श्रम आयुक्त अनिल पेटवाल और इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कई पदाधिकारी शामिल थे।
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राज्य के भी विभिन्न हिस्सों में वेतनमान बढ़ाने की मांग कर श्रमिक आंदोलन कर रहे हैं। श्रम विभाग ने औद्योगिक संगठनों को सुझाव दिया है कि वे कंपनी के किसी प्रमुख स्थान पर कर्मचारियों को मिलने वाले वेतनमान, स्वास्थ्य सुविधाएं, काम के घंटे सहित अन्य जानकारी बड़े बोर्ड पर स्पष्ट तरीके से लिखें। इससे कर्मचारियों को अपने वेतन को लेकर गलतफहमी दूर होगी और विवाद की स्थिति से बचा जा सकेगा। विभाग ने कर्मचारियों से लगातार संवाद कर उनकी शंकाओं का समाधान करने का भी सुझाव दिया है।
सोमवार को श्रम विभाग के उच्च अधिकारियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच महत्त्वपूर्ण बैठक हुई। श्रम आयुक्त पीसी दुम्का की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अपर श्रम आयुक्त अनिल पेटवाल और इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कई पदाधिकारी शामिल थे। बैठक में कंपनियों को यह सलाह दी गई कि वे श्रमिकों के साथ होने वाले किसी भी मतभेद को बातचीत से सुलझाने का प्रयास करें। श्रमिकों को उनके वेतनमान सहित अन्य सभी लाभों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने पर इस तरह के संघर्ष से बचा जा सकता है।
शिकायत निवारण समिति बनाने का निर्देश
कंपनियों को सुझाव दिया गया है कि वे शिकायत निवारण समिति की स्थापना करें। इस समिति में कर्मचारी और कंपनी के मानव संसाधन विभाग के सदस्य शामिल हों। किसी कर्मचारी को अपने वेतनमान संबंधी समस्या होने पर इस समिति के समक्ष शिकायत की जाए और उसका हल तलाशा जाए। इससे कंपनी-कर्मचारियों के बीच वेतन या अन्य भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी से भी बचा जा सकेगा।
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अफवाह फैलाने का शक, होगी जांच
वर्तमान तनाव के पीछे सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाह को जिम्मेदार बताया जा रहा है। अफवाह फैलाई गई थी कि सरकार ने कर्मचारियों का वेतन 20 हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। इसके बाद श्रमिक अपना वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर गए। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह अफवाह एक साजिश के अंतर्गत सोच-समझकर तो नहीं फैलाई गई? औद्योगिक संगठनों को यह भी सुझाव दिया गया है कि वे कर्मचारियों के वेतनमान और अन्य लाभों की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यमों से भी दें। इससे सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों को रोकने में सहायता मिलेगी।