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Dehradun News: डिप्लोमा इंजीनियरों की एक अप्रैल से पूर्ण हड़ताल की चेतावनी
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- पदोन्नति समेत 27 सूत्री मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज इंजीनियर
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने एक अप्रैल से कामकाज बंद करके पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी है। महासंघ ने 277 सूत्री मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से नाराजगी जताई है।
बृहस्पतिवार को महासंघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल सभा की अध्यक्षता पंकज सैनी और संचालन यमुना घटी सचिव राजेश तिवारी ने किया। बैठक में मुख्य रूप से महासंघ के अधिवेशन में मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी 27 सूत्री समस्या पत्र पर शासन से कोई सकारात्मक आदेश या वार्ता न होने पर रोष जताया गया। सभा में निर्णय लिया गया कि महासंघ की ओर से घोषित आंदोलन कार्यक्रम का अनुपालन करते हुए तीन ऊर्जा निगमों में कार्यरत संगठन के सदस्य द्वितीय चरण में हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।
महासंघ वर्तमान में देहरादून में जनपदवार धरना कार्यक्रम कर रहा है। महासंघ के समस्त घटक संघ 23 मार्च को हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। विद्युत उपभोक्ताओं की समस्या और अति आवश्यक सेवा के महत्व को देखते हुए ऊर्जा निगमों के डिप्लोमा इंजीनियर भी हड़ताल पर जाने को तत्पर हैं। तय हुआ है कि समाधान न हुआ तो एक अप्रैल से ऊर्जा निगमों के डिप्लोमा इंजीनियर्स भी कार्य से विरत होकर हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।
सभा में वक्ताओं ने खेद व्यक्त किया कि ऊर्जा निगमों में अवर अभियंता से सहायक अभियंता के पदों पर पदोन्नति कोटा (40प्रतिशत) शासन के अन्य इंजीनियरिंग विभागों (50 प्रतिशत) की तुलना में बहुत कम है। इस समस्या को विगत कई वर्ष से निरंतर उत्तराखंड शासन के सामने रखा जा रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीनों ऊर्जा निगमों में शासन की भांति वर्ष 2005 तक निकाली गई नियुक्ति विज्ञप्ति के सापेक्ष पुरानी पेंशन का लाभ दिया गया है लेकिन ऊर्जा निगम में अभी नहीं दिया गया। अवर अभियंता से मुख्य अभियंता (महाप्रबंधक) स्तर तक सेपरेट प्रमोशन गैलरी लागू करने की मांग की गई। आज की सभा में महासचिव विक्की दास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद अनीस, विवेक कुमार, भानु प्रकाश जोशी, प्रदीप प्रकाश शर्मा, मयंक गुप्ता, संदीप कुमार नेगी, जगदीश नौटियाल, हिमांशु रावत, कंचन सोनकर, संजय सती, सुप्रिया बडोनी आदि ने विचार रखे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने एक अप्रैल से कामकाज बंद करके पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी है। महासंघ ने 277 सूत्री मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से नाराजगी जताई है।
बृहस्पतिवार को महासंघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल सभा की अध्यक्षता पंकज सैनी और संचालन यमुना घटी सचिव राजेश तिवारी ने किया। बैठक में मुख्य रूप से महासंघ के अधिवेशन में मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी 27 सूत्री समस्या पत्र पर शासन से कोई सकारात्मक आदेश या वार्ता न होने पर रोष जताया गया। सभा में निर्णय लिया गया कि महासंघ की ओर से घोषित आंदोलन कार्यक्रम का अनुपालन करते हुए तीन ऊर्जा निगमों में कार्यरत संगठन के सदस्य द्वितीय चरण में हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।
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महासंघ वर्तमान में देहरादून में जनपदवार धरना कार्यक्रम कर रहा है। महासंघ के समस्त घटक संघ 23 मार्च को हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। विद्युत उपभोक्ताओं की समस्या और अति आवश्यक सेवा के महत्व को देखते हुए ऊर्जा निगमों के डिप्लोमा इंजीनियर भी हड़ताल पर जाने को तत्पर हैं। तय हुआ है कि समाधान न हुआ तो एक अप्रैल से ऊर्जा निगमों के डिप्लोमा इंजीनियर्स भी कार्य से विरत होकर हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।
सभा में वक्ताओं ने खेद व्यक्त किया कि ऊर्जा निगमों में अवर अभियंता से सहायक अभियंता के पदों पर पदोन्नति कोटा (40प्रतिशत) शासन के अन्य इंजीनियरिंग विभागों (50 प्रतिशत) की तुलना में बहुत कम है। इस समस्या को विगत कई वर्ष से निरंतर उत्तराखंड शासन के सामने रखा जा रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीनों ऊर्जा निगमों में शासन की भांति वर्ष 2005 तक निकाली गई नियुक्ति विज्ञप्ति के सापेक्ष पुरानी पेंशन का लाभ दिया गया है लेकिन ऊर्जा निगम में अभी नहीं दिया गया। अवर अभियंता से मुख्य अभियंता (महाप्रबंधक) स्तर तक सेपरेट प्रमोशन गैलरी लागू करने की मांग की गई। आज की सभा में महासचिव विक्की दास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद अनीस, विवेक कुमार, भानु प्रकाश जोशी, प्रदीप प्रकाश शर्मा, मयंक गुप्ता, संदीप कुमार नेगी, जगदीश नौटियाल, हिमांशु रावत, कंचन सोनकर, संजय सती, सुप्रिया बडोनी आदि ने विचार रखे।