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Roorkee: बिना हिसाब-किताब के दौड़ रही निगमों के माननीयों की गाड़ी, 25 साल बाद भी यूपी का अधिनियम लागू

अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: Renu Saklani Updated Wed, 25 Mar 2026 11:34 AM IST
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सार

निगमों के माननीयों की गाड़ी बिना हिसाब-किताब के दौड़ रही है। राज्य गठन के 25 साल बाद भी उत्तर प्रदेश का अधिनियम लागू है। नगर निगम रुड़की से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में इसका खुलासा हुआ है।

Vehicles belonging to Municipal Corporation Mayor and officials are operating without proper accounting Roorke
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

निगमों में बिना किसी हिसाब-किताब के माननीयों की गाड़ी दौड़ रही है। मेयर, निगम के माननीय कितने बजट की गाड़ी इस्तेमाल करेंगे, कितना तेल खर्च कर सकते हैं और अन्य तरह के खर्च किस सीमा तक किए जा सकते हैं, इसके लिए कोई स्पष्ट शासनादेश ही नहीं है।

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जब इस बाबत एक आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई और मामला आयोग में पहुंचा तो शहरी विकास विभाग ने मेयर के भत्तों और अन्य सुविधाओं के बाबत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा लेकिन तीन साल से यह प्रस्ताव भी शासन में धूल फांक रहा है। अब सचिवालय की ओर से जवाब दिया गया है कि प्रस्ताव पर कार्यवाही गतिमान है।

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खर्च की निर्धारित सीमा के बाबत जानकारी मांगी गई
गौरतलब है कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी उत्तराखंड के नगर निगमों में उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के अंतर्गत व्यवस्था संचालित है। उसमें भी मेयर के खर्च पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर रुड़की गीतांजलि विहार निवासी अमित अग्रवाल की ओर से फरवरी 2023 में नगर निगम रुड़की से मेयर पर किए जाने वाले खर्च की निर्धारित सीमा के बाबत जानकारी मांगी गई थी।

इसके बाद शासनादेश खंगाले गए लेकिन उसमें कहीं भी खर्च के बाबत स्पष्ट जानकारी नहीं मिली और अपीलकर्ता को अस्पष्ट जानकारी दी गई। इसके बाद यह मामला उत्तराखंड सूचना आयोग देहरादून पहुंचा। मामले में 14 नवंबर 2023 को राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने शहरी विकास सचिव को निर्देशित किया कि मेयर और उप मेयर के लिए भत्तों एवं सुविधाओं के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

साथ ही शहरी विकास निदेशालय को शासन के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। इसके बाद निदेशालय ने सचिवालय को प्रस्ताव जमा कराया। तब से लेकर प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इस संबंध में अपीलकर्ता को फरवरी 2026 में भेजे गए पत्र में अपर सचिव ने जानकारी दी है कि निदेशालय के प्रस्ताव और आयोग के आदेश के पर कार्यवाही गतिमान है।

आयोग ने ये की टिप्पणी

आयोग ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि उत्तराखंड में नगर निगम में मेयर एवं उप मेयर को भत्तों एवं सुविधाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। प्रदेश में लगातार नगर निगम की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है और असमंजस की स्थिति है। मेयर पर निगम की ओर से किए जाने वाले व्यय की सूचना मांगी जाती है तो स्पष्ट सूचना प्रेषित नहीं की जाती है।

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15 माह में खर्च किए गए करीब 25 लाख

जानकारी में यह उल्लेख भी किया गया है कि 2022-23 में 15 माह में गाड़ी के तेल, वाहन की मरम्मत और कर्मचारियों के वेतन को मिलाकर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

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