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Rishikesh AIIMS: युवाओं में भी बढ़ रहा बड़ी आंत का कैंसर, बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान से चपेट में आ रहे

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Wed, 25 Mar 2026 11:45 AM IST
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सार

युवाओं में भी बड़ी आंत का कैंसर बढ़ रहा है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं।

Colon Cancer Is Also on Rise Among Youth Changing Lifestyles, Unbalanced Diets and a Lack of Physical Activity
बड़ी आंत का कैंसर - फोटो : Freepik.com
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विस्तार

बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अब युवाओं में भी बड़ी आंत का कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। सामान्यत: बड़ी आंत का कैंसर 60 साल की उम्र के बाद होते हैं। वहीं बच्चों में भी कुछ मामले आए हैं।

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मंगलवार को एम्स मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की पहल पर बड़ी आंत का कैंसर (कोलन कैंसर) जागरूकता माह के तहत ओपीडी परिसर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने किया। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कोलोरेक्टल कैंसर के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के विषय में मरीजों व उनके तीमारदारों को विस्तृत जानकारी दी।

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कोलन कैंसर के 150 से अधिक मामले आए
कैंसर चिकित्सा विभाग के डॉ. अमित सहरावत ने बताया कि कोलोरेक्टल कैंसर भारत में छठवें स्थान पर सबसे अधिक होने वाले कैंसर मामलों में शामिल है। उन्होंने बताया कि फास्टफूड, अधिक वसा युक्त आहार, रेड मीट, शराब और धूम्रपान जैसे कारकों से कोलन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, आनुवांशिक कारण, मोटापा, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता भी इस बीमारी को बढ़ावा देते हैं।

डॉ. सहरावत ने बताया कि पिछले वर्ष कैंसर ओपीडी में कोलन कैंसर के 150 से अधिक मामले आए। जिनमें बड़ी संख्या में 40 साल की उम्र के आसपास के युवा भी शामिल थे। डॉ. सहरावत ने बताया कि कोलन कैंसर से बचने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, अधिक फल और सब्जियों का सेवन तथा अल्कोहल और तंबाकू से दूरी बनाकर रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को कोलन कैंसर हो चुका है, उन्हें नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट कराना चाहिए।

पहचान और लक्षण

डॉ. सहरावत बताते हैं कि इस बीमारी के शुरुआती चरण में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ निम्नलिखित संकेत देखने को मिल सकते हैं। मल त्याग की आदतों में बदलाव (लगातार कब्ज या दस्त), मल में खून आना, पेट में लगातार दर्द या सूजन रहना, अचानक वजन घटना, कमजोरी और थकान महसूस होना। डॉ. सहरावत बताते हैं कि कोलन कैंसर की कोलोनोस्कोपी, मल परीक्षण, सीटी स्कैन और रक्त परीक्षण के माध्यम से प्रारंभिक अवस्था में पहचान की जा सकती है। यदि बीमारी का शीघ्र निदान हो जाए तो इसका इलाज संभव है। कोलन कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी जैसी चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।

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भारत में बढ़ रहा है कोलोरेक्टल कैंसर

डॉ. दीपक सुंदरियाल के अनुसार, पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में अब तक कोलोरेक्टल कैंसर के मामले कम थे, लेकिन हाल के वर्षों में शहरीकरण, अनियमित दिनचर्या और अस्वस्थ खानपान के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, फास्टफूड और सॉफ्ट ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन युवाओं में मोटापा, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।


 

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