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उत्तराखंड: हाथी दांत चोरी मामला, तस्करी के एंगल से भी जांच करेगा वन महकमा, एसडीओ कोटद्वार को सौंपी गई जांच

Tue, 03 Nov 2026 11:48 AM IST
Renu Saklani माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 03 Nov 2026 11:48 AM IST
सार

वन विभाग के कार्यालय से हाथी दांत चोरी होने के मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। विभाग अब यह भी पता लगाएगा कि चोरी के पीछे वन्यजीव अंगों की तस्करी से जुड़ा कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

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Elephant tusks theft in uttarakhand forest department to probe smuggling angle in Laldhang Case
हाथी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत चोरी होने के मामले में अब तस्करी के एंगल से भी जांच होगी। वन विभाग ने इस मामले में एचटू केस दर्ज कर जांच एसडीओ कोटद्वार को सौंपी है। जांच में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के साथ वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के पहलू को भी शामिल किया गया है।

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प्रदेश में हाथी दांत की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 में रामनगर में वन विभाग की टीम ने एक तस्कर से हाथी दांत बरामद किया था। उसकी सूचना पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की चौकी में अवैध रूप से रखे गए हाथी दांत को भी बरामद किया गया। वर्ष 2024 में एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने श्यामपुर में तस्करों को हाथी दांत के साथ पकड़ा था। वहीं, इसी साल मई में ऊधमसिंह नगर में सात किलो से अधिक हाथी दांत बरामद किया गया था।

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अब लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत चोरी होने, जिनका वजन 35 किलो से अधिक बताया जा रहा है, ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रभारी डीएफओ तरुण एस ने बताया कि एसडीओ कोटद्वार को जांच सौंपी गई है। इसमें वन्यजीव अंगों की तस्करी के पहलू की भी पड़ताल की जाएगी।

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वन्यजीवों के अंगों का रिकॉर्ड जुटा रहा मुख्यालय

प्रदेश के 44 वन प्रभागों के अलावा कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित विभिन्न अभयारण्यों में जब्ती या अन्य कार्रवाई के दौरान बरामद वन्यजीवों के अंग कार्यालयों में रखे जाते हैं। हालांकि, इनकी संख्या और उपलब्धता की पूरी जानकारी वन मुख्यालय के पास नहीं होती। अब मुख्यालय ने सभी वन प्रभागों से हाथी दांत समेत अन्य वन्यजीव अंगों का ब्योरा मांगा है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने बताया कि वन्यजीव अंगों से संबंधित जानकारी प्रभाग स्तर पर रहती है। मुख्यालय ने सभी प्रभागों से सूचना मांगी है। वर्ष 2023 में जारी नियमों के आधार पर इनके निस्तारण को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



 

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