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Dehradun News: जमीन के नाम पर 2.12 करोड़ की ठगी, रजिस्ट्री से पहले मुख्तारनामा निरस्त
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मेहूंवाला में जमीन का सौदा कर 2.12 करोड़ रुपये से अधिक हड़पने की घटना सामने आई है। इस ठगी का शिकार कई लोग हुए हैं। पीड़ितों का आरोप है कि सहखातेदार की जमीन को अपनी बताकर पिता-पुत्र ने 2.20 करोड़ रुपये में सौदा किया। रकम का अधिकांश हिस्सा लेने के बाद रजिस्ट्री से मुकर गए। पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मेहूंवाला माफी निवासी सलीम अहमद, आबिद अली, वसीम अहमद, नसीम अहमद और इन्फिनिटी वैलनेस इंडिया कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ऋषभ जैन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने मेहूंवाला में जमीन खरीदी थी।
इसी दौरान सहखातेदार कमरूद्दीन उर्फ नसरूद्दीन ने भी जमीन बेचने की बात कही। बातचीत के बाद सौदा 2.20 करोड़ सात हजार रुपये में तय हुआ। उन्होंने नकद, चेक और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया। इसके अलावा 37 लाख रुपये से अधिक कीमत का एक प्लॉट भी दिया। इस तरह कुल 2.12 करोड़ 36 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शेष 7.71 लाख रुपये बैनामे के समय देने थे।
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आरोप है कि सितंबर 2024 में कमरूद्दीन ने जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी शिकायतकर्ताओं और एक अन्य व्यक्ति के नाम कर दी। रजिस्ट्री का समय आया तो नवंबर में उसने मुख्तारनामा निरस्त करा दिया। संपर्क करने पर उसने और उसके बेटे जमील अहमद ने रजिस्ट्री करने या रकम लौटाने से इन्कार कर दिया।
पीड़ितों ने धमकी देने का भी आरोप लगाया है। इंस्पेक्टर पटेलनगर विनोद गुसाईं ने बताया कि कमरूद्दीन उर्फ नसरूद्दीन और जमील अहमद के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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मेहूंवाला माफी निवासी सलीम अहमद, आबिद अली, वसीम अहमद, नसीम अहमद और इन्फिनिटी वैलनेस इंडिया कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ऋषभ जैन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने मेहूंवाला में जमीन खरीदी थी।
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इसी दौरान सहखातेदार कमरूद्दीन उर्फ नसरूद्दीन ने भी जमीन बेचने की बात कही। बातचीत के बाद सौदा 2.20 करोड़ सात हजार रुपये में तय हुआ। उन्होंने नकद, चेक और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया। इसके अलावा 37 लाख रुपये से अधिक कीमत का एक प्लॉट भी दिया। इस तरह कुल 2.12 करोड़ 36 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शेष 7.71 लाख रुपये बैनामे के समय देने थे।
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आरोप है कि सितंबर 2024 में कमरूद्दीन ने जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी शिकायतकर्ताओं और एक अन्य व्यक्ति के नाम कर दी। रजिस्ट्री का समय आया तो नवंबर में उसने मुख्तारनामा निरस्त करा दिया। संपर्क करने पर उसने और उसके बेटे जमील अहमद ने रजिस्ट्री करने या रकम लौटाने से इन्कार कर दिया।
पीड़ितों ने धमकी देने का भी आरोप लगाया है। इंस्पेक्टर पटेलनगर विनोद गुसाईं ने बताया कि कमरूद्दीन उर्फ नसरूद्दीन और जमील अहमद के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।