फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Train operations to be halted for four hours; work on

Dehradun News: चार घंटे थमे रहेंगे ट्रेनों के पहिए, दून-रायवाला रेल लाइन बदलने काम अभी अधूरा

Fri, 14 Aug 2026 02:19 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:19 AM IST
विज्ञापन
Train operations to be halted for four hours; work on
दून-रायवाला के बीच रेल लाइन बदलने का काम 13 अगस्त यानी अपनी तय समयावधि में पूरा नहीं हो पाया है। रेलवे की ओर से आदेश जारी कर समयावधि को चार महीने के लिए आगे बढ़ाया गया है। ऐसे में आने वाले समय में भी रात 12 बजे के बाद चार घंटे तक ट्रेनों का संचालन नहीं हो सकेगा। इसकी वजह से तीन ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ रहा है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि इसी वर्ष 10 मार्च को देहरादून से रायवाला के बीच रेल लाइन बदलने का काम शुरू किया गया था। इस काम को 13 अगस्त तक पूरा किया जाना था। काम के लिए रात 12 बजे के बाद चार घंटे के लिए ट्रेनों का संचालन भी पूरी तरह रोका गया था। इसकी वजह से काठगोदाम-देहरादून, नंदादेवी-देहरादून और जनशताब्दी के संचालन पर असर पड़ रहा है।
विज्ञापन


यात्रियों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को यह परेशानी अब आगे भी उठानी पड़ेगी। तय समय में काम पूरा न होने के चलते समयावधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 किया गया है। कार्यदायी संस्था की ओर से काम में देरी की वजह विपरीत मौसमीय परिस्थितियों को बताया गया है। इसके अलावा रेल लाइन जंगल के बीचो-बीच होने की वजह से भी कई दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। मजदूर काम पर जाने से डर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------------

40 किलोमीटर की लाइन है बदलने के लिए
अधिकारियों के मुताबिक देहरादून से रायवाला तक करीब 40 किलोमीटर की रेल लाइन बदली जानी है। जहां पर लाइन सीधी है वहां पर रेलवे की ओर से एक दिन में 500 मीटर लाइन बदलने का लक्ष्य तय किया गया है। जहां लाइन टेढ़ी हैं वहां पर 250 मीटर प्रति दिन बदलने का लक्ष्य है। वर्तमान में करीब 50 प्रतिशत काम शेष है।

---------------------
20 वर्ष में बदला जाता है ट्रैक

तकनीकी संवर्ग के रेलवे अधिकारियों की मानें तो रेलवे ट्रैक को आमतौर पर 20 से 25 वर्ष या तयशुदा ग्रॉस मिलियन टन (जीएमटी) की क्षमता पूरी होने के बाद बदला जाता है। लगातार भारी ट्रेनों के गुजरने से लोहे की पटरी और स्लीपर घिस जाते हैं, धातु कमजोर हो जाती है और दरारें आने का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षा और तेज गति बनाए रखने के लिए यह नवीनीकरण जरूरी है। हादसों से बचने और वंदे भारत जैसी आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों को सुरक्षित व 110-130 किमी/घंटा से अधिक गति से चलाने के लिए मजबूत ट्रैक आवश्यक है।

----------------------

कोट-
ट्रैक को पूरा बदलने के लिए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश की वजह से काम पर असर पड़ रहा है। तय की गई नई समयावधि में काम पूरा होने की उम्मीद है। - महेश यादव, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, मुरादाबाद मंडल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed