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Haridwar Land Scam: विजिलेंस ने मामले की जांच की पूरी, एसडीएम समेत तीन अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश

आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 13 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

जिलेंस ने पाया कि तहसील हरिद्वार के परवाने (वो प्रमाणपत्र जो भूमि के हस्तांतरण या बंदोबस्त की पुष्टि करता है। आवेदकों तक पहुंचाने में और धारा-143 जमींदारी विनाश अधिनियम (भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया) को तत्परता से करने में हरिद्वार तहसील के अधिकारी-कर्मचारियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई गई है।

Haridwar Land Scam: Vigilance completes investigation recommends action against three officers including SDM
- फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)
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विस्तार

हरिद्वार जमीन घोटाले में विजिलेंस ने तत्कालीन एसडीएम समेत तीन अफसरों की संलिप्तता बताते हुए शासन को इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। अब शासन स्तर पर विजिलेंस की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है।

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नगर निगम हरिद्वार की ओर से वर्ष 2024 में ग्राम सराय में कूड़े के ढेर के पास अनुपयुक्त 2.3070 हेक्टेयर भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। घोटाला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो आईएएस, एक पीसीएस समेत 12 आरोपियों को निलंबित कर दिया था। मामले की विजिलेंस जांच बैठा दी गई थी। जांच का पत्र तीन जून 2025 को शासन ने निदेशक विजिलेंस को भेजा था।
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विजिलेंस ने मामले की खुली जांच पूरी कर ली है। निदेशक विजिलेंस डॉ.वी मुरुगेशन की ओर से जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। विजिलेंस ने पाया कि तहसील हरिद्वार के परवाने (वो प्रमाणपत्र जो भूमि के हस्तांतरण या बंदोबस्त की पुष्टि करता है। आवेदकों तक पहुंचाने में और धारा-143 जमींदारी विनाश अधिनियम (भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया) को तत्परता से करने में हरिद्वार तहसील के अधिकारी-कर्मचारियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई गई है। विजिलेंस ने कहा है कि धारा-143 एक रूटीन प्रक्रिया है लेकिन हरिद्वार तहसील के तत्कालीन अधिकारियों कर्मचारियों ने नियमों की अवहेलना करते हुए अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती है।

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विजिलेंस ने मामले में तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका रानी और तत्कालीन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। अब शासन स्तर पर इस जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, मामले में तीनों अफसरों के खिलाफ सरकार सख्त निर्णय ले सकती है।



एसडीएम की चल रही विभागीय जांच
प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने के आधार पर एसडीएम अजयवीर सिंह (निलंबित) के विरुद्ध उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्हें पूर्व में आरोपपत्र निर्गत करते हुए अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने 16 सितंबर को अपना लिखित जवाब देते हुए सभी आरोपों को अस्वीकार कर दिया था। मामले की जांच शासन ने अपर सचिव डॉ.आनंद श्रीवास्तव को सौंपी थी।

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