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Dehradun News: सदन में गरमाए वन्य जीव हमले, वनाग्नि व वन भूमि हस्तांतरण के मुद्दे
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- विपक्ष के साथ भाजपा विधायकों ने वन मंत्री को घेरा
- विधायक बोले वन भूमि की अनुमति न मिलने से रुके हैं विकास कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
भराड़ीसैंण। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन में वन्य जीव हमले के साथ वनाग्नि व वन भूमि हस्तांतरण के मुद्दे गरमा गए। विपक्ष के साथ ही सत्तापक्ष के विधायकों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल को घेरा। विधायकों ने कहा, वन भूमि की अनुमति न मिलने के कारण विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। जिन विकास कार्यों में वन भूमि हस्तांतरित नहीं होनी है, ऐसे मामलों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेच फंसाया जा रहा है।
सदन में भाजपा विधायक खजान दास, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, बृजभूषण गैरोला, राम सिंह कैड़ा समेत कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, हरीश धामी, विक्रम सिंह नेगी, अनुपमा रावत ने वन्य जीव हमले, वनाग्नि व वन भूमि हस्तांतरण के मामले को उठाया। विधायक चमोली ने कहा कि नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जो पुराने रास्ते थे, उन्हें बंद किया गया। मुन्ना चौहान ने कहा, वन भूमि हस्तांतरण के कारण कई विकास कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। जिन विकास कार्यों में वन भूमि हस्तांतरण नहीं होना है, उसमें भी वन विभाग की ओर से अनुमति मांगी जा रही है। वन अधिनियम में स्पष्ट है कि जब किसी काम से वन भूमि का स्वरूप बदलता है तो ऐसे काम के लिए अनुमति ली जाए। विधायक भरत चौधरी ने कहा, वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति नहीं मिल रही है। विधायक आशा नौटियाल ने कहा, पर्यटन स्थल चोपता में देश विदेश से पर्यटक आते हैं। लेकिन वन अधिनियम एक्ट के चलते वहां पर कोई सुविधाएं नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधायकों के सवालों को सही मानते हुए वन मंत्री को वन भूमि हस्तांतरण के मामले में विभागीय अधिकारियों से बैठक कर परीक्षण कराया जाए।
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- विधायक बोले वन भूमि की अनुमति न मिलने से रुके हैं विकास कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
भराड़ीसैंण। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन में वन्य जीव हमले के साथ वनाग्नि व वन भूमि हस्तांतरण के मुद्दे गरमा गए। विपक्ष के साथ ही सत्तापक्ष के विधायकों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल को घेरा। विधायकों ने कहा, वन भूमि की अनुमति न मिलने के कारण विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। जिन विकास कार्यों में वन भूमि हस्तांतरित नहीं होनी है, ऐसे मामलों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेच फंसाया जा रहा है।
सदन में भाजपा विधायक खजान दास, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, बृजभूषण गैरोला, राम सिंह कैड़ा समेत कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, हरीश धामी, विक्रम सिंह नेगी, अनुपमा रावत ने वन्य जीव हमले, वनाग्नि व वन भूमि हस्तांतरण के मामले को उठाया। विधायक चमोली ने कहा कि नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जो पुराने रास्ते थे, उन्हें बंद किया गया। मुन्ना चौहान ने कहा, वन भूमि हस्तांतरण के कारण कई विकास कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। जिन विकास कार्यों में वन भूमि हस्तांतरण नहीं होना है, उसमें भी वन विभाग की ओर से अनुमति मांगी जा रही है। वन अधिनियम में स्पष्ट है कि जब किसी काम से वन भूमि का स्वरूप बदलता है तो ऐसे काम के लिए अनुमति ली जाए। विधायक भरत चौधरी ने कहा, वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति नहीं मिल रही है। विधायक आशा नौटियाल ने कहा, पर्यटन स्थल चोपता में देश विदेश से पर्यटक आते हैं। लेकिन वन अधिनियम एक्ट के चलते वहां पर कोई सुविधाएं नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधायकों के सवालों को सही मानते हुए वन मंत्री को वन भूमि हस्तांतरण के मामले में विभागीय अधिकारियों से बैठक कर परीक्षण कराया जाए।
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