विश्व किडनी दिवस: गुर्दे के मरीजों की उम्मीद किडनी प्रत्यारोपण, जागरूकता से मरीजों को मिल सकता है जीवनदान
किडनी प्रत्यारोपण गुर्दे के मरीजों की उम्मीद है। समय पर उपचार और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से हजारों मरीजों को जीवनदान मिल सकता है।
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आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने गंभीर बीमारियों के इलाज में कई नई संभावनाएं विकसित की हैं। जिनमें किडनी प्रत्यारोपण भी शामिल है। जो उन मरीजों के लिए जीवन की एक उम्मीद बनकर सामने आती है जिनके गुर्दे स्थायी रूप से काम करना बंद कर चुके होते हैं। एम्स के किडनी रोग विशेषज्ञों के अनुसार समय पर उपचार और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से हजारों मरीजों को जीवनदान मिल सकता है।
एम्स के किडनी रोग विभाग की एसोसिएट प्रो. (डॉ.) शेरोन कंडारी बताती हैं कि मानव शरीर में गुर्दे अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। ये रक्त को साफ करने, शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, रक्तचाप को नियंत्रित रखने तथा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने का कार्य करते हैं।
जब किसी कारणवश गुर्दों की कार्यक्षमता 10 से 15 प्रतिशत से कम रह जाती है, तब मरीज को डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस एक अस्थायी उपचार है, जबकि गुर्दा प्रत्यारोपण को गुर्दा विफलता का सबसे प्रभावी और स्थायी उपचार माना जाता है। सफल प्रत्यारोपण के बाद मरीज सामान्य जीवन के काफी करीब जीवन जी सकता है और उसकी जीवन गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।
तीन से चार घंटे की होती है सर्जरी
किडनी प्रत्यारोपण से पहले मरीज और दाता दोनों की विस्तृत चिकित्सा जांच की जाती है। सर्जरी के दौरान दाता का गुर्दा निकालकर मरीज के शरीर के निचले पेट के हिस्से में लगाया जाता है। सामान्यतः पुराने गुर्दों को नहीं निकाला जाता। यह पूरी सर्जरी लगभग तीन से चार घंटे तक चल सकती है। सामान्यत: ऑपरेशन के एक सप्ताह के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
शनिवार को छोड़ हर दिन होता है पंजीकरण
डॉ. शेरोन कंडारी ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए एम्स के गुर्दारोग विभाग में पंजीकरण किया जाता है। यह सुविधा शनिवार को छोड़ कर हर कार्य दिवस पर उपलब्ध है। एम्स के गुर्दारोग विभाग में प्रत्यारोपण की ओपीडी सप्ताह में तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बृहस्पतिवार को होती है। पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज, जैसे पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, मेडिकल रिकॉर्ड और डोनर का विवरण, अस्पताल में जमा करना होगा। यदि जीवित दाता नहीं है, तो मृत दाता के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल होने हेतु सरकारी पोर्टल या अस्पताल के माध्यम से पंजीकरण कराएं।
22 लोगों में किडनी प्रत्यारोपण, 111 प्रतीक्षा में
एम्स को रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन से आठ जनवरी 2021 को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मिली थी। अप्रैल 2023 में यहां पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट की गई। डॉ. कंडारी ने बताया कि अब तक 22 मरीजों में किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है। 111 मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रक्रिया गतिमान है। इन सभी के पास अंगदाता हैं। वहीं 50 मरीज मृतदाता (कैडेवर) की प्रतीक्षा में हैं।
अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी
भारत में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी होने के कारण जरूरतमंद मरीजों को अंगदाता नहीं मिल पाते हैं। स्थिति यह है कि मात्र 10 फीसदी जरूरतमंदों को ही किडनी उपलब्ध होती हैं। शेष 90 प्रतिशत लोग ट्रांसप्लांट से वंचित रह जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक आदि का मानना है कि अंगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे बच्चे बचपन से ही अंगदान के प्रति जागरूक हों। आंकड़ों के अनुसार स्पेन में मस्तिष्क मृत रोगियों से अंगदान की दर विश्व में सबसे अधिक है, जो प्रति दस लाख जनसंख्या पर 33 है। भारत में वर्तमान अंगदान दर प्रति दस लाख पर 0.05 है (लगभग 50 मृत शरीर दाता प्रति वर्ष)।