{"_id":"69c45317974b2e60d0061df5","slug":"molecular-diagnostics-is-an-important-part-of-modern-medicine-prof-himanshu-vikas-nagar-news-c-38-1-sdrn1027-139391-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा : प्रो. हिमांशु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा : प्रो. हिमांशु
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन डीएनए लैब्स की उपनिदेशक डॉ. अंकिता सिंह ने जीनोमिक्स का परिचय और प्रकार, संरचना एवं कार्य, मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स की मूल अवधारणाएं, प्रयोगशाला सुरक्षा, डीएनए तकनीक आदि की विस्तृत जानकारी दी।
रासबिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. हिमांशु ऐरन ने कहा कि मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जीन स्तर पर रोगों की पहचान करके सटीक उपचार में मदद करता है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की वैज्ञानिक डॉ अवतार कौर सिंधू ने कहा कि यह कार्यशाला वैज्ञानिक अनुसंधान एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई। प्रतिभागियों को स्वरोजगार के अवसर ढूंढ कर इस क्षेत्र में अपना रोजगार के लिए कदम उठाना चाहिए। डीएनए लैब्स के प्रबंध निदेशक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने कहा कि विकसित भारत के अभियान के तहत छात्र-छात्राओं को नौकरी लेने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनना होगा, तभी 2047 में हमारा देश विकसित कहलाएगा। कार्यशाला में विज्ञान व चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले करीब 26 शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में पोस्टर और मौखिक प्रस्तुतिकरण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया। प्रो. हिमांशु ऐरन को चिकित्सा जगत में उत्कृष्ट कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
Trending Videos
ऋषिकेश। श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन डीएनए लैब्स की उपनिदेशक डॉ. अंकिता सिंह ने जीनोमिक्स का परिचय और प्रकार, संरचना एवं कार्य, मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स की मूल अवधारणाएं, प्रयोगशाला सुरक्षा, डीएनए तकनीक आदि की विस्तृत जानकारी दी।
रासबिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. हिमांशु ऐरन ने कहा कि मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जीन स्तर पर रोगों की पहचान करके सटीक उपचार में मदद करता है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की वैज्ञानिक डॉ अवतार कौर सिंधू ने कहा कि यह कार्यशाला वैज्ञानिक अनुसंधान एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई। प्रतिभागियों को स्वरोजगार के अवसर ढूंढ कर इस क्षेत्र में अपना रोजगार के लिए कदम उठाना चाहिए। डीएनए लैब्स के प्रबंध निदेशक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने कहा कि विकसित भारत के अभियान के तहत छात्र-छात्राओं को नौकरी लेने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनना होगा, तभी 2047 में हमारा देश विकसित कहलाएगा। कार्यशाला में विज्ञान व चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले करीब 26 शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में पोस्टर और मौखिक प्रस्तुतिकरण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया। प्रो. हिमांशु ऐरन को चिकित्सा जगत में उत्कृष्ट कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन