सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Multi cell box culvert bridge will be constructed over the Kheerganga in Dharali Uttarkashi

Uttarkashi: धराली में कहर बरपाने वाली खीर गंगा पर बनेगा मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल,15 वर्ष के इतिहास का अध्ययन

विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Fri, 10 Apr 2026 11:44 AM IST
विज्ञापन
सार

धराली में खीर गंगा पर मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल बनेगा। मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल का निर्माण अधिकांश नदी, नालों पर किया जाता है।

Multi cell box culvert bridge will be constructed over the Kheerganga in Dharali Uttarkashi
भूमि सीमा का निरीक्षण करते राजस्व व बीआरओ की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार

गत वर्ष अगस्त माह में धराली में कहर बरपाने वाली खीर गंगा नदी पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल का निर्माण किया जाएगा। 40 मीटर लंबे स्पान के पुल के लिए बीआरओ 24 मीटर भूमि अधिग्रहित करेगा। इसके लिए बीआरओ ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया।

Trending Videos


गत वर्ष धराली में पांच अगस्त को खीर गंगा में पानी और मलबे के साथ आई विनाशकारी आपदा में भवनों और होटलों के साथ गंगोत्री हाईवे भी करीब 25 फीट मलबे में दब गया था। उसके बाद बीआरओ की ने मलबे को काटकर कच्ची सड़क बनाकर आवाजाही शुरू करवाई थी। लेकिन बरसात में दोबारा खीर गंगा के उफान पर आने पर सड़क बहने का खतरा बना हुआ है। इसलिए वहां पर आवाजाही को सुचारू रखने के लिए मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल का निर्माण किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके लिए मंगलवार को बीआरओ और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने वहां भूमि सीमांकन आदि प्रक्रिया के तहत ग्रामीणों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। बीआरओ के कमांडर राजकिशोर ने बताया कि धराली में आल वेदर रोड के तहत पहले ही 12 मीटर भूमि अधिग्रहण का सर्वे हो चुका है। अब पुल निर्माण के लिए 12 मीटर अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके लिए जल्द ग्रामीणों के साथ बैठक की जाएगी।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: डॉलर की वजह से महंगा हो गया सोलर, आयोग ने इस वित्तीय वर्ष के लिए जारी किया ड्राफ्ट, मांगे सुझाव

 

क्या होता है मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल
मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट पुल का निर्माण अधिकांश नदी, नालों पर किया जाता है। इसके लिए निर्माणदायी संस्था पहले उस नदी का 15 वर्ष के इतिहास की अध्ययन करती है कि उस नदी ओर नाले का जलस्तर कितना घटता बढ़ता है। उसके बाद डिजाइन तैयार किया जाता है। इसमें नदी के बीच में मोटे-मोटे पिलर तैयार कर पुल निर्माण किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed