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एनटीए अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल: डॉ. सुनील
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निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल बताया। उन्होंने कहा कि जब से देश में विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की जिम्मेदारी एनटीए को सौंपी गई है, तब से एजेंसी की लापरवाही की वजह से छात्र लगातार परेशान हो रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पहले नीट परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आईं और अब हर वर्ष सीयूईटी परीक्षा के दौरान छात्रों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एनटीए असफलता का पर्याय बन चुकी है। बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही मांग की गई है कि सीयूईटी परीक्षा अब औचित्यहीन हो चुकी है और स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश पहले की तरह मेरिट के आधार पर दिए जाने चाहिए। मेरिट आधारित प्रवेश प्रणाली में छात्रों का मूल्यांकन उनकी पूर्व परीक्षाओं के आधार पर होता है, जबकि प्रवेश परीक्षाएं लगातार मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं। कहा कि सीयूईटी के बाद भी कई संस्थानों में सीटें खाली रह जाती हैं, जिन्हें बाद में मेरिट के आधार पर ही भरा जाता है। इससे स्पष्ट है कि सीयूईटी छात्रों के समय और धन दोनों की बर्बादी कर रही है।
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डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पहले नीट परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आईं और अब हर वर्ष सीयूईटी परीक्षा के दौरान छात्रों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एनटीए असफलता का पर्याय बन चुकी है। बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही मांग की गई है कि सीयूईटी परीक्षा अब औचित्यहीन हो चुकी है और स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश पहले की तरह मेरिट के आधार पर दिए जाने चाहिए। मेरिट आधारित प्रवेश प्रणाली में छात्रों का मूल्यांकन उनकी पूर्व परीक्षाओं के आधार पर होता है, जबकि प्रवेश परीक्षाएं लगातार मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं। कहा कि सीयूईटी के बाद भी कई संस्थानों में सीटें खाली रह जाती हैं, जिन्हें बाद में मेरिट के आधार पर ही भरा जाता है। इससे स्पष्ट है कि सीयूईटी छात्रों के समय और धन दोनों की बर्बादी कर रही है।
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