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पेपर लीक : सूचना से गिरफ्तारी तक मिला सुबूत हटाने का पर्याप्त समय
Sun, 26 Jul 2026 02:41 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sun, 26 Jul 2026 02:41 AM IST
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उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के पेपर लीक मामले में जांच अब डिजिटल साक्ष्यों पर टिक गई है। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करने की है। माना जा रहा है कि गुमनाम ईमेल मिलने और गिरफ्तारी के बीच करीब 15 दिन का समय मिलने से आरोपी को संभावित डिजिटल साक्ष्य हटाने का मौका मिल गया।
विश्वविद्यालय को आठ जुलाई को एक गुमनाम ईमेल मिला था, जिसमें परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा। हालांकि सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता की गिरफ्तारी करीब 15 दिन बाद हुई। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान यदि किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से चैट, ईमेल, दस्तावेज या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड हटाए गए हैं तो उन्हें वापस हासिल करना आसान नहीं होगा।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि प्रश्नपत्र किन माध्यमों से साझा किए गए, किन-किन लोगों से संपर्क हुआ और क्या डिलीट किए गए डाटा में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मौजूद हैं। जांच टीम का मानना है कि डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल डिटेल, ईमेल, क्लाउड बैकअप और मैसेजिंग एप के रिकॉर्ड इस मामले की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि डिलीट डाटा सफलतापूर्वक रिकवर हो जाता है तो पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का भी खुलासा हो सकता है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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विश्वविद्यालय को आठ जुलाई को एक गुमनाम ईमेल मिला था, जिसमें परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा। हालांकि सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता की गिरफ्तारी करीब 15 दिन बाद हुई। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान यदि किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से चैट, ईमेल, दस्तावेज या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड हटाए गए हैं तो उन्हें वापस हासिल करना आसान नहीं होगा।
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सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि प्रश्नपत्र किन माध्यमों से साझा किए गए, किन-किन लोगों से संपर्क हुआ और क्या डिलीट किए गए डाटा में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मौजूद हैं। जांच टीम का मानना है कि डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल डिटेल, ईमेल, क्लाउड बैकअप और मैसेजिंग एप के रिकॉर्ड इस मामले की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि डिलीट डाटा सफलतापूर्वक रिकवर हो जाता है तो पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का भी खुलासा हो सकता है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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