उत्तराखंड राजनीति: दो बार के विधायक खजान दास के सामने अपनों की चुनौती, इस बार पार्टी के ही कई नेता उम्मीदवार
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजपुर रोड सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। लगातार दो चुनाव जीत चुके भाजपा विधायक खजान दास के बीच पार्टी के ही कई नेताओं की दावेदारी चर्चा में है। वहीं, कांग्रेस भी पिछले चुनावों में बढ़े हार के अंतर के बीच वापसी की चुनौती से जूझ रही है।
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राजधानी की राजपुर रोड विधानसभा में वैसे तो भाजपा के वर्तमान मंत्री खजान दास लगातार दो बार के विधायक हैं लेकिन इस बीच पार्टी के ही कई वरिष्ठ नेताओं में यहां दावेदारी की होड़ है। इतिहास के आइने से देखें तो राज्य गठन के बाद से अब तक हुए पांच चुनावों में यहां तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।
कांग्रेस इस सीट से 10 साल से दूर है। 2007 के विधायक राजकुमार चुनौती तो दे रहे हैं लेकिन चुनाव दर चुनाव उनकी हार का अंतर बढ़ता जा रहा है। 2017 में खजान दास ने उन्हें 8632 वोटों से हराया था तो 2022 में ये अंतर बढ़कर 11,163 पर पहुंच गया।इस बार खजान दास की मजबूत दावेदारी के बीच पार्टी के कई नेताओं के यहां से तैयारी की चर्चाएं हैं।
इनमें 2012 में भाजपा के टिकट से चुनाव हारे रविंद्र कटारिया को फिर उम्मीद है कि पार्टी उन पर भरोसा जताएगी। वहीं, पूर्व डिप्टी मेयर बबीता सहोत्रा और राष्ट्रीय सफाई आयोग के हाल में अध्यक्ष चुने गए भगवत प्रसाद मकवाना के नाम भी प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी का रुख समय आने पर पता चलेगा।
किस चुनाव में कितने वोटों से हुई हार जीत
2002 : कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट ने भाजपा के खुशाल सिंह रानावत को 2779 मतों के अंतर से हराया।
2007 : भाजपा के गणेश जोशी ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट को 3570 मतों के अंतर से हराया।
2012 : कांग्रेस के राजकुमार ने भाजपा के रविंद्र कटारिया को 3070 मतों के अंतर से हराया।
2017 : भाजपा के खजान दास ने कांग्रेस के राजकुमार को 8632 मतों से हराया।
2022 : भाजपा के खजान दास ने कांग्रेस के राजकुमार को 11,163 मतों से हराया।
2022 के चुनाव में क्या हुआ
| कुल मतदाता | 1,19,615 |
| कुल मतदान | 68,439 |
| भाजपा को मिले | 37,027 |
| कांग्रेस को मिले | 25,864 |
| हार-जीत का अंतर | 11,163 |
यह भी जानें : इस सीट पर 2022 के चुनाव में 12 प्रत्याशियों ने नामांकन किया। तीन ने अपना नाम वापस ले लिया था। मैदान में नौ प्रत्याशी थे, जिनमें से भाजपा-कांग्रेस को छोड़कर सात प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।