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परियोजना के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी कराया जाए : सीएस
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- मुख्य सचिव ने सारा की उच्चाधिकार समिति की बैठक में दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि परियोजना के लागू होने के बाद उसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी किया जाए। इसके लिए आईआईटी रुड़की जैसी तकनीकी संस्थाओं के सहयोग पर विचार किया जाए।
मुख्य सचिव ने स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में सौंग नदी से जुड़े क्षेत्रों का विस्तृत चिह्नीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिह्नित क्षेत्रों के अनुसार आवश्यक कार्यों का निर्धारण कर संबंधित कार्यदायी संस्था के माध्यम से उसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कराई जाए। उन्होंने कहा कि सारा की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएं तथा वाटर रिचार्ज, वनीकरण और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों की गति तेज की जाए। सीएस ने कहा कि वन क्षेत्रों में कैंपा फंड के माध्यम जल संरक्षण से जुड़े संबंधित कार्यों को करें। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, सी रविशंकर आदि मौजूद थे।
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देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि परियोजना के लागू होने के बाद उसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी किया जाए। इसके लिए आईआईटी रुड़की जैसी तकनीकी संस्थाओं के सहयोग पर विचार किया जाए।
मुख्य सचिव ने स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में सौंग नदी से जुड़े क्षेत्रों का विस्तृत चिह्नीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिह्नित क्षेत्रों के अनुसार आवश्यक कार्यों का निर्धारण कर संबंधित कार्यदायी संस्था के माध्यम से उसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कराई जाए। उन्होंने कहा कि सारा की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएं तथा वाटर रिचार्ज, वनीकरण और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों की गति तेज की जाए। सीएस ने कहा कि वन क्षेत्रों में कैंपा फंड के माध्यम जल संरक्षण से जुड़े संबंधित कार्यों को करें। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, सी रविशंकर आदि मौजूद थे।
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