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Devprayag News: सूटकेस हत्याकांड; लिव-इन पार्टनर की हत्या के दोषी को उम्रकैद, मददगार को पांच साल की जेल

संवाद न्यूज एजेंसी, देवप्रयाग Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 19 Feb 2026 02:32 PM IST
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सार

लिव-इन पार्टनर की हत्या के दोषी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि साक्ष्य मिटाने वाली मददगार को पांच साल की जेल मिली।

Suitcase murder case Man sentenced to life imprisonment for killing live-in partner Devprayag News
कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

सिडकुल क्षेत्र के शिवनगर कॉलोनी में करीब चार साल पहले हुए सनसनीखेज सूटकेस हत्याकांड में अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी रोहित को अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या का दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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वहीं, इस जघन्य वारदात में साक्ष्य छिपाने और अपराधी की मदद करने के जुर्म में सह-अभियुक्ता मंजू को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। यह खौफनाक वारदात मई 2020 की है, जब पूरा देश कोरोना से जूझ रहा था। सिडकुल की एक फैक्ट्री में काम करने वाला रोहित अपनी लिव-इन पार्टनर सोनम उर्फ वर्षा के साथ शिवनगर कॉलोनी में रह रहा था।
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रोहित के दोनों ही युवतियों के साथ थे संबंध
इसी मकान में मंजू नाम की महिला भी किराये पर रहती थी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि रोहित का इन दोनों ही युवतियों के साथ संबंध था, जिसे लेकर घर में अक्सर कलह और विवाद की स्थिति बनी रहती थी।

इसी त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग और मानसिक तनाव के चलते 24 मई 2020 की रात रोहित ने मंजू के साथ मिलकर सोनम की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने की नीयत से उसे एक सूटकेस में बंद कर बाथरूम में छिपा दिया था, जिसे पुलिस ने सूचना मिलने पर बरामद किया।

अलग-अलग टीमें गठित कर लगातार दबिश दी गई
इस पेचीदा मामले की गुत्थी सुलझाने में तत्कालीन सिडकुल थाना प्रभारी और वर्तमान में हिंडोलाखाल थानाध्यक्ष लखपत सिंह बुटोला की कार्यकुशलता निर्णायक साबित हुई। उस चुनौतीपूर्ण समय में लखपत बुटोला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को बड़ी बारीकी से जोड़ा।

थानाध्यक्ष लखपत बुटोला ने बताया कि उस समय आरोपियों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि परिस्थितियां विपरीत थीं। लेकिन टीम ने हार नहीं मानी और अलग-अलग टीमें गठित कर लगातार दबिश दी गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी रोहित की लोकेशन ट्रेस कर उसे उत्तर प्रदेश के कौशांबी से गिरफ्तार किया गया, जबकि सह-अभियुक्ता मंजू को डेंसो चौक के पास से पहले ही दबोच लिया गया था।

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न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों को पेश कर अपराध की गंभीरता को सिद्ध किया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परीक्षण करने के बाद यह माना कि रोहित ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य मिटाने का भी कुत्सित प्रयास किया। पुलिस की तत्परता और सटीक चार्जशीट के कारण ही आज पीड़िता को न्याय मिल सका है। अदालत के इस फैसले को समाज में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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