{"_id":"69d2d1f89ddc52c22f0df645","slug":"underpasses-for-wildlife-will-also-be-constructed-on-the-rishikesh-bypass-dehradun-news-c-5-hld1006-938820-2026-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: ऋषिकेश बाईपास में भी बनेंगे\nवन्यजीवों के लिए अंडरपास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: ऋषिकेश बाईपास में भी बनेंगे वन्यजीवों के लिए अंडरपास
विज्ञापन
विज्ञापन
पहले चरण में 12.67 किमी योजना पर काम होगा शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऋषिकेश में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित बाईपास परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। खास बात यह है कि इस परियोजना में भी देहरादून-दिल्ली मार्ग की तरह वन्यजीवों का ख्याल रखा जाएगा। इसमें हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए दो अंडरपास बनाए जाएंगे।
ऋषिकेश बाईपास के लिए नया एलाइनमेंट तय किया गया है। इसके तहत मार्ग तीनपानी-भट्टोवाला-योगनगरी रेलवे स्टेशन होते हुए खारा स्र्रोत (12.67 किमी) के पास पहुंचेगा। खारा स्रोत के आगे ब्रह्मपुरी तक टनल का निर्माण किया जाएगा। पहले चरण में तीनपानी-खारा स्र्रोत तक सड़क का निर्माण कार्य होगा। इस मार्ग का अधिकांश हिस्सा देहरादून वन प्रभाग के ऋषिकेश रेंज के जंगल के किनारे से होकर गुजरेगा। जिन क्षेत्रों में वन्यजीवों का आवागमन अधिक है, वहां दो अंडरपास बनाए जाएंगे। इसमें ऊपर सड़क होगी और नीचे वन्यजीवों का मूवमेंट आसानी से हो सकेगा। पहला अंडरपास तीनपानी से कुछ दूरी पर और दूसरा आरवीएनएल पोर्टल के पास बनेगा। दोनों अंडरपास की कुल लंबाई करीब पांच किमी होगी।
-- -
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने किया अध्ययन
देहरादून वन प्रभाग के डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि बाइपास योजना के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान से अध्ययन कराया गया था। उन्होंने वन्यजीवों के दृष्टिगत अंडरपास बनाने का सुझाव दिया था। इससे वन्यजीवों का मूवमेंट प्रभावित नहीं होगा। वहीं, इस परियोजना के तहत एनएच ने 46 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
-- -- --
पुल से लेकर रेलवे ओवर ब्रिज भी बनेंगे
राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य अभियंता मुकेश तोमर ने बताया कि पहले चरण में 12.67 किमी पर कार्य होगा। योजना के तहत छह पुल, चार छोटे पुल और एक आरओबी बनेगा। 80 मीटर मार्ग भूमिगत भी होगा। अधिकांश मार्ग का हिस्सा जंगल के बाहर से जा रहा है।
-- -- -- -- -
एक दशक से पुरानी योजना
ऋषिकेश बाईपास की एक दशक पुरानी योजना है। पहली योजना 17 किमी थी, इसमें नेपाली फार्म-नटराज चौक होते हुए ढालवाला तक एलिवेटेड सड़क की योजना थी। ढालवाला से ब्रह्मपुरी तक टनल बननी थी। योजना की लागत 1550 करोड़ तक पहुंच गई थी। जबकि नई योजना में 1105 करोड़ का खर्च आएगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
2029 तक बाईपास तैयार करने का लक्ष्य
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बताया कि बाईपास शहर के भीतर लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान प्रस्तुत करेगा। इसमें लगभग पांच किमी का एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इसके निर्माण से ऋषिकेश में यातायात सुगम होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा और यात्रा समय में कमी होगी। इससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ समन्वय में पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विकसित की जा रही है। इस वर्ष फोरलेन बाईपास का निर्माण कार्य शुरू कर वर्ष-2029 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऋषिकेश में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित बाईपास परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। खास बात यह है कि इस परियोजना में भी देहरादून-दिल्ली मार्ग की तरह वन्यजीवों का ख्याल रखा जाएगा। इसमें हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए दो अंडरपास बनाए जाएंगे।
ऋषिकेश बाईपास के लिए नया एलाइनमेंट तय किया गया है। इसके तहत मार्ग तीनपानी-भट्टोवाला-योगनगरी रेलवे स्टेशन होते हुए खारा स्र्रोत (12.67 किमी) के पास पहुंचेगा। खारा स्रोत के आगे ब्रह्मपुरी तक टनल का निर्माण किया जाएगा। पहले चरण में तीनपानी-खारा स्र्रोत तक सड़क का निर्माण कार्य होगा। इस मार्ग का अधिकांश हिस्सा देहरादून वन प्रभाग के ऋषिकेश रेंज के जंगल के किनारे से होकर गुजरेगा। जिन क्षेत्रों में वन्यजीवों का आवागमन अधिक है, वहां दो अंडरपास बनाए जाएंगे। इसमें ऊपर सड़क होगी और नीचे वन्यजीवों का मूवमेंट आसानी से हो सकेगा। पहला अंडरपास तीनपानी से कुछ दूरी पर और दूसरा आरवीएनएल पोर्टल के पास बनेगा। दोनों अंडरपास की कुल लंबाई करीब पांच किमी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने किया अध्ययन
देहरादून वन प्रभाग के डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि बाइपास योजना के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान से अध्ययन कराया गया था। उन्होंने वन्यजीवों के दृष्टिगत अंडरपास बनाने का सुझाव दिया था। इससे वन्यजीवों का मूवमेंट प्रभावित नहीं होगा। वहीं, इस परियोजना के तहत एनएच ने 46 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुल से लेकर रेलवे ओवर ब्रिज भी बनेंगे
राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य अभियंता मुकेश तोमर ने बताया कि पहले चरण में 12.67 किमी पर कार्य होगा। योजना के तहत छह पुल, चार छोटे पुल और एक आरओबी बनेगा। 80 मीटर मार्ग भूमिगत भी होगा। अधिकांश मार्ग का हिस्सा जंगल के बाहर से जा रहा है।
एक दशक से पुरानी योजना
ऋषिकेश बाईपास की एक दशक पुरानी योजना है। पहली योजना 17 किमी थी, इसमें नेपाली फार्म-नटराज चौक होते हुए ढालवाला तक एलिवेटेड सड़क की योजना थी। ढालवाला से ब्रह्मपुरी तक टनल बननी थी। योजना की लागत 1550 करोड़ तक पहुंच गई थी। जबकि नई योजना में 1105 करोड़ का खर्च आएगा।
2029 तक बाईपास तैयार करने का लक्ष्य
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बताया कि बाईपास शहर के भीतर लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान प्रस्तुत करेगा। इसमें लगभग पांच किमी का एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इसके निर्माण से ऋषिकेश में यातायात सुगम होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा और यात्रा समय में कमी होगी। इससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ समन्वय में पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विकसित की जा रही है। इस वर्ष फोरलेन बाईपास का निर्माण कार्य शुरू कर वर्ष-2029 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।