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Uttarakhand: प्रदेश में लखपति दीदी का आंकड़ा तीन लाख पार; इस वर्ष 1.12 लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य

Thu, 13 Aug 2026 04:33 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Thu, 13 Aug 2026 04:33 PM IST
सार

धामी सरकार नें उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नारी सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं।

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Uttarakhand News Number of Lakhpati Didis crosses the 3 lakh mark Now
लखपति दीदी योजना - फोटो : AI Generated

विस्तार

उत्तराखंड में लखपति दीदियों की संख्या तीन लाख तीन हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक लाख 12 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को निर्धारित किया गया है।

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धामी सरकार नें उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नारी सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। इसी के तहत नवंबर 2022 से लखपति दीदी योजना शुरू की गई है। धामी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों से यह योजना साल दर साल नया रिकॉर्ड कायम कर रही है।
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जो भी सालाना लक्ष्य रखा गया, निर्धारित अवधि से पहले ही हासिल कर लिया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक तीन लाख तीन हजार 696 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंचाकर आत्मनिर्भरता की शानदार मिसाल पेश की है।
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लखपति दीदी के मुख्य व्यवसाय
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं प्रदेश सरकार की अनुदानित एवं ऋण योजनाओं के माध्यम से विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से अपनी आर्थिकी को मजबूती दे रही हैं। खास तौर पर जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेरी-पशुपालन, मौन पालन, मशरूम उत्पादन, होमस्टे संचालन जैसे व्यवसायों को महिलाओं ने अपनाया है। मिलेट से तैयार बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएं यह उत्पाद भी तैयार कर रही हैं।

बाजारों तक आसान बनाई पहुंच
स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रोसेसिंग, बिक्री और बाजारों तक आसान पहुंच के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष व्यवस्था बनाई है। इसके लिए 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है।

स्थानीय उत्पादों को मिली विशेष पहचान
धामी सरकार की पहल पर "हाउस ऑफ हिमालयाज" ब्रांड ने महिला स्वयं सहायता समूहों  और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में सुधार होने से महानगरों और प्रमुख शहरों में इन उत्पादों की मांग बढ़ी है।

5.19 लाख से अधिक महिलाएं संगठित
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य लगातार जारी है। प्रदेश के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लाकों में कुल 5,19,943 महिलाओं को संगठित कर 70,767 समूह, 8179 ग्राम संगठन और 615 कलस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) तैयार किए गए हैं।

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