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उत्तराखंड: भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने दाखिल किया नामांकन, सीएम धामी की मौजूदगी में सौंपा पत्र

Tue, 06 Oct 2026 11:38 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 06 Oct 2026 11:38 AM IST
सार

राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने आज अपना नामांकन कर दिया है। 

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Uttarakhand rajya sabha election 2026 BJP dinesh arya as candidate Nomination Filed Today read All Updates
नामांकन के लिए पहुंचे भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने मंगलवार को विधानसभा में विधिवत अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव हेमचंद पंत को नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।

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नामांकन के लिए दिनेश आर्य मुख्यमंत्री धामी के साथ विधानसभा पहुंचे। विधानसभा परिसर में भाजपा के कई सांसद और विधायक भी इस दौरान मौजूद रहे। राज्य के सभी वर्गों और भाजपा कार्यकर्ताओं में इस निर्णय से उत्साह का माहौल है।

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मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि आर्य, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। हमारे जिलाध्यक्ष रहे हैं। संगठन में बहुत लंबे समय से शानदार काम रहे हैं। उन्होंने नेतृत्व के निर्णय को बहुत अच्छा और कार्यकर्ताओं के मन का बताते हुए कहा कि समूचे राज्य, खास तौर पर पूरे कुमाऊं क्षेत्र में पार्टी की मजबूती में उनका बहुत बड़ा योगदान है। निश्चित रूप से दिनेश आर्य का राज्यसभा में जाना बीजेपी और प्रदेश की जनता के लिए बहुत लाभकारी रहने वाला है।


कुमाऊं को 12 साल बाद राज्यसभा में मिली जगह

राजनीति में कुछ फैसले सिर्फ एक संदेश नहीं देते बल्कि उनके कई राजनीतिक निहितार्थ होते हैं। भाजपा ने उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए हल्द्वानी के दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाकर ऐसां ही फैसला किया है। पार्टी ने लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता को संसद के उच्च सदन में भेजने का जहां संदेश दिया है, वहीं करीब 12 साल बाद कुमाऊं से भाजपा के किसी नेता को राज्यसभा भेजकर क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास भी किया है। मौजूदा समय में उत्तराखंड कोटे की तीनों राज्यसभा सीटों पर गढ़वाल से जुड़े नेताओं का प्रतिनिधित्व है।

ये भी पढे़ं...उत्तराखंड: सैलजा के बाद हरीश रावत पर वेणुगोपाल 'सख्त', कहा- व्यक्तिगत अभियान को पार्टी स्वीकार नहीं करेगी

पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी नवंबर 2008 में उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और मई 2014 - तक उच्च सदन के सदस्य रहे। हालांकि कांग्रेस की ओर से कुमाऊं के महेंद्र सिंह माहरा 2012 से 2018 और प्रदीप टम्टा 2016 से 2022 तक राज्यसभा सदस्य रहे। भाजपा की बात करें तो मौजूदा राज्यसभा सदस्यों नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट और कल्पना सैनी की राजनीतिक पृष्ठभूमि गढ़वाल से जुड़ी है। नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है और इसी सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। दोनों मंडलों के बीच क्षेत्रीय संतुलन साधने के इस फैसले का एक दूसरा राजनीतिक संदर्भ भी है। हल्द्वानी में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर भाजपा विपक्ष के निशाने पर रही थी।

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खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया

खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और इसे अपनी पिछड़ा समाज से होने की पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाए। ऐसे में हल्द्वानी के अनुसूचित जाति के चेहरे दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया जाना उस विवाद के बाद भाजपा के लिए एक अलग राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर आर्य की उम्मीदवारी को खरगे प्रकरण से नहीं जोड़ा है।

इसलिए इसे सीधे उस विवाद की प्रतिक्रिया के बजाय पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के व्यापक समीकरण से जोड़कर देखना अधिक उचित होगा। दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को केवल जातीय समीकरण के नजरिए से देखना भी पर्याप्त नहीं होगा। वह लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह नैनीताल जिला भाजपा अध्यक्षरह चुके हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वर्तमान में वह दायित्वधारी हैं। 2017 और 2022 में वह नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के दावेदार रहे। इस बार भी उन्हें प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था लेकिन राज्यसभा भेजकर पार्टी ने विधानसभा टिकट की संभावित दावेदारी के साथ ही उससे बनने वाले गुटीय समीकरणों की संभावना पर भी विराम लगा दिया है

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