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उत्तराखंड: मसूरी में बर्फ से ढकी पहाड़ियां देखने उमड़े पर्यटक, चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात सुचारू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 29 Oct 2021 12:57 PM IST
सार

मौसम साफ है और चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात सुचारू है। हालांकि ठंड बढ़ने के कारण यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है।

बर्फ से ढकी हिमालय की पहाड़ियां
बर्फ से ढकी हिमालय की पहाड़ियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राज्य के अधिकतर इलाकों में शुक्रवार को फिलहाल मौसम साफ बना हुआ है। राजधानी देहरादून में चटख धूप खिली हुई है। वहीं चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात सुचारू है। हालांकि ठंड बढ़ने के कारण यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है।



बर्फ से ढकी पहाड़ियां देखने उमड़ रहे पर्यटक
वहीं पहाड़ों की रानी मसूरी में इन दिनों मौसम साफ होने से बर्फ से ढकी हिमालय की पहाड़ियां साफ दिखाई दे रही हैं। हिमालय का गनहिल, लालटिब्बा क्षेत्र से हिमालय की पहाड़ियों की खूबसूरती का दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मसूरी पहुंच रहे हैं।


हिमालय का इतना मोहक नजारा कभी नहीं देखा

लालटिब्बा घूमने पहुंचे दिल्ली के पर्यटक मानसी ने बताया कि हिमालय का इतना मोहक नजारा कभी नहीं देखा था। लालटिब्बा से ऐसा लगा कि जैसे हिमालय हमारे पास ही है। दिल्ली के पर्यटक रणदीप सिंह कहते हैं कि हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियों को देखकर मन खुश हो गया है। 

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चारधाम यात्रा जारी 

चारधाम यात्रा शुक्रवार को भी जारी है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे पर यातायात सुचारू है। केदारनाथ के सोनप्रयाग से अभी तक 3400 यात्री रवाना हो चुके हैं। यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में मौसम सुहावना है। यहां चटख धूप खिली हुई है। यमुनोत्री हाईवे सहित यमुनोत्री पैदल मार्ग पर आवाजाही हो रही है।

यमुनोत्री धाम में यात्रियों की आवाजाही में गिरावट
वहीं पुजारी आशुतोष उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम में यात्रियों की आवाजाही में गिरावट आ गई है। इसका कारण बढ़ती ठंड हो सकता है।

दक्षिण-पश्चिमी मानसून का नियत समय पर लौटना नहीं था आपदा की वजह
18-19 अक्तूबर को उत्तराखंड में आई आपदा की वजह दक्षिण-पश्चिमी मानसून का नियत समय पर लौटना नहीं था। लंबे समय से मौसम परिवर्तन पर अध्ययन कर रहे गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून जब उत्तर-पूर्वी मानसून से मिला तो इसके परिणाम स्वरूप अतिवृष्टि हुई।  

ग्रीष्मकाल में बारिश के लिए जिम्मेदार दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 15 सितंबर तक लौट जाता है। इसके बाद उत्तर-पूर्वी मानसून आता है जो हिमालयी क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के लिए जिम्मेदार होता है। 
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